राधा बावली है

किशन को देख राधा बाबली है
पड़ी उसकी नजर जो सांवली है

चली आती सुनी जो बाँसुरी धुन
बनी श्यामा उसी की लाड़ली है

चढ़े कदम्ब चुरा कर के वसन जब
सहे सब गोपियाँ ये धाँधली है

गिरफ्तारी हुई है प्रेम में जब
सभी की खोपड़ी अब ओखली है

पकी है प्यार में कान्हा सखी सब
चखे जो बेर शबरी पोपली है

परिचय - डॉ मधु त्रिवेदी

जन्म तिथि --25/05/1974 पद ---प्राचार्या शान्ति निकेतन काॅलेज आॅफ बिज़नेस मैनेजमेंट एण्ड कम्प्यूटर साइन्स आगरा email -madhuparashar2551974@gmail.com रूचि --लेखन कवितायें ,गजल , हाइकू 20 से अधिक प्रकाशित Reference Books --"टैगोर का विश्व बोध दर्शन नागार्जुन के काव्य साहित्य में प्रगतितत्व अन्य Text Books