Monthly Archives: September 2018

  • गीत

    गीत

    भूला बिसरा गीत हूँ मैं , जब चाहा गुनगुना लिया । खुदा की कोई भूल हूँ मैं , जब चाहा आजमा लिया । साहिल का पत्थर हूँ मैं, जब चाहा पार लगा लिया । रास्ते की...

  • इंतजार

    इंतजार

    जबसे गए हो तुम पिया , न खत भेजा न पूछी बात । जबसे मिले हो तुम पिया , न चैन रहा न दिल है साथ । कैसी हो तुम कब आओगी नैनो में तुम कब...

  • इबादत

    इबादत

    इबादत ही तो है जिंदगी , कर्म करो फल की इच्छा मत करो । अहसान ही तो है जिंदगी ऊपरवाले की नाचते रहो उफ्फ मत करो । चलते रहो अनजान रास्तों पर , मंजिल की तलाश...




  • कविता….

    कविता….

    कविता किसी विधालय, महाविधालय में सिखाई-पढ़ाई नहीं जाती जब एक इंसान लेता है जन्म पैदा होता है तभी एक कवि- मन जैसे-जैसे बढ़ता है इंसान कविता भी कोपलित होती है पल्लवित होती है पुष्पित होती है...

  • महाभारत

    महाभारत

    बस कुछ दिन की बात बची है, दुनियाभर मे हाहाकार मची है । सजे-धजे सब हथियार पड़े है , ले-लेकर सब कुछ साथ खड़े है । दो-दो हाथ में अब देरी क्या है, मेरे से तगड़ी,अब...

  • अस्तित्व

    अस्तित्व

    “अस्तित्व” मैं अपने आप को तलाशती रही और तुम कहते रहे – तुम हो मेरे अपने । मैं सहज सब स्वीकारती रही जो तुमने कहा । तुमने मुझे विश्वास दिलाया- तुम मेरी दुनिया हो, मेरी पहचान...

  • धुंध छंट गई

    धुंध छंट गई

    समय बदलता ही रहता है मौसम भी बदलता ही रहता है कानून भी बदलते रहते हैं उसूल भी बदलते रहते हैं समय और मौसम की धुंध को सहन करना आसान है पर बदलते उसूलों और नियमों...