लेख सामाजिक

    “ लक्ष्य और दायित्व ”

“ लक्ष्य और दायित्व ”

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, इसी समाज में रहते  हुए उन्हें अपने उत्तरदायित्व  को निभाना पडता है जिसमें दो बातें प्रथम रूप से आती है…. पहला अपने जीवन का लक्ष्य और  दूसरा उस लक्ष्य की ओर अग्रसर होते हुए अपने समाज- परिवार के रिश्तों को समझना,  परन्तु लक्ष्य पाने का तनाव , ईष्या, और अहम हम सब पर इतना हावी होता जा रहा है कि  हम  रिश्तों की महत्ता को भूल कर अपने आप में  सिमटते जा रहें हैं| हम इच्छाएँ तो  बहुत  करते हैं , लक्ष्य हमारे बुने हुए होते है फिर भी  हम लक्ष्यों पर खरे नहीं उतर पाते | आखिर ऐसा क्यों होता है  ?

आपने कभी यह  जानने की कोशिश की है कि आप जो अपने समाज – परिवार के लिए सोचते है या अपने लक्ष्य को पाने के लिए  जो करना चाहते है उनसे आप कैसे दूर होते जाते है ? सही से आलंकन करे तो पाऐंगें कि अपने लक्ष्य और अपने रिश्तों से भटकने का कारण आप स्वयं  है लेकिन थोडी सी कोशिश करने पर आप अपने जीवन के लक्ष्य को पा सकते है और समाज – परिवार मे रहते  हुए एक बेहतर जीवन भी  जी सकते है|

हमारी सोच और हमारे विचार  ही हमारे जीवन पर गहरा असर डालते हैं| हमारी सही-गलत सोच ही हमारे उत्साह को मंद करती है या बढा देती है |  हमारे आत्मविश्वास को गहरी चोँट पहुँचाती है  या उसे बढा देती है.. और यही कारण है कि हमारा कोई भी काम योजना के अनुसार नहीं हो पाता……  इसलिए बेहतरी इसी में हैं कि स्वस्थ  सोंच को अपनाएँ |  अपने ऊपर भरोशा रखें,अपनी योग्यता पर  यकीन करें, अपनी शक्तियों पर पूरा विश्वास रखें बिना आप सफलता और प्रसन्नता  नहीं  प्राप्त कर  सकते है |

और यही  कुछ बात रिश्तों में भी लागु होती हैं… कि आप कुछ भी बोलने से पहले दो बार जरुर सोचें , और ये भी जरुर देखें कि सामने वाले  के साथ  आपका रिश्ता क्या है.. क्योंकि कई बार हम बिना सोचें समझें ही अपनी धुन मे कुछ भी बोल देते है और  इस बात का ध्यान  हीं नहीं रखते कि सामने वाले पर  कही बातों का  क्या  असर होगा  और उस इंसान से हमारा  सम्बंध खराब हो जाता है इसीलिए बोलने से पहले सोचे  और अपनी सोच हमेशा स्वस्थ रखें|

अकसर देखने में आता है कि हम स्वयं को हताश तब पाते है जब हमारा कोई काम हमारी इच्छनुसार नहीं  हो पाता और हम दूसरों की आलोचना करना शुरु कर देते है जिससे हमारे दिल को शकुन मिलता है और यही दूसरे व्यक्ति के खीझ का कारण बनता है| अपनी इस निंदा को शांत करने के लिए आपको अपने विचार पना गुस्सा एक कागज़ पर लिख देना चाहिए भले ही उसमे अपशब्द ही क्यों न हो | निंदा के विष को दुसरों पर उगलने से बचने और अपनी मानसिक उद्वेग को शांत करने के  उस कागज़ को स्वयं  ही कई बार पढे, फिर भी आपको लगे कि आपका पक्ष सही है तो अपने  विचारों को लिखित या मौखिल  रुप से उस तक पहुँचाये जिसमें भाषा  शिष्ट हो |

