कविता

वो जो अपने थे पराये हो गए
प्यार में कसमें,वादें,जाए हो गए

इश्क़ भरपूर किया था।
नींदों को भी खुद से दूर किया था।

लौटने की उम्मीदें अब भी हैं
भले ही जमाने में हम
धोख़ा खाए हो गए।

तुमने थाम लिया हाथ किसी और का,
हमारे सुनहरे सपने, शायद काले साए हो गए।

खैर जी लेंगे हम बेख़ुदी की ज़िन्दगी
यह सोचकर
कि हमारी इबादतें किसी के

लिए नसीब और दुआएँ, हो गए।

— पवन’अनाम’
बरमसर

परिचय - पवन अनाम

नाम: पवन कुमार सिहाग (पवन अनाम) व्यवसाय: अध्यनरत (बी ए प्रथम वर्ष) जन्मदिनांक: 3 जुलाई 1999 शौक: कविता ,कहानी लेखन ,हिंदी एवं राजस्थानी राजस्थानी कहानी 'हिण कुण है' एक मात्र प्रकाशित लघुकथा ! शागिर्द हूँ! व्हाट्सएप्प नंबर 9549236320