मुझे अपना बना लो गोविंदा

मुझे अपना बना लो गोविंदा
चरणों में बिठा लो गोविंदा- मुझे अपना बना लो गोविंदा———–
तुम मुरली मधुर बजाते हो
सुनते हैं रास रचाते हो
मुझे रास दिखादो गोविंदा- मुझे अपना बना लो गोविंदा———–

 

मीरा को अपना बनाया था
राधा को भी अपनाया था
मुझे भी अपनालो गोविंदा- मुझे अपना बना लो गोविंदा———–

 

गीता का ज्ञान सुनाते हो
जीवन का सार बताते हो
जीना सिखला दो गोविंदा- मुझे अपना बना लो गोविंदा———–

 

तेरे जन्मदिवस की वेला है
लगा प्रेम-प्यार का मेला है
मुझे प्रेम सिखा दो गोविंदा- मुझे अपना बना लो गोविंदा———–
मुझे दरश दिखा दो गोविंदा- मुझे अपना बना लो गोविंदा———–

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।