यही बात तो रिश्तों में भी लागु होती है रिश्तेदारों की कही कोई बात अगर आपको बुरी लगती है चाहे वो रिश्ता ससुराल कि तरफ से हो या शादी के बाद मायके वालों की तरफ से ही क्यों न हो, भूलकर भी इधर उधर या बढा चढा कर न बाताएँ या  यूँ कहे कि गाँसिप न करे इससे रिश्तों में कडवाहट तो आएगी  आपके  प्रति  लोगो का और रिश्तेदारों का विश्वास भी जाएगा जो आपके लिए हितकर नहीं  होगा… क्योंकि बुरा वक्त  हो या अच्छा काम तो यही रिश्तेदार ही आऐंगे इसीलिए किसी के साथ भी  अपने सम्बंधों को न बिगाडे… हाँ जिसने आपका दिल दुखाया है उस व्यक्ति से मिलकर आप खुलकर बात करें  और जो गलतफहमी जो उसके दिल  में आपके प्रति है उसे दूर करें|

क्रोध और अहंकार एक ऐसा ज़हर है जो दिखाई तो नहीं देता  पर जीवन में सफलता के रास्ते में कठिनाई बनने वाले तत्वों मे से एक है इसलिए अहंकार , अभिमान और क्रोध के संदर्भ में  हमारे बुजुर्गो का  ये मानना है कि जब इंसान स्वयं को वश मे कर लेता है तो वह संसार को जीत लेता है |

विचारक रस्किन ने कहा था ‘’ अहंकार समस्त गलतियों के तह में होता है ‘’ जीवन के किसी भी क्षेत्र में आगे बढने  के लिए हमें अपने अंदर के अहंकार को क्रोध को , अभिमान को त्यागना होगा क्योंकि इससे इंसान संतुलन  खो बैठता है | इसे त्याग कर के ही एक व्यक्ति अपनी शक्तियों को बढा सकता है  और बडी से बडी चुनौतियों का सामना कर सकताहै | इसीलिए जब भी क्रोध आये तो या तो विषय बदल दे या उसा स्थान से हट जाए  और अपने आप को शांत व नियंत्रित रखें|  विचारक जाँज  का मानना है कि “जब भी इस तरह की परिस्थिति आए तब शांति और धैर्य से काम लेना चाहिए |आवेश और तीव्रता से सामान्य बात भी बहुत बडा अवगुण बन जाती है | आवेश सत्य को भी अनैतिक बना देता है”  |

इसी तरह किसी भी रिश्ते के बीच अहम  को न आने दे क्योंकि “अहम” किसी भी रिश्ते का सबसे बडा दुश्मन है .. “ अहम “ से प्यारा से प्यारा बंधन टूटकर बिखर जाता है इसीलिए किसी भी रिश्ते के बीच  में प्यार और सम्मान बना रहे इसके लिए जरुरी है कि किसी भी रिश्ते के बीच अहम को न आने दे और तानाशाही रवैया भी न अपनायें .. अकसर देखने में आता है कि घर के बडे अपने से छोटों पर  अपने निर्णय थोपने लगते है इससे रिश्तों में खटास आने लगती है | बडे  सोचते है कि  वो बडे है इसलिए वो जो कहें और वो जो करें  , परिचितों को उनके अनुसार ही  करना  चाहिए और बोलना चाहिए, परंतु आपके इस व्यवहार से आपके  और आपके चाहने वालों के बीच दूरियाँ  बनने लगती है | अहंकारी और तानाशाही मनुष्य केवल अपने  ही महान कार्यों का वर्णन करता है , ऐसा ना करें… मिलनसार बनें …. अगर आप सब से प्रेम से मिलते है तो समझिये  कि दुनिया आपके कदमों में है क्योंकि मिलनसारिता ही एक ऐसा गुण है जिसमें अनेक गुण समाहित है …     इसीलिए कहा जाता है कि क्रोध और अहंकाररुपी विष से दूर रहें.. जिस क्षण आप इनका त्याग करते है , इसके विसर्जन से सृजनशील गुण पैदा होने लगते है और आध्यात्मिकताका अंकुरण होने लगता है | आपके लक्ष्य और आपके मधुर रिश्तों के  लिए  अभिमान , अहंकार, क्रोध, तानाशाही का पूर्ण त्याग करने में ही आपकी और आपके परिवार की भलाई है|

