Monthly Archives: September 2018

  • गीत

    गीत

    जाने-अनजाने ही जुड़ गई तुमसे मेरी हर अभिलाषा तुम्हें समर्पित मेरा जीवन अर्पण तुमको ही हर आशा मन-मंदिर में जो स्थापित है रत्न-जड़ित वो मूर्ति हो मेरे बहुरंगी स्वप्नों की तुम ही इच्छित पूर्ति हो जब...

  • महाप्रयाण

    महाप्रयाण

    ‘चलो उठ भी जाओ, इतना गुस्सा, ब्लड प्रेशर बढ़ जाएगा। देखो अब तो बच्चे भी अपनी अपनी दुनिया में मग्न हो गये हैं। हमें ही एक दूसरे का सहारा बनना है।’ ‘मुझे नहीं बात करनी तुमसे,...

  • अंतश्चेतना के संकेत

    अंतश्चेतना के संकेत

    थोड़ा सहज हो जाने के बाद डी.एस.पी. साहब रूपा को अपने घर ले आए थे. अपनी पत्नि स्नेहा को रूपा की सुरक्षा का जिम्मा सौंप वे पुनः अपने कार्यालय चले गए. स्नेहा ने न रूपा से...


  • दिशा भ्रम

    दिशा भ्रम

    अपनेआप और अपनों से प्रेम चन्द्रप्राल जी को दिल का दौरा पड़ता है और वो गिर जाते हैं ! थोड़ी देर बाद वो अपने आपको एक ऐसे स्थान पर पाते हैं जहाँ सब कुछ मौन है...

  • 4 पत्नियां

    4 पत्नियां

    एक समृद्ध व्यापारी था जिसकी 4 पत्नियां थीं। वह चौथी पत्नी से सबसे ज्यादा प्यार करता था और उसे समृद्ध वस्त्रों से सजाता था और उसे सबसे स्वादिष्ट व्यंजन आदि खिलाता था । उसने उसकी बहुत...

  • सब्जीवाला कहाँ गया

    सब्जीवाला कहाँ गया

    एक बड़े शहर की पॉश कॉलोनी में बनवारी नाम का सब्जी वाला लगातार सब्जियां भेजने के लिए एक आता था। यह सब्जी वाला काफी समय से यहां पर सब्जियां दे रहा है और उसका संबंध वहां...

  • मील का पत्थर

    मील का पत्थर

    गुजर गया तूफान भी , पर उसे हिला ना पाया। मील के पत्थर ने हमेशा अपना फर्ज निभाया।। रहा स्थिर , कभी भी हिला नही अपनी जगह से, बिना बोले,हमेशा लोगो को सही रास्ता दिखलाया।। सही...

  • हर पल घटता जीवन

    हर पल घटता जीवन

    बून्द-बून्द सी टपक रही है जिंदगी। हर पल हर दम रिश रही है जिंदगी। चट्टानों सा खुद को समझने वालों, छोटे कंकरों में बिखर रही है जिंदगी। रिश्तों का बांध टूट कर बह रहा है। शैलाबो...

  • जीवन सन्ध्या

    जीवन सन्ध्या

    “जीवन-संध्या” बरसों से यूँ ख़ामोश खड़ा निहार रहा हूँ आते-जाते एक एक राहगीर को । कभी वो बैठा करते थे मेरी छाया में , ठंडी बयार दुलार जाती थी उनके तन मन को । और वो...