वीरों का सम्मान

वे वीर हमारी थाती हैं,
जो आजादी के शैदाई,
जो आजादी-हित तड़पे थे,
थी खून में जिनके गर्माई.

कुछ जाने थे कुछ अनजाने,
पर भारत मां के पूत खरे,
सीने पर गोली खाई थी,
इतिहास उन्हीं की साख भरे.

गांधी-नेहरू और तिलक-गोखले,
वीर सुभाष-से सेनानी,
लौह पुरुष-से महामानव थे,
शास्त्री जैसे महादानी.

वीर हकीकत भगतसिंह-से,
नन्हे वीरों की माता,
कैसे रहे गुलाम कहो तो,
प्यारी यह भारत माता.

झांसी की रानी ने जीवन,
इस पर था कुर्बान किया,
इंदिरा-चेन्नमा-सरोजिनी,
ने भी सब कुछ वार दिया.

आजादी भी पाई हमने,
संविधान निर्माण हुआ,
इसकी रक्षा कर पाए तो,
वीरों का सम्मान हुआ.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।