अपने लक्ष्य को पाने के लिए कई बार ऐसी परिस्थियों से भी गुजरना पडता है जहाँ  इंसान निराश व हताश हो जाता है  और ऐसा उन्ही के साथ होता है जिन्हें अपनी  सामर्थय  पर संदेह होता है और वो लक्ष्य खो देने कि कगार पर होते है  इसलिए जो  भी कुछ बनने ,करने की, अभिलाषा है  या जो काम आप करना चाह्ते है  उसी उद्देश्य को सोते जागते उठते – बैठते , खाते- पीते हरदम अपने सामने रखे और उसी पर ध्यान क्रेंद्रित  करें … यह भी सोचे कि जो बीत  गया अच्छा हुआ, आगे  और नया क्या करना है.. बीते को भूला कर  अपने आप  को ऊर्जावान बनाये और समझदारी से काम लें , विश्वास वो शक्ति है जो इंसान की आंतरिक सम्भावनाओं  का परिक्षण कर सकती है , व्यक्ति का विश्वास ही उसे कार्य करने को प्ररित करता है योग्यता एवं सामर्थ्य हमारे अंदर ही विद्धमान है  इसलिए उन्हे जगाने की आवश्यकता है | विवेकशीलता और समझदारी उसी में है जो प्रतिकूल  परिस्थितियों में  भी हार न मानें|  जल्दबाजी और घबराहट से काम बिल्कुल न करें , अपने दिलों दिमाग  पर  तनाव न लें  …. यदि आप अपना काम सुचारू रूपसे नहीं कर  पाते  है तो आप में ही कमी है और यह कमी इसलिए है कि कोई आपको  प्रोत्साहन देने वाला नहीं , खुद आप ही है  और जिसका व्यक्तित्व पैना है उसका केवल एक ही उद्देश्य होता है और वह बाधाओं को चीरते हुए लक्ष्य की ओर बढता है   इसलिए अपने लक्ष्य पर स्थिर रहें | जब लक्ष्य बना ले तों राह तलाश करें कि  आपको  कैसा रास्ता अपनाना है  फिर उसके अनुसार  साधन देखें | अपने साधनों  के  आधार पर  आगे बढें , जो भी साधन है उन पर संतोष  करें और अपनी इन्ही उपलब्धियों को  अपने मार्ग की  सीढीयाँ बनाये  और सबसे अहम बात  समय  के महत्व को पहचाने,,,,,, समय का हमेशा  सकारात्मक प्रयोग  करें ,,,  क्योंकि समय  हमेशा एक सा नहीं रहता वह अपनी  रफ्तार से चलता है  इसलिए जरुरत है  समय के अनुरूप चलने की  ,, अगर समय निकल गया तो पछताने के अलावा कुछ नहीं रह जाता  इसलिए  समय के महत्व को समझें ..

