राजनीति

सरदार वल्लभ भाई पटेल

नवजातिवाद की जगह विकलांगों, अनाथों, ज़रूरतमन्दों के हित को मानते थे सरदार पटेल। विकलांग वीर बच्चूसिंह भी अपने राजनीतिक जीवन मे उनके साथी थे। जब नेहरू और माउंटबेटन ने भारत एकीकरण में शामिल हुए विकलांग वीर बच्चूसिंह के परिवार को कैद किया, तब राजसत्ता को समाप्त करने निकले सरदार पटेल ने भरतपुर और उनके मित्र […]

कविता

दिवाली पर घर आ जाओ

मेरे प्यारे बेटे राजा जल्दी से घर आ जाओ। दिवाली पर राह तके माँ, कुछ दीप तुम भी जला जाओ, आज बनाई घर मे गुजिया मीठी, मावे की जगह प्यार भरा है इस मे और बनाई मठरी ,लड्डू ,सकलपारे भी थोड़ा सा तुम खा जाओ, मेरे प्यारे बेटे राजा। दूर बहुत भेजा है घर से […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

इक यही मंजर दिखाई दे रहा है हर तरफ़ बस ड़र दिखाई दे रहा है हो रहा है मजहबों के नाम पर जो सिर्फ आड़म्बर दिखाई दे रहा है कह रहे हैं आप आलीशान जिसको घर मुझे जर्जर दिखाई दे रहा है जाविये का फ़र्क है, वो ईश मुझको पर तुझे पत्थर दिखाई दे रहा […]

उपन्यास अंश

ममता की परीक्षा ( भाग -10 )

ममता की परीक्षा ( भाग – 10 ) ‘ …………और फिर तुम्हारा उसके पिताजी के बारे में झूठ बोलना कि वो तुमसे मिले थे और तुमसे ये सब बातें की थीं । क्या मिलेगा तुम्हें उससे झूठ बोलकर ? वो झूठ जो उसे पता चल ही जायेगा । ‘ तभी उसके दिल ने सरगोशी की […]

उपन्यास अंश

ममता की परीक्षा ( भाग – 9 )

  रजनी की आंखों से बहते आंसू देखकर सुधीर और बिरजू को भी अहसास हो गया था कि कोई बहुत खास बात है जिससे यह लड़की परेशान हो गई है । लेकिन क्या ? राधे और मन्नू भी हैरत से रजनी की तरफ देखे जा रहे थे । उनकी समझ में कुछ भी नहीं आ […]

कविता

मतलब 

मतलब  , जी हाँ मतलब , न जाने मैं क्यों इतना ‘बदनाम’ हूँ ,  अरे मैं ही तो हर रिश्ते की ‘जान’ हूँ,  नातेदारी हो या दोस्ती  मैं ही सबकी ‘फ़रियाद’ हूँ,  मैं ही हर रिश्ते की ‘बुनियाद’ हूँ , मेरे म से मिलने की मदद मिलती है,  त में तारीफ की खुशबू महकती है […]

लघुकथा

पिंक शूज़

उफ़ जूही… कितने पसन्द हैं तुम्हे जूते? बड़ी हो जाओ तुम्हारे लिए जूतों की दूकान ही खोल देंगे…’ दिव्या ने हँसते हुए जूही के गाल पर हल्की सी चपत लगायी ‘मम्मा सिर्फ एक और ये पिंक वाले शूज़ … इसके बाद पक्का कुछ और नहीं। आपने प्रॉमिस किया था मम्मा कि मेरी रिपोर्ट्स और ऑपरेशन […]

लघुकथा

करवाचौथ

  ‘अरे ज़रा नमक लेती आना सब्ज़ी में कम रह गया है और रोटी ज़रा पतली …’ वाक्य अधूरा रह गया विद्यादत्त का ‘कभी कभार नमक कम भी खा लोगे तो कुछ बिगड़ेगा नहीं तुम्हारा… एक ओर मैं सुबह से भूखी प्यासी तुम्हारे लिए व्रत रखे हूँ … उस पर से काम में भी लगी […]

गीतिका/ग़ज़ल

इस रस्म की शुरुआत बस मेरे बाद कीजिए

इस रस्म की शुरुआत बस मेरे बाद कीजिए जिनसे रौशन है हुश्न, उन्हीं को बर्बाद कीजिए गर पूरी होती हो यूँ ही आपके ख़्वाबों की ताबीरें तो खुद को बुलबुल और मुझे सैय्याद कीजिए ये कि क्या हुज़्ज़त है आपके नूर-ए-नज़र होने की दिल की बस्तियाँ लुट जाएँ,और फिर हमें याद कीजिए जो थे सितमगर,सबको […]

कविता

प्रथम प्रणय

” प्रथम प्रणय ” प्रथम प्रणय की वो अनुभूति वो निश्छल दो नैनों की भाषा , ह्रदय की वो आतुरता और मन की निशब्द अभिलाषा । प्रयास तुम्हारी आंखों का पढ़ना मेरी आंखों की भाषा , अंतस तक पहुँचकर मेरे ह्रदय की बात जानने की जिज्ञासा । पढ़ ली थी मैंने भी तुम्हारे दो नैनों […]