कविता

किसान

इस पीढ़ी के बाद ,किसानी ना होंगी।
जिंदा तो होंगे पर,जवानी ना होगी।।

रोटी सबकी चाह,पर खेती ना करना।
सर पर पगड़ी धार,रवानी ना होगी।।

अंग्रेजी अब स्कूल खूले है गाँवो मे ।
आना जाना छूटा ,बरगद छावो मे ।।

टाई बाँध-बाँध कर,अब बेटे जाते है ।
अब कहाँ पड़ती है,बेवाई पावो मे ।।

सबको स्वास्थ्य निरोग की चाहत है।
पर रहने की चाह नहीं है गाँवो मे ।।

गर ना चेती जनता ,या सरकार हमारी।
बिन पेड़ों के ना ,कभी मिटे बिमारी।।

शहरों जैसी चकाचौंध, गर हो गावो मे।
बेटे का जीवन बीते ,मा के पावो मे।।

हृदय जौनपुरी

हृदय नारायण सिंह

मैं जौनपुर जिले से गाँव सरसौड़ा का रहवासी हूँ,मेरी शिक्षा बी ,ए, तिलकधारी का का लेख जौनपुर से हुई है,विगत् 32 बरसों से मैं मध्यप्रदेश के धार जिले में एक कंपनी में कार्यरत हूँ,वर्तमान में मैं कंपनी में डायरेक्टर के तौर पर कार्यरत हूँ,हमारी कंपनी मध्य प्रदेश की नं-1 कम्पनी है,जो कि मोयरा सीरिया के नाम से प्रसिद्ध है। कविता लेखन मेरा बस शौक है,जो कि मुझे बचपन से ही है, जब मैं क्लास 3-4 मे था तभी से