कविता

फूलों की कविता-17

                                  फूलों की 21 कविताएं से संग्रहीत

 

17. कर देते महकीली दुनिया

 

 

हम फूलों की बात निराली,

हमसे ही है सजीली दुनिया।

लाल-गुलाबी-नीले-पीले,

कई रंगों से रंगीली दुनिया॥

हम ही तो सपने रंगते हैं,

करते हैं सपनीली दुनिया।

अपनी भीनी महक लुटाकर,

कर देते महकीली दुनिया॥

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

One thought on “फूलों की कविता-17

  1. हमने प्रभु से खुशबू पाई,
    सुंदरता का वर पाया ।
    कांटों-संग कोमलता पाई,
    पाकर, जग को महकाया ।।
    हम कब कहते हमें न तोड़ो,
    हम तो झर ही जाएंगे ।
    पर, झरकर मरने से पहले,
    जग सुरभित कर जाएंगे ॥

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