गीत/नवगीत

गीत

जाने-अनजाने ही जुड़ गई तुमसे मेरी हर अभिलाषा तुम्हें समर्पित मेरा जीवन अर्पण तुमको ही हर आशा मन-मंदिर में जो स्थापित है रत्न-जड़ित वो मूर्ति हो मेरे बहुरंगी स्वप्नों की तुम ही इच्छित पूर्ति हो जब भी घोर निराशा छाए देती तुम्हीं मुझे दिलासा तुम्हें समर्पित मेरा जीवन अर्पण तुमको ही हर आशा अस्तित्व मेरा […]

लघुकथा

महाप्रयाण

‘चलो उठ भी जाओ, इतना गुस्सा, ब्लड प्रेशर बढ़ जाएगा। देखो अब तो बच्चे भी अपनी अपनी दुनिया में मग्न हो गये हैं। हमें ही एक दूसरे का सहारा बनना है।’ ‘मुझे नहीं बात करनी तुमसे, बुढापे में भी मुझे चिढाते हो, माना गाँव से आई थी, पर तुम्हारे रंग ढंग में रम गई थी […]

लघुकथा

अंतश्चेतना के संकेत

थोड़ा सहज हो जाने के बाद डी.एस.पी. साहब रूपा को अपने घर ले आए थे. अपनी पत्नि स्नेहा को रूपा की सुरक्षा का जिम्मा सौंप वे पुनः अपने कार्यालय चले गए. स्नेहा ने न रूपा से कुछ पूछा, न पति से. डी.एस.पी. की पत्नि होने के कारण सुरक्षा का अर्थ वह अच्छी तरह जानती-समझती थी. […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

वेदमार्ग ही मनुष्य को ईश्वर, जीवात्मा व संसार का ज्ञान कराकर मोक्ष में प्रवृत्त कराता है

ओ३म् संसार में मुख्यतः दो प्रकार की जीवन शैली एवं संस्कृतियां हैं। एक त्याग की ओर प्रवृत्त करती हैं तो दूसरी भोग की ओर। वैदिक धर्म व संस्कृति मनुष्य को त्यागपूर्वक जीवन व्यतीत करने का सन्देश देती है। पाश्चात्य एवं अन्य विदेशी संस्कृतियां प्रायः अपने अनुयायियों को भोग करने का संकेत देती हैं। त्याग का […]

लघुकथा

दिशा भ्रम

अपनेआप और अपनों से प्रेम चन्द्रप्राल जी को दिल का दौरा पड़ता है और वो गिर जाते हैं ! थोड़ी देर बाद वो अपने आपको एक ऐसे स्थान पर पाते हैं जहाँ सब कुछ मौन है । वो सबसे पूछते हैं कि आप सब मौन क्यों हैं ? कोई ज़वाब नहीं आता ! फिर धीरे […]

बोधकथा

4 पत्नियां

एक समृद्ध व्यापारी था जिसकी 4 पत्नियां थीं। वह चौथी पत्नी से सबसे ज्यादा प्यार करता था और उसे समृद्ध वस्त्रों से सजाता था और उसे सबसे स्वादिष्ट व्यंजन आदि खिलाता था । उसने उसकी बहुत अच्छी देखभाल करता था और उसे सदा सर्वश्रेष्ठ के अलावा उसने कुछ और नहीं दिया। वह तीसरी पत्नी से […]

लघुकथा

सब्जीवाला कहाँ गया

एक बड़े शहर की पॉश कॉलोनी में बनवारी नाम का सब्जी वाला लगातार सब्जियां भेजने के लिए एक आता था। यह सब्जी वाला काफी समय से यहां पर सब्जियां दे रहा है और उसका संबंध वहां पर सभी लोगों से बहुत अच्छा है यूं तो बनवारी जो सब्जियां लाता है वह काफी अच्छी होती है […]

कविता

मील का पत्थर

गुजर गया तूफान भी , पर उसे हिला ना पाया। मील के पत्थर ने हमेशा अपना फर्ज निभाया।। रहा स्थिर , कभी भी हिला नही अपनी जगह से, बिना बोले,हमेशा लोगो को सही रास्ता दिखलाया।। सही राह दिखाना हर एक के बस की बात नही । दुखो में साथ निभाना हर एक के बस की […]

कविता

हर पल घटता जीवन

बून्द-बून्द सी टपक रही है जिंदगी। हर पल हर दम रिश रही है जिंदगी। चट्टानों सा खुद को समझने वालों, छोटे कंकरों में बिखर रही है जिंदगी। रिश्तों का बांध टूट कर बह रहा है। शैलाबो के बहाव ने बह रही है जिंदगी।। घर की नींव में छलावों की रेत भरी है। दर्द के झटकों […]

कविता

जीवन सन्ध्या

“जीवन-संध्या” बरसों से यूँ ख़ामोश खड़ा निहार रहा हूँ आते-जाते एक एक राहगीर को । कभी वो बैठा करते थे मेरी छाया में , ठंडी बयार दुलार जाती थी उनके तन मन को । और वो कुछ पल बैठकर शांति की छाँव में बढ़ जाते अपने उद्देश्य पथ पर । फागुन में भौंरों की गूंजन […]