करिश्माई कैच

क्रिकेट मैच की शौकीन नीलिमा टी.वी. देख रही थी. दुबई में एशिया कप-2018 के एक मुकाबले में भारत और पाकिस्तान क्रिकेट मैच चल रहा था. मनीष पांडे ने पाकिस्तानी कप्तान का करिश्माई कैच लपका और इस तरह सरफराज 6 रन बनाकर आउट हो गए. करिश्मा इसलिए कि पांडे ने यह कैच दो किस्तों में पूरा किया. केदार जाधव की गेंद पर पांडे ने बाउंड्री के पास कैच पकड़ा. वह दौड़कर आ रहे थे इसलिए खुद को रोक नहीं पाए और रोप क्रॉस कर गए. लेकिन इससे पहले उन्होंने बॉल हवा में उछाल दी और दोबारा फील्ड में आकर कैच को पूरा करने में कामयाब रहे. कामेंट्री में करिश्माई कैच शब्द सुनते ही नीलिमा अतीत में खो गई.

उसके साथ भी तो करिश्मा ही हुआ था. एकबारगी तो वह भी सुनील को खो चुकी थी. कॉलेज के दिनों में नीलिमा और सुनील को भावी जोड़ी के रूप में देखा जाता था. नीलिमा भी पांडे की तरह खुद को रोक नहीं पाई थी और अपनी अभिन्न सखी सनी को सुनील से मिलवाकर रोप क्रॉस करने की चूक कर बैठी थी. उस दिन से फैशनपरस्त सनी और सुनील के बीच वह खुद को अजनबी समझने लगी थी.

”नीलू, तुम्हारी सखी सनी तो ग़ज़ब है, क्या अट्रैक्टिव पर्सनलिटी है उसकी!” एक दिन सुनील ने कहा था.

”अब तो वह मेरी नहीं, तुम्हारी सखी अधिक लग रही है.” नीलिमा कहना चाहती थी, लेकिन चुप्पी लगा गई.

नीलिमा और सुनील का मिलना-जुलना कम हो गया था. फिर एक दिन नीलिमा को ढूंढते-ढूंढते सुनील उसके पास पहुंच गया था. ”नीलू, हो सके तो मुझे माफ कर देना.” उसने कहा था. नीलू ने जवाब देना मुनासिब नहीं समझा.

”नीलू, सनी के चक्कर में आकर मैंने तुम्हारा दिल दुखाया है, लेकिन अब असलियत मेरे सामने आ गई है. शायद तुम्हें मालूम न हो, पर फैशनपरस्त सनी अपनी फैशनपरस्ती को बनाए रखने के लिए किसी एक लड़के से दोस्ती करती है, फिर कोई दूसरा लड़का मिल जाए तो उसका पल्ला पकड़ लेती है.” नीलू अब भी चुप थी. छूटी हुई कैच की बॉल भला क्या आसानी से पकड़ में आती है!

”नीलू, चलो अभी मैं तुम्हारे घर चलता हूं और तुम्हारे ममी-पापा से तुम्हारा हाथ मांगता हूं, मेरे ममी-पापा पहले ही वहां पहुंच चुके हैं.”

सुनील उसका हाथ पकड़कर उसे लिए चला जा रहा था. पांडे की तरह हवा में उछली हुई बॉल को दोबारा पकड़कर करिश्माई कैच लपकने में वह कामयाब रही थी.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।