विशेष सदाबहार कैलेंडर-111

                                                   हिंदी दिवस पर विशेष
1.सच्चा है ज्ञान
भूत-भविष्य से अच्छा
है वर्तमान.
-गुरमैल भमरा

2.प्रेम ही प्रेम 
मिला है सब से ही 
रब की देन.
-गुरमैल भमरा

3.मैकाले की थोपी इंग्लिश ने 
बना दिया सबको गुलाम ।
हिन्द में पैदा हिन्दुस्तानी को
हिंदी में ही करना है सब काम ॥
-रविंदर सूदन

4.हिंदी का उत्थान करने के लिए,
हिंदी का सूर्य बनो,
सूर्य न बन सको तो मशाल ही बनो,
मशाल न बन सको तो दीपक ही बनो,
दीपक भी न बन सको तो जुगनू ही बनो,
पर कुछ बनो और हिंदी का उत्थान करो.
-लीला तिवानी

5.हिंदी भाषा देश की शान,
इससे भारत बने महान,
अपनी भाषा अपनाएं तो,
बढ़े देश का मान-सम्मान.
-लीला तिवानी

6.नकारात्मक इच्छा शक्ति मनुष्य की सबसे बड़ी कमजोरी है,
आइए हिंदी के प्रति सकारात्मक होकर,
अपनी मातृभाषा का सम्मान करें.
-लीला तिवानी

7.हिंदी का भान (सूर्य)
चमकाए जहान
हिंदी महान.
-लीला तिवानी

8.बात नहीं हम काम करेंगे,
जग में देश का नाम करेंगे,
शुभ संकल्प का संबल लेकर,
हिंदी का उत्थान करेंगे.
-लीला तिवानी

9.मैं भारत की बेटी हूं,
हिंदी की शान बढ़ाऊंगी,
हिंदी-विकास की ले मशाल मैं,
आगे बढ़ती जाऊंगी.
-लीला तिवानी

10.हिंदी भाषा अपनी भाषा,
जीवन को दिखलाती आशा,
हिंदी को अपनाकर हम सब,
इसको आगे बढ़ाएंगे.
-लीला तिवानी

11.हिंद देश के वासी हैं हम,
हिंदी को अपनाएंगे,
हिंदी भाषा का विकास कर,
गौरव अपना बढ़ाएंगे.
-लीला तिवानी

12.विश्व की भाषा बने ये कल्पना,
आओ हिंदी की सजाएं अल्पना.
प्रेम हो, सद्भाव हो, सत्कार हो,
मातृ भाषा का जहां आधार हो,
सर्व मंगल हो, यही है कामना,
आओ हिंदी की सजाएं अल्पना.
-रेखा राजवंशी

13.देश में अंग्रेजी की आवश्यकता है, 
किन्तु अपनी भाषा का नाश करने के लिए नहीं।
– महात्मा गांधी

14.अंग्रेजी में कुछ सीखना एक बात है, 
अंग्रेजी को अपने सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यों का माध्यम बना लेना दूसरी बात है. 
जापानियों, चीनियों आदि ने अंग्रेजी से सीखा है लेकिन अपनी भाषाओं को अविकसित मानकर उन्होंने अंग्रेजी को राजभाषा नहीं बनाया है.
– रामविलास शर्मा

15.है भव्य भारत ही हमारी मातृभूमि हरी भरी, 
हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा और लिपि है नागरी. 
-मैथिलीशरण गुप्त

16.मैं दुनिया की सभी भाषाओं की इज्जत करता हूं, 
पर मेरे देश में हिंदी की इज्जत न हो, 
यह मैं सह नहीं सकता: 
-आचार्य विनोबा भावे

17.संस्कृत की विरासत हिन्दी को तो जन्म से ही मिली है.
-राहुल सांकृत्यायन

18.भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल
बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल.
-भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

19.जिस देश को अपनी भाषा और साहित्य का गौरव का अनुभव नहीं है, 
वह उन्नत नहीं हो सकता. 
-डॉ. राजेंद्र प्रसाद

20.हमारी नागरी लिपि दुनिया की सबसे वैज्ञानिक लिपि है. 
-राहुल सांकृ्त्यायन

21.हिंदी हमारे राष्ट्र की अभिव्यक्ति का सरलतम स्त्रोत है. 
-समित्रानंदन पंत

22.सभी भारतीय भाषाओं के लिए 
यदि कोई एक लिपि आवश्यक है, 
तो वो देवनागरी ही हो सकती है. 
-जस्टिस कृष्णस्वामी अय्यर

23.हिंदी का प्रचार और विकास कोई रोक नहीं सकता. 
-पंडित गोविंद बल्लभ पंत

24.हिंदी भारतीय संस्कृति की आत्मा है. 
-कमलापति त्रिपाठी

25.कैसे निज सोऐ भाग को कोई सकता है जगा, 
जो निज भाषा-अनुराग का अंकुर नहिं उर में उगा. 
-हरिऔध

26.हिन्दी में हम लिखें पढ़ें, हिन्दी ही बोलें. 
– पं. जगन्नाथप्रसाद चतुर्वेदी

27.क्या संसार में कहीं का भी आप एक दृष्टांत उद्धृत कर सकते हैं, 
जहाँ बालकों की शिक्षा विदेशी भाषाओं द्वारा होती हो. 
-डॉ. श्यामसुंदर दास

28.देश में मातृ भाषा के बदलने का परिणाम यह होता है, 
कि नागरिक का आत्मगौरव नष्ट हो जाता है, 
जिससे देश का जातित्व गुण मिट जाता है. 
-सैयद अमीर अली मीर

29.दूसरों की बोली की नकल करना भाषा के बदलने का एक कारण है. 
-गिरींद्रमोहन मित्र

30.नागरी वर्णमाला के समान सर्वांगपूर्ण 
और वैज्ञानिक कोई दूसरी वर्णमाला नहीं है. 
-बाबू राव विष्णु पराड़कर

31.हम हिंदी के हिंदी हमारी,
हिंदी हमारी शान है,
हिंदी भाषा के विकास से,
होना देश-उत्थान है.
-लीला तिवानी

 

प्रस्तुत है पाठकों के और हमारे प्रयास से सुसज्जित विशेष सदाबहार कैलेंडर. कृपया अगले विशेष सदाबहार कैलेंडर के लिए आप अपने अनमोल वचन भेजें. जिन भाइयों-बहिनों ने इस सदाबहार कैलेंडर के लिए अपने सदाबहार सुविचार भेजे हैं, उनका हार्दिक धन्यवाद.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।