दुर्गा

”दुर्गा दुर्गति दूर कर, मंगल कर सब काज,
मन मंदिर उज्ज्वल करो, मात भवानी आज.”

‘वह दुर्गा बनकर आई, हमारे बेटे की जान बचाई’. यह कहना है किरण सांगले के परिजनों का.

किरण सांगले, जो मुंबई के आरे पुलिस स्टेशन में पुलिस हवलदार के पद पर तैनात हैं. नवरात्रि के मद्देनजर रात्रिपालीन बंदोबस्त खत्म कर वह बाइक से घर की ओर जा रहे थे, कि वेस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे पर बांद्रा ब्रिज से गुजरने के दौरान उनके सीने में तेज दर्द हुआ. हालत खराब होने से वह बाइक सहित बांद्रा की भीड़भाड़ वाली सड़क पर ही गिर गये और बेसुध हो गये. किसी ने सड़क पर पड़े दर्द से तड़प रहे एक अनजान शख्स की मदद करने की जहमत नहीं उठाई.

जाको राखें साईंयां, मार सके न कोय. अचानक वहां से पुलिस की वर्दी में एक महिला गुजरी, जिसकी नजर उस अज्ञात लाचार व्यक्ति पर पड़ी. महिला ने बिना वक्त जाया किए निकम नामक अपने एक सहयोगी के साथ मिलकर पीड़ित को अंधेरी के मरोल स्थित सेवन हिल्स अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों की कड़ी मशक्कत से पीड़ित की जान बचाई जा सकी. किरण को गंभीर हार्ट अटैक आया था. कुछ देर और होती तो उनकी जान भी जा सकती थी.

सोमवार को रात की ड्यूटी खत्म कर मनीषा मंगलवार सुबह अपने घर जा रही थीं. उसी दौरान उन्हें बांद्रा ब्रिज पर दर्द से तड़पते हुए किरण सांगले दिखाई दिए. मनीषा ने जिस मानवीयता और सूझबूझ का परिचय देते हुए पुलिस हवलदार किरण को बचाया, वह अनुकरणीय और सराहनीय है. वह देवी दुर्गा के रूप में ही तो अवतरित हुई.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।