हम नन्हें तरूवर

हम नन्हें तरू है , हमसे है हरियाली
मत काटो हमको , हमसे है हरियाली

पादप काटोगे बढ़ जायेगी गर्मी
हमको न जलाओ हमसे है हरियाली

पी गये धरा का सब जल काट हमें तुम
हमको न सताओ हमसे है हरियाली

पाई पाई हिसाब अब देना होगा
नित हमें लगाओ हमसे है हरियाली

ताप को जमीं से अब तो दूर भगाओ
हरा भरे हम हो हमसे है हरियाली

परिचय - डॉ मधु त्रिवेदी

जन्म तिथि --25/05/1974 पद ---प्राचार्या शान्ति निकेतन काॅलेज आॅफ बिज़नेस मैनेजमेंट एण्ड कम्प्यूटर साइन्स आगरा email -madhuparashar2551974@gmail.com रूचि --लेखन कवितायें ,गजल , हाइकू 20 से अधिक प्रकाशित Reference Books --"टैगोर का विश्व बोध दर्शन नागार्जुन के काव्य साहित्य में प्रगतितत्व अन्य Text Books