Monthly Archives: October 2018

  • आँखें

    आँखें

    रौशनी पंद्रा सोला वर्षय एक खूबसूरत लड़की तो थी ही, मगर इस से भी ज़्यादा फुर्तीली काम काज में माहिर और गाने में सुरीली आवाज़ की मालिक थी। हर सुबह वोह माँ के साथ बाबा नानक...



  • मैं क्यों नही बदला

    मैं क्यों नही बदला

    ग़ज़ल बदलाव का है दौर मै क्यों नही बदला। है दूर तलक शोर मै क्यों नही बदला। जाहिद मुरीद और हबीब कुछ रकीबों ने। कितना लगाया ज़ोर मै क्यों नही बदला। हसरतें बेज़रियां लाचारियां हालात। देखें...

  • आई दिवाली आई दिवाली

    आई दिवाली आई दिवाली

    बाल कविता आई दिवाली आई दिवाली। झड़ी ख़ुशी की लाई दिवाली।। पिंकी बिट्टू ध्यान ज़रा दो, बबली चिंटू मान ज़रा लो। बम पाठकों से मुंह मोड़ो, हँसी की फुलझड़ी तुम छोड़ो। शोर धुंए को दूर रखो...

  • भूखा बचपन

    भूखा बचपन

    जब भूखा हो बचपन तो फिर प्रगति की बात कहां भांती है, देख अस्वस्थ मासूमों को दुखती मेरी अपनी छाती है। भूखे प्यासे बच्चे भटकते हैं अली- गली और सड़कों पर, तन पर कपड़े नहीं है...

  • ईमानदारी और खुद्दारी

    ईमानदारी और खुद्दारी

    “ईमानदारी और खुद्दारी” सुप्रिया अपनी बेटी तान्या के साथ ओला कैब में एक दिन मॉल जा रही थी। मॉल जाकर दो-तीन घंटे उसने शॉपिंग की । बिलिंग काउंटर में जाकर अपना मोबाइल निकालने गई तो पता...



  • दुर्गा

    दुर्गा

    ”दुर्गा दुर्गति दूर कर, मंगल कर सब काज, मन मंदिर उज्ज्वल करो, मात भवानी आज.” ‘वह दुर्गा बनकर आई, हमारे बेटे की जान बचाई’. यह कहना है किरण सांगले के परिजनों का. किरण सांगले, जो मुंबई...