लेख सामाजिक

    “ लक्ष्य और दायित्व ”

“ लक्ष्य और दायित्व ” मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, इसी समाज में रहते  हुए उन्हें अपने उत्तरदायित्व  को निभाना पडता है जिसमें दो बातें प्रथम रूप से आती है…. पहला अपने जीवन का लक्ष्य और  दूसरा उस लक्ष्य की ओर अग्रसर होते हुए अपने समाज- परिवार के रिश्तों को समझना,  परन्तु लक्ष्य पाने का […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

खुद को खुदा समझने वाले, अहंकार में फँस जाते हैं, छोटी-छोटी बातों पर भी, गुस्से से वो लस जाते हैं। अन्धकार में दीप जलाकर, जग को रोशन करने वाले, मानवता हित जीने वाले, अक्सर खुदा सा बन जाते हैं। — डॉ अ कीर्तिवर्धन

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल – सँभाल कर रखना

प्रेम की ज्योति बाल कर रखना प्रीत के पल सँभाल कर रखना छोड़ना तुम सभी गमों को अब पाँव तो तूम सँभाल कर रखना खुद कभी तुम चलो नहीं चालें हर बला रोज़ टाल कर रखना राह चलना ज़रा सँभल कर तुम हर उत्तर पर सवाल कर रखना कहन पर ध्यान दे सदा चौकस ग़म […]

गीतिका/ग़ज़ल

कातिल निगाहों को उठाइए जरा

ये बच्चा सच बहुत बोलता है,यहाँ जी नहीं पाएगा ज़माने के मुताबिक इसे झूठ भी सिखलाइए जरा बेशुमार खुशी बयाँ कर दी सरे-महफिल आपने हर एक खुशी में छिपा दर्द भी दिखलाइए जरा ये सारे नए वायदों की सरकार है मेरे हुज़ूरे-वाला एक बार वोट देके देखिए,फिर मुस्कुराइए जरा कब तक दूसरों के भरोसे इंक़लाब […]

कहानी

नया सवेरा

गंगापुर में रहनेवाला बिरजू एक सामान्य सा किसान था । अपनी थोड़ी सी खेती में मेहनत करके अपने दोनों बेटों के साथ हँसी खुशी जीवनयापन करता था । खेती से जो भी उत्पन्न होता उसी को भगवान की कृपा मानकर अभावों में भी सदैव खुश रहता । आधुनिकता और विकास की बयार बहते हुए धीरे […]

कविता

फिर सदाबहार काव्यालय-3

इन्तजार हर पल उसका इन्तजार रहता है, दिल उसके लिए बेकरार रहता है, इन्तजार कभी खत्म न हो, इस बात का हमेशा ख्याल रहता है. हालत कह रहे हैं मुलाक़ात नहीं मुमकिन उम्मीद कह रही है थोड़ा इन्तजार कर, कभी खत्म न हो यह इन्तजार, ऐसा कहती है दिल की पुकार. कब रास्ता बन जाए […]

लघुकथा

निष्कर्ष

”तुमने मेरा दामन छोड़ दिया क्या?” भेजे हुए संदेश से उम्मीद तनिक नाउम्मीद दिख रही थी. ”ऐसा कैसे हो सकता है, उम्मीद का दामन छोड़कर तो विश्वास के अस्तित्व की संकल्पना भी नहीं की जा सकती.” विश्वास ने विश्वासपूर्वक संदेश का प्रतिउत्तर दिया. विश्वास ने सदेश तो भेज दिया था, पर सोच रहा था कि […]

कहानी

नया सवेरा

 नया सवेरा —————— गंगापुर में रहनेवाला बिरजू एक सामान्य सा किसान था । अपनी थोड़ी सी खेती में मेहनत करके अपने दोनों बेटों के साथ हँसी खुशी जीवनयापन करता था । खेती से जो भी उत्पन्न होता उसी को भगवान की कृपा मानकर अभावों में भी सदैव खुश रहता । आधुनिकता और विकास की बयार […]

कविता

प्रेम….

प्रेम अहसासों की बंधी एक डोर है रहो चाहे कहीं भी तुम मन खिंचा चला जाता वहीं जिसपर दिल फिदा है एक खास जज्बातों की छांव है प्रेम शीतल ठंडी हवाओं की छुअन स्पर्श करता अंतर्मन भावनाओं का सागर है प्रेम भींग जाता जिसमें रोम-रोम उत्तेजना की लहर में बहकर एक हो जाते दो अजनबी […]