बिन्नी

आज एक समाचार की सुर्खी देखी ”क्या बिन्नी बंसल ने सच में मांगी थी माफी?” मुझे नहीं पता बिन्नी कौन है और क्यों माफी मांगने की नौबत आ गई, क्योंकि न तो मैं ऐसे विवादास्पद समाचार पढ़ती हूं, न ऐसे ब्लॉग्स लिखती हूं. मुझे तो बस बिन्नी नाम से बिन्नी के 32 पैकेट्स की याद हो आई, जो अचानक ही हमारे पास आ गए थे.
उन दिनों कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल आदि का चलन नहीं हुआ था. समाचार पढ़ना हो, तो समाचार पत्र ही एकमात्र जरिया था.
रविवार की छुट्टी का दिन था. कॉलेज में पढ़ने वाली हमारी बिटिया सुबह-सुबह अपनी पढ़ाई करती थी, पर उस दिन उसने समाचार पत्र पढ़ा और एकदम शोर मचा दिया- ”पापा जल्दी से एक फोन नं. मिलाइए और अपना नाम-पता बताकर बोलिए बिन्नी और जो नं. बोलें उसे ध्यान से सुनिएगा. आपको गिफ्ट मिलेगी.” अखबार के साथ वह पेंसिल भी साथ में ले आई थी.
पापा ने किया, ममी ने किया, बिटिया ने किया, बेटे ने किया, तब तक सैर करते हुए चाचा जी भी आ गए थे, चाचा जी ने भी किया. तब तक हमें यह भी नहीं पता था, कि बिन्नी क्या है और गिफ्ट में क्या मिलेगा.
अब सवाल यह उठा कि गिफ्ट लेने कौन जाएगा? बेटा रोज साकेत से सरोजिनी नगर स्कूल जाता था, उसने कहा- ”मैं जाऊंगा.”
उसने अपना बस स्टूडेंट पास और पर्स उठाया और चल पड़ा. एक घंटे में ही वापिस भी आ गया, पर ऑटो स्कूटर से. ऑटो स्कूटर की आवाज सुनकर हम बालकनी में आए, तो देखा बेटा पांच बड़े-बड़े गत्ते के पैक ऑटो स्कूटर से उतार रहा था.
हम भी उसकी मदद को नीचे गए. ऊपर आकर एक पैक खोला, तो बिन्नी चिप्स के 8 पैकेट निकले. असल में उस दिन मार्केट में बिन्नी चिप्स लॉन्च किए जा रहे थे और विज्ञापन के लिए पहले 100 फोन करने वाले लोगों को वे पैक दिए जाने थे. हमारा नाम उन 100 लोगों में आ गया था. 4 अलग-अलग स्वादों के 2-2 पैकेट उस पैक में थे.
फिर तो हम सब कई दिनों तक घर-स्कूल-कॉलेज-ऑफिस में बिन्नी चिप्स का आनंद लेते रहे.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।