घर में खुशियों का हो राज

                                                          गृह-प्रवेश के अवसर पर विशेष

(तर्ज़-हे गरीबनिवाज मेरी बांह फड़ लै———————)

 

घर में खुशियों का हो राज, भगवन कृपा कर दे
तेरी रहमत का हो ताज, भगवन कृपा कर दे
भगवन कृपा कर दे, भगवन कृपा कर दे- घर में खुशियों का हो राज—–

1.जिधर नज़र जाए मेरी दाता, नूर नज़र तेरा आए
तेरे रहम के बादल दाता, मधुरिम रस बरसाएं
ऐसी रहमत कर दे ऐसी रहमत कर दे- घर में खुशियों का हो राज—–

2.जो भी आए घर में दाता, इज़्ज़त पूरी पाए
मिले रहें मन सबके दाता, दूरी न आने पाए
ऐसी रहमत कर दे ऐसी रहमत कर दे- घर में खुशियों का हो राज—–

3.स्वस्थ रहे तन, स्वस्थ रहे मन, प्रेम का घर में डेरा
साहस और लगन का भगवन, मन में रहे बसेरा
ऐसी रहमत कर दे ऐसी रहमत कर दे- घर में खुशियों का हो राज—–

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।