और रिश्तों के  लिए ….. रिश्तों के लिए भी तो  समय निकालना बहुत  जरूरी है  ,,,  समय निकालकर बातचीत करना जरूरी है ,,, नहीं तो रिश्तों में भी दूरियाँ आने लगती है  क्योंकि   यह समय ही तो है जिसकी कमी  के कारण लोग लम्बे  लम्बे समय  तक एक दूसरे से मिल नहीं पाते है   और  तो और  बातचीत भी नही  कर पाते है  और जब शिकायत करो तो एक ही बहाना ,,,, यार… समय ही कहाँ मिल पाता है  ,, पहले आँफिस फिर घर,, फिर बीबी बच्चे  ,, गृहस्ती,,,,,, बिल्कुल भी समय नही मिल  पाता ,,, चाहे  औरत हो या मर्द   सभी का यहीं एक ही रोना समय की कमी ,,,,  पर किसी भी रिश्ते को निभाने के लिए जरूरी है  लोगों का एक दूसरे से  बातचीत करना… अपनों के लिए समय निकालकर  उनसे मिलने जाना  और अगर  ज्यादा दूरियों की वजह से मिलने जाने में प्राँब्लम हो तो  समय  निकाल कर समय समय पर उन्हे फोन करे और उनका हालचाल ले  क्योंकि  हो सकता है  आज  आपके  पास आपके  रिश्ते दरों के लिए समय की कमी है  तो कल उनके  पास आपके लिए समय की कमी हो  ,,,,  एक बार फिर यहीं कहेंगें कि समय हमेशा एक सा नहीं रहता |

लेकिन एक बात का विशेष ख्याल भी  रखें ….  कि जिन रिश्तों के आस-पास आप रहतें हो   यानि दिन रात जिन रिश्तों के साथ आपका उठना बैठना  हो उन रिश्तों में ताजगी, प्यार और सम्मान बना रहें तो इसके लिए जरूरी है कि आप एक दूसरे को स्पेस दें | अनावश्यक रूप से दखलअंदाजी  करने से और जरूरत से ज्यादा टोका-टाकी से भी रिश्तों में दरार तो आयेंगी ही अच्छे खासे  रिश्ते को खराब भी कर देगी , इसीलिए  किसी भी रिश्ते को फलने फूलने  के लिए ब्रिदिंग स्पेस देना बहुत जरूरी है ….

यही बात तो आपके कैरियर  मे भी  लागू होती है …   अपने साथ काम करने वाले लोगों के साथ  मिलनसारिता का गुण अपनायें  | मिलनसार व्यक्ति मृदुभाषी , व्यवहार कुशल, और नम्र होते है इसलिए सभी के प्रिय होते है   और हर कोई उसके पास चुम्बक की तरह खींचें चले आते है |  मिलनसारिता का गुण सबको अपनी ओर आकर्षित करता है….. यही एक ऐसा गुण है जिसमें सभी गुण समाहित है…. सिर्फ अपने कैरियर के किए नहीं ब्लकि  अपने जीवन के किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए ये गुण को अपनाये  आप देखेंगें  मंजिल  आपके कितने करीब है |

रिश्तों को बरकरार रखने के लिए जितना जरुरी आपका  मिलनसार होना जरुरी है उतना ही जरूरी उस रिश्ते के प्रति ईमानदार होना भी है  …  चाहे वो आपका कार्य क्षेत्र हो या   आपके समाज के  रिश्ते हर रिश्ते के प्रति ईमानदारी बनायें  रखें …  यदि आपने किसी के साथ कोई रिश्ता जोडा है  चाहे वो बहन का  हो या भाई का वो चाहे एक अच्छे दोस्त का ही क्यों न हो .. उस रिश्तें का मान रखें ..  केवल कहने भर के लिए कोई रिश्ता ना जोडें | नतीजा यह होगा कि समाज  में आपकी  इज्जत और कार्यक्षेत्र  में आपकी तरक्की   निश्चित है और तो और आप अपने आपको कभी भी अकेला नहीं महसूस करेंगे .  .. क्योंकि आप अपने रिश्तों के प्रति ईमानदार रहेंगें  तो आपको भी तो रिश्तों में वापसी में ईमानदारी ही मिलेगी|

नसरीन अली निधि”

श्रीनगर , जम्मू और कश्मीर

9906591662,7006692361

wadieshindi@gmail.com

 

