लघुकथा

बलि

 

मां का लाडला इंजीनियरिंग कर अच्छी जगह लग गया बड़े शहर में ।
उसके लिए बड़े बड़े शहर की लड़कियों के रिश्ते आने लगे ।गरीब खेतिहर मां बाप जिन्होंने बेटे को कैसे इस लायक बनाया वो देख फुले नही समा रहे ।
बेटा उनका अनोखा जो शादी को हाँ नही कर रहा ।
” देख ,तू हां क्यो नही कर रहा है शादी को । कितने अच्छे अच्छे रिश्ते आ रहे है “।
कुछ तो तेरे बराबर है और तेरे पहले से काम करती हुई है । तुम दोनों रहो शहर में कमाओ खाओ “।
” हम्म्म्म………”।
” क्या , हम्म ??
” मुझे ज्यादा कमाती नही चाहता “।
” तुझे तो तेरे बराबर की ही चाहिए ।
चल ये देख बहुत सीधी है पढ़ी भी है इससे कर ले ।
गाय है ये सीधी भोली “।
” मां…………
” नही चाहिए मुझे गाय जो बहुत सीधी हो। बुआ का हाल भूल गई । वो भी तो गाय थी ।उसको या तो शहर रास नही आया या शहर को वो रास नही आई और बलि चढ़ गई शहर के .…………..”।
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सारिका औदिच्य

*डॉ. सारिका रावल औदिच्य

पिता का नाम ---- विनोद कुमार रावल जन्म स्थान --- उदयपुर राजस्थान शिक्षा----- 1 M. A. समाजशास्त्र 2 मास्टर डिप्लोमा कोर्स आर्किटेक्चर और इंटेरीर डिजाइन। 3 डिप्लोमा वास्तु शास्त्र 4 वाचस्पति वास्तु शास्त्र में चल रही है। 5 लेखन मेरा शोकियाँ है कभी लिखती हूँ कभी नहीं । बहुत सी पत्रिका, पेपर , किताब में कहानी कविता को जगह मिल गई है ।