सदाबहार काव्यालय: एक पुनरावृत्ति

सदाबहार का नाम लेते ही आपके समक्ष ऐसे सदाबहार फूलों का दृश्य प्रस्तुत हो गया होगा, जो कभी मुरझाते नहीं. सदाबहार काव्यालय का नाम लेते ही आपके समक्ष ऐसी सदाबहार कविताओं का दृश्य प्रस्तुत हो गया होगा, जो कभी बीते दिनों की नहीं होतीं. ये कविताएं कालजयी होती हैं. हम इसका एक उदाहरण भी देंगे, लेकिन पहले बात सदाबहार काव्यालय: एक पुनरावृत्ति की’

कुछ समय पहले हमने आपको सदाबहार काव्यालय की अविस्मरणीय सैर करवाई थी, एक बार फिर हम आपको सदाबहार काव्यालय की सैर पर ले चल रहे हैं. यह सैर अविस्मरणीय होगी या विस्मरणीय, यह तो आप लोग ही निर्धारित कर सकेंगे. हम तो बस आपको एक बात फिर से याद दिलाना उचित समझते हैं, कि आप खुद भी इस सदाबहार काव्यालय का एक अनमोल हिस्सा बन सकते हैं. आइए सबसे पहले हम पहले सदाबहार काव्यालय-1 की कुछ झलक दिखाकर आपको सदाबहार काव्यालय-2 की ओर ले चलते हैं.

सदाबहार काव्यालय प्रकाशित करने का विचार हमें कैसे आया, इसकी कहानी भी बड़ी रोचक है. सदाबहार काव्यालय-1 प्रकाशित करने के प्रमुखतः दो कारण थे.
पहला कारण है, अनुकना साहा द्वारा संगृहीत एक काव्यमय संग्रह- काव्यालय. काव्यालय अनुकना साहा द्वारा संगहीत एक काव्यमय संग्रह है, जिसमें भक्तिकाल के कवियों से लेकर अनेक नए-पुराने कवियों की लोकप्रिय कविताएं संकलित हैं, जिनमें से अनेक कविताएं हम-आप पाठ्यपुस्तकों में पढ़ चुके हैं. काव्यालय में हमें हमारे नाम सहित अपनी एक कविता दिखाई दी, जिसका शीर्षक है-
”गीत खुशी के गाता रहे”, जिसे हमने अपने पोते के जन्मदिन पर लिखा था.

 

काव्यालय (संग्रह: अनुकना साहा)
http://onlinekavyalay.blogspot.in/2011/

 

फिर हमारे सामने एक और साइट आई, जिसमें हमें अपनी एक और कविता के दर्शन हुए. यह साइट थी-
http://saptrangiprem.blogspot.in/2013/09/blog-post_15.html

 

इसमें बहुत सुंदर तरीके से हमारी कविता ”प्रेम जीवन की परिभाषा है…” को हमारे नाम सहित स्थान दिया गया था.

 

एक और साइट के दर्शन हुए, जिसमें हमें अपने एक ब्लॉग ”विशेष सदाबहार कैलेंडर-८” के दर्शन हुए. यह साइट है-
https://groups.google.com/forum/#!topic/afmc-a-batch/OUwrZd8_414

 

इन सबको मिलाकर हमें सदाबहार काव्यालय नाम सूझा, जिसे आपने भी पसंद किया.

 

दूसरा कारण था- हमारी एक कविता ”आंसू” का चोरी होना. अपना ब्लॉग के ही एक महाशय ने केवल कविता का नाम बदलकर, अंत में अपने नाम की एक पंक्ति जोड़कर अपना ब्लॉग में ही प्रकाशित करवा दी, जिसे हमारे पाठकों ने तुरंत पहचान लिया, जो इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं भी दे चुके थे. इसलिए भी सदाबहार काव्यालय में सबकी कुछ कविताओं के संकलन की बात सोची गई.
सदाबहार काव्यालय में 51 कविताएं हैं. सदाबहार काव्यालय के लिए कविताएं भेजने का आह्वान करते ही हमारे पास कविताएं आनी शुरु हो गई थीं. ये कविताएं न केवल ब्लॉगर्स-कामेंटेटर्स के द्वारा भेजी गईं, बल्कि उन पाठकों द्वारा भी भेजी गईं, जो सम्भवतः हमारे ब्लॉग्स तो पढ़ते होंगे, लेकिन कभी प्रतिक्रिया नहीं लिख भेजी. आप जानते ही हैं, कि सभी सदाबहार कविताओं का स्वागत किया गया. आशा है इस बार भी आप अपनी सदाबहार कविताएं भेजेंगे.

 

इस काव्य संकलन में सर्वश्री राजीव गुप्ता, गुरमेल भमरा, राजकुमार कांदु, अंकित शर्मा’अज़ीज़’, लखमीचंद तिवानी, मनजीत कौर, जितेंद्र अग्रवाल, आशीष श्रीवास्तव, डॉ. प्रदीप उपाध्याय, प्रवीण गुप्ता, प्रदीप कुमार तिवारी, युवा कवि राज सिंह, जीवन प्रकाश चमोली, कैलाश भटनागर एवं लीला तिवानी की कविताएं संग्रहीत हैं. इन सभी साथियों को यह लिंक मेल के द्वारा भी भेजा गया. हम इन सभी सुधिजन काव्यकारों के हृदय से आभारी हैं.
इस संकलन के बारे में दो विशेष बातें-

1.राजेंद्र कुमार तिवानी ने इस संकलन का कवर पेज हरियाली और खुशहाली से सुसज्जित सदाबहार बनाया है.

