अटल जी अटल हो गए

अटल जी, आप सचमुच अटल हो गए,
गीत नया गाकर चुपचाप चले गए,
हार भी नहीं मानी, रार भी नहीं ठानी, 
काल के कपाल को धन्य करने चले गए.

अटल जी आपने कहा था, ”मैं अटल हूं”
मैं बिहारी भी हूं, हिमालय अचल हूं,
जानता हूं एक दिन पंचतत्व में लीन होना है,
फिर भी जब तक सांस ने साथ दिया मैं अटल हूं.”

इसी अटलता ने आपको अटल कर दिया,
उदारवादी व्यक्तित्व से सफल कर दिया,
विरोधियों को साथ लेकर चलने की कला सिखाई,
अपने हिंदी प्रेम से हिंदी को अमर कर दिया.

हे संवेदनशील कवि हृदय कुशल वक्ता, 
आपने अपने-पराये का भेद नहीं सीखा,
राजनीतिज्ञ भी आप ऐसे कुशल कहलाए,
डरना नहीं सीखा, किसी को डराना भी नहीं सीखा.

हर दलदल से न्यारे रहकर आपने, 
औरों के दलदल में अपने कमल खिलाए,
मन से सक्रिय राजनीति से सन्यास लेकर,
राजनीति के सन्यासी कहलाए.

अटल जी अटल समाधि में अटल हो गए,
नई दुनिया को जाने में सफल हो गए,
यों तो हर पल बहुत कुछ सिखाते रहे,
जाते-जाते भी हमारे हृदय में अटल हो गए.

 

पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी जी राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ कवि भी थे. ‘मेरी इक्यावन कविताएं’ वाजपेयी का प्रसिद्ध काव्यसंग्रह है. जगजीत सिंह के साथ उन्होंने दो ऐल्बम ‘नई दिशा’ (1999) और ‘संवेदना’ (2002) भी रिलीज कीं. वाजपेयी लंबे समय तक राष्ट्र धर्म, पांचजन्य और वीर-अर्जुन आदि पत्र-पत्रिकाओं के संपादक रहे. अटल बिहारी वाजपेयी को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया. 1992 में उन्हें पद्म विभूषण, 1994 में लोकमान्य तिलक पुरस्कार, 1994 में श्रेष्ठ सांसद पुरस्कार और 1994 में ही गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार से नवाजा गया. इसके अलावा 2015 में उन्हें भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया. हाईवे से लेकर निजीकरण तक आर्थिक सुधारों पर ‘अटल’ रहे पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी जी को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।