सामाजिक

दिल्ली के जांबाज बच्चे

अक्सर हम बच्चों को बच्चे कहकर उनकी काबिलियत को नजर अंदाज करते हैं, लेकिन कभी-कभी ये बच्चे ऐसे अनोखे कारनामे कर देते हैं, कि उनका गज़ब का साहस देखकर हम दांतों तले उंगली दबा लेने को विवश हो जाते हैं. ऐसे ही कारनामे दिल्ली के दो जांबाज बच्चों ने कर दिखाए हैं. उनकी जांबाजी को सलाम करते हुए प्रस्तुत है उनके साहसी कारनामों को सलाम.

 

रोहिणी सेक्टर-3 डी ब्लॉक में चौक के पास मनीष डेरी चलाते हैं. गुरुवार दोपहर पिता मनीष और उनका 14 साल का बेटा सनी सुबह से दोपहर तक की कलेक्शन करीब साढ़े तीन लाख रुपये को बैंक में जमा कराने जा रहे थे. बैग बेटे के पास था. अभी यह दोनों डेरी से बाहर निकले ही थे कि बाइक सवार दो बदमाश वहां आ धमके. लुटेरों में से एक ने मनीष की आंखों में मिर्ची पाउडर डाल दिया और दूसरे लुटेरे ने पिस्टल निकालकर सनी से बैग लूटने की कोशिश की. सनी ने इसका विरोध किया, लेकिन एक लुटेरे ने उसको पिस्टल से गोली मार दी, दूसरे ने बैग लूट लिया. सनी ने बहादुरी दिखाते हुए एक लुटेरे को दौड़ा-दौड़ाकर धर दबोचा, बाद में उस लुटेरे की निशानदेही पर दूसरा लुटेरा भी धरा गया. सनी के पेट के नीचे सीधे पैर में गोली लगी है. उसे प्राइवेट अस्पताल में दाखिल कराया गया है. लड़के की हालत स्थिर बताई जा रही है. सनी के साहस को सलाम.

ग्रेटर नोएडा से बीटेक कर रही एक लड़की रात करीब 12:30 बजे पीवीआर अनुपम साकेत के बाहर अपने दोस्त के साथ रोड क्रॉस कर रही थी. तभी उसका मोबाइल स्कूटी सवार तीन झपटमारों ने छीन लिया. इससे पहले कि तीनों बदमाश भाग पाते, लड़की ने स्कूटी के पीछे बैठे एक बदमाश को पकड़कर नीचे गिरा लिया. खुद को फंसते देख दोनों साथी उसे छोड़कर भाग गए. बाद में पुलिस ने दोनों साथी और उनसे झपटे जाने वाले मोबाइल फोन खरीदने वाले एक शख्स को भी गिरफ्तार कर लिया. उनसे 26 मोबाइल बरामद हुए. बहादुर लड़की की जांबाजी को सलाम.

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

One thought on “दिल्ली के जांबाज बच्चे

  • लीला तिवानी

    सभी लोग रोहिणी के 14 साल के सनी और साकेत की लड़की जैसी बहादुरी दिखाएं, तो झपटमारों के हौसले पस्त हो जाएंगे.

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