परिचय - नसरीन अली 'निधि' निधि

1. पिता : बृजपाल दास पारिख 2. जन्म: 10 नवम्बर 1969 3. जन्म स्थान: कलकत्ता 4. शिक्षा: स्नातक ( कला ) कलकत्ता विश्वविद्धालय 5. भाषा ज्ञान: हिंदी, अंग्रजी, उर्दू, पंजाबी, बंगाली, गुजराती एवं कश्मीरी 6. नागरीकता: भारतीय परिचय: कलकत्ता विश्वविद्धालय से शिक्षित, संस्कृति से गुजराती , जड़ से गुजरात एवं बनारस से जुड़ी , पिछले 22 सालों से अपनी कर्मभूमि कश्मीर श्रीनगर में समाज सेविका का जीवन बिता रही सुश्री नसरीन अली “निधि” ( कवियत्री एवं लेखिका ) का जीवन हिंदी भाषा एवं हस्त कला को समर्पित हैं| अनुभव;-  22 सालों से रेडियो कश्मीर श्रीनगर में हिंदी एवं उर्दू भाषाओं में कार्यकम करने का अनुभव...  पिछले 10 सालों से रेडियो कश्मीर श्रीनगर के हिंदी विभाग में कम्प्युटर आँपरेटर के पद पर आसीन..  पिछले 5 सालों से इसी कार्यालय के पंजाबी विभाग के कार्यक्रमों की साउंड इनजीनियर के रुप में कार्यरत...  दो सालों का कश्मीर घाटी के एक निजी टेलिविजन “ वादी टेलिविजन “ में हस्त कला एवं पाक कला में कार्यक्रम देने का अनुभव हस्त कला के क्षेत्र में एक सफल प्रशिक्षिका के रुप में कार्य करने का अनुभव  मातृ मेहरबान वोमेंस एंड चाइल्ड डेवलपमेंट वेलफेयर इनस्टीयूट , मिसकीन बाग, श्रीनगर  आनगंवाडी ट्रेनिग सेंटर , मिसकीन बाग...श्रीनगर  गवर्मेंट पाँलिटैक्निक फाँर वोमेंस , बीमना श्रीनगर  SKAUST-K Division of Floriculture , Medicine and Aromatic plants Srinagar …  Jammu & Kashmir Entrepreneurship Development Institute ( J&K EDI) विशेष :  “वादीज़ हिंदी शिक्षा समिति” श्रीनगर ( रजि.) की अध्यक्ष महोदया एक स्वैछिक संस्था (N G O ) जो हिंदी के विकास, प्रचार- प्रसार , उन्नति के लिए कार्यरत......  नसरीना क्लासिक्स प्राइवेट लि. (रजि.) (को ओपरेटिव सोसायटि) की अध्यक्ष महोदया एक ऐसा यूनिट जहाँ हस्त एवं पाक कला की शिक्षा के साथ साथ हस्त शिल्प कलाओं का उत्पादन कर, बेरोजगार एवं अनपढ़ महिलाओं को रोजगार देने का अभियान चालाया जाता हैं.......  मातृ भाषा उन्नयन परिषद इंदौर ( रजि.) संस्था की श्रीनगर क्षेत्र की प्रदेश अध्यक्ष महोदया सम्मान : रेडीयो कश्मीर श्रीनगर द्वारा एक सफल कवियत्री ,श्रीनगर दूरदर्शन केंद्र द्वारा एक सफल हिंदी उद्घोषक के रुप मे , कई स्वैछिक संस्थानों द्वारा सम्मानित पर विशेष सम्मान हिंदी के प्रचार –प्रसार एवं उन्नति के कार्य के लिए जम्मू और काश्मीर के महाराजा डाँ करण सिहं द्वारा दिया गया “साहित्य भूषण सम्मान “ भ्रमण भाष: + 91- 9906591662, 7006692361, 9419624129, अणुडाक: wadieshindishikshasamiti@gmail.com अणुडाक : http//www.wadieshindi.com/wp-admin/ पता:- नसरीन अली ,चिंक्राल मोहल्ला, हब्बा कदल , श्रीनगर जम्मू और काश्मीर,

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