कविता

मेरे इश्क़ का सफर अभी जारी है

आँखों में नशा,जिस्म में खुमारी है
मेरे इश्क़ का सफर अभी जारी है

मुझे देख वो हया में लिपट जाती हैं
कुछ तो है ऐसा जिसकी राजदारी है

इश्क़ कैसे न हो बेसबर कोई तो बताए
जब हुश्न के कयामत ढ़ाने की तैयारी है

वो खुदा,ये कायनात सब तो उसके कायल हैं
न जाने इस आफ़ताब में जलने की किसकी बारी है

उनके कुछ ख़्वाब मेरी ही आँखों में जागते हैं
मानो कि उनकी नींदों की मुझपे उधारी है

अभी तुम नासमझ हो नहीं समझ पाओगे कि
हुश्न ने बेऔज़र होके भी कितनी जवानियाँ मारी है

सलिल सरोज

*सलिल सरोज

जन्म: 3 मार्च,1987,बेगूसराय जिले के नौलागढ़ गाँव में(बिहार)। शिक्षा: आरंभिक शिक्षा सैनिक स्कूल, तिलैया, कोडरमा,झारखंड से। जी.डी. कॉलेज,बेगूसराय, बिहार (इग्नू)से अंग्रेजी में बी.ए(2007),जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय , नई दिल्ली से रूसी भाषा में बी.ए(2011), जीजस एन्ड मेरी कॉलेज,चाणक्यपुरी(इग्नू)से समाजशास्त्र में एम.ए(2015)। प्रयास: Remember Complete Dictionary का सह-अनुवादन,Splendid World Infermatica Study का सह-सम्पादन, स्थानीय पत्रिका"कोशिश" का संपादन एवं प्रकाशन, "मित्र-मधुर"पत्रिका में कविताओं का चुनाव। सम्प्रति: सामाजिक मुद्दों पर स्वतंत्र विचार एवं ज्वलन्त विषयों पर पैनी नज़र। सोशल मीडिया पर साहित्यिक धरोहर को जीवित रखने की अनवरत कोशिश। आजीविका - कार्यकारी अधिकारी, लोकसभा सचिवालय, संसद भवन, नई दिल्ली पता- B 302 तीसरी मंजिल सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट मुखर्जी नगर नई दिल्ली-110009 ईमेल : salilmumtaz@gmail.com