2.राजेंद्र कुमार तिवानी ने इसका नामकरण ”सदाबहार काव्यालय- 1” किया है. ”सदाबहार काव्यालय- 1” में भविष्य के लिए संभावनाएं छिपी हुई हैं. इसका सांकेतिक अर्थ यह है, कि अगर आप लोगों को हमारा यह प्रयत्न पसंद आया और आप लोगों की अन्य कविताएं आ गई, तो ”सदाबहार काव्यालय- 2” भी बन सकता है.

 

 

इस बार भी सदाबहार काव्यालय-2 के आयोजन के सो प्रमुख कारण हैं-
1.अपना ब्लॉग में बहुत-से साहित्यिक ब्लॉगर्स का पदार्पण हुआ है.
2.ब्लॉगर राजकुमार कांदु की कविताओं की चोरी हो गई है, जिसके बारे में वे आपको कामेंट्स में बताएंगे. यह संकलन ऐसी चोरी से बचने का एक सांझा प्रयास है.
कविताएं भेजने के लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा-
1.कविताएं सदाबहार यानी कालजयी हों.
2.इनमें तथ्यपरक, व्याकरणिक व वर्तनी संबंधी त्रुटियां न हों (इसमें हम भी आपकी सहायता करने के लिए उपलब्ध होंगे.)
3.चित्र तथा सजावट की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि कविता सदाबहार है, तो सजावट की कतई आवश्यकता नहीं है.
4.अपनी ई.मेल, वेबसाइट, आदि जो पब्लिश करवाना चाहें, लिख भेजें.
5.कृपया सदाबहार काव्यालय-1 में भेजी हुई कविताएं दुबारा न भेजें.
6.आपकी कविताएं पहले भी पब्लिश या चर्चित हो चुकी हैं, तो कोई हर्ज नहीं.
7.कृपया केवल अपनी मौलिक कविताएं ही भेजें.
8.इस सदाबहार काव्यालय में भी 51 कविताएं होंगी.
9.आप अपनी एक से अधिक प्रकाशित-अप्रकाशित कविताएं भी भेज सकते हैं.
10.कृपया अपनी सदाबहार कविताएं मेल से साधारण मेल की तरह भेजें, पी.डी.एफ. से नहीं.
11. ये ब्लॉग्स फिर सदाबहार काव्यालय-1-51 तक प्रकाशित होंगे, ताकि साइट मिलने में दिक्कत न हो. संकलन का शीर्षक सदाबहार काव्यालय-2 होगा.

12.यों तो आप सभी विद्वान हैं, पर कुछ पाठक ऐसे भी होंगे, जिनकी कविता लिखने में रुचि हो, पर लिख नहीं पाते हैं. ऐसे पाठकों के सीखने के लिए स्वर्ण अवसर है. वे अपनी किसी भी विषय पर अपनी छोटी-बड़ी कविता लिख भेजें, हम उसे पॉलिश करने में उनके सहायक बनेंगे.
हमने आपसे अपनी एक कालजयी कविता के बारे में बात करने की बात कही थी. हमारी एक कविता है- शिखर की ललक, जो मैंने 22.2.1996 को लिखी थी. यह कविता 17 मार्च, 1913 के एक ब्लॉग ”सलामी बल्लेबाज़ को काव्यमय सलाम” पर भी बिलकुल सटीक रही.

 

इस ब्लॉग के बारे में Rashmi Kothari ने लिखा था-
आदरणीय लीलाजी, भले ही यह तब लिखी गयी थी जब शिखर धवन बहुत छोटे रहे होंगे लेकिन आज भी सामयिक है और सब के लिये बहुत प्रेरणादायक है.

चीन की मोनिका शर्मा ने लिखा था-
प्रणाम लीला जी, मैं आपकी बहुत बड़ी फैन हूं और आपका ब्लॉग रोज पढ़ती हूं. आपके सकारात्मक विचारों से बहुत प्रभावित हूं. मैं आपसे व्यक्तिगत रूप से बात करना चाहती हूं. कृपया मुझे अपनी ई.मेल दे दें.

 

बाकी ढेर सारे कामेंट्स अब उपलब्ध नहीं हैं.
शीघ्र ही आप एक-एक रचना का आनंद उठाते जाएंगे. बाद में इसे एक साइट और ई,बुक का रूप भी दिया जाएगा. आप ब्लॉगर हैं या केवल पाठक अपनी काव्य-रचनाएं भेज सकते हैं, बस ध्यान रखिएगा कि आपकी रचना सटीक, सार्थक और सकारात्मक हो. तो शीघ्र ही अपनी काव्य-रचनाएं मेल द्वारा इस पते पर भेज दीजिए-

tewani30@yahoo.co.in

 

हम आपकी कविताओं की प्रतीक्षा में हैं. एक बात का विशेष ध्यान रखिएगा, प्रतिक्रियाएं कवि-लेखक का उत्साह बढ़ाती हैं, अन्य कवियों की कविता पर अपनी प्रतिक्रिया लिखिएगा और जिस दिन आपकी कविता प्रकाशित हो, सभी कामेंटेटर्स को जवाब भी दीजिएगा.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।