हनुमान जी पर निरर्थक विवाद

त्रेतायुग में भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त और कलयुग में सबसे अधिक जाग्रत व जनकल्याणकारी देवता बजरंगबली हनुमान जी भी चर्चाओं के घेरे में आ गये हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चुनावी राज्यों में भाजपा की विजय सुनिश्चित करने के लिए धुआंधार चुनाव प्रचार कर रहे हैं। योगी जी इस समय विशेष आकर्षण का केंद्र बिंदु पूरे भारत में बने हुए हैं, जिसमें चुनाव प्रचार में उनके द्वारा दिये जा रहे बयान राष्ट्रीय स्तर की सुर्खियां तो बटोर ही रहे हैं, उन पर राजनैतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया व टीवी चैनलों पर गर्मागर्म चर्चा भी हो रही है।
वर्तमान समय में ऐसा प्रतीत भी हो रहा है कि हनुमान जी ही सबकी नैया पार लगने वाले हैं। योगी जी हनुमान जी के नाम के सहारे अपने सभी विरोधियों को चित करने और उनको पूरी तरह से बेनकाब करने का काम भी कर रहे हैं। मध्यप्रदेश की एक चुनावी आमसभा में योगी जी ने कहा कि हम सबको बजरंग बली चाहिये वहीं कांग्रेस को अली। इस पर विवाद तो होना ही था योगी जी पर मतों का धु्रवीकरण करने का आरोप लगने लगा, लेकिन उसका सबसे बड़ा असर यह हुआ कि जब मध्यप्रदेश में मतदान था तो उस दिन कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार कमलनाथ ने सबसे पहले हनुमान जी के दर्शन किये और उनसे चुनावों में सफलता का आशीर्वाद मांगा।
इसके बाद राजस्थान के अलवर जिले में एक रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बजरंगबली दलित थे। उन्होंने बजरंग बली को दलित, वनवासी, गिरिवासी और वंचित करार दिया था। योगी जी का कहना था कि बजरंगबली एक ऐसे लोकदेवता हैं जो स्वयं वनवासी, गिरिवासी हैं, दलित है और वंचित हैं। योगी जी के इस बयान पर तूफानी राजनैतिक बयानबाजी और उनकी आलोचनाओं तथा ब्राह्मण महासभा आदि की ओर से नाोटिस आदि का दौर जारी हो गया है। प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक भी उनको ऐसी बयानबाजी से बचने की सलाह दे रहे हैं। लेकिन इसके विपरीत राजस्थान कांग्रेस को योगी जी के बयानों और रैलियों से जबर्दस्त मिर्ची लग गयी है। कांग्रेस पार्टी ने चुनाव आोग से मांगकर डाली है कि योगी जी की रैलियों पर रोक लगायी जाये।
अभी यह विवाद यहीं पर थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा हनुमान जी को दलित बताने के बाद अब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष नंद कुमार साय ने कहा कि हनुमान जी भी जनजाति समुदाय के थे। हालांकि वह यह नहीं जानते कि मुख्यमंत्री ने किस संदर्भ में उन्हें दलित कहा, पर आदिवासियों में वानर गोत्र होता है। वे स्वयं जनजाति समाज के हैं। इसलिये जानते हैं कि भगवान राम के अनन्य सहयोगी व परमभक्त हनुमान जी के नाम से जनजातियों में गोत्र है। जनजातियों में बड़े आदर के साथ हनुमान जी का नाम लिया जाता है। इस बीच केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री सत्यपाल सिंह ने कहा कि हनुमान जी दलित नहीं, आर्य नस्ल के थे। उन्होंने कहा कि राम जी और हनुमान जी के समय में जाति व्यवस्था नहीं थी और उस समय वर्ण व्यवस्था थी। इससे पूर्व योगी जी लखनऊ में एक बयान दे चुके हैं कि यदि बंदर आपको परेशान करे, तो हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए, बंदर आपको परेशान करना बंद कर देगा।
योगी आदित्यनाथ के बयानों ने भाजपा को चुनावों में कितना लाभ पहुचाया है और कितनी हानि यह तो आने वाला समय ही बतायेगा, लेकिन उन्होंने अपने बयानों से हनुमान जी पर एक नया विमर्श शुरू करवा दिया है। इसी बीच मुख्यमंत्रंी ने अपनी गोरखपुर यात्रा में एक कार्यक्रम के दौरान एक बार फिर बजरंगी शब्द का उपयोग करते हुए कहा कि कुछ लोग बजरंगी की ताकत से बहुत डर गये हैं।
वहीं बाबा रामदेव ने रांची में कहा कि हनुमान जी की वैसे तो कोई जाति नहीं है लेकिन गुणों व कर्मों के आधार पर वह ब्राह्मण हैं। शास्त्रों में हनुमान जी की जाति का कोई उल्लेख नहीं है। हनुमान जी पर आज जितने मुंह उतनी ही अधिक बातें हो रही हैं। आज हनुमान जी भी भगवान श्रीराम को याद करके बहुत मूुस्करा रहे होंगे कि कलयुग की राजनीति में अब उनकी जाति भी पूछी जा रही है। वह जहां भी होंगे वहां पर मित्र व अपने प्रभु श्रीराम से इस विषय पर चर्चा व चिंतन कर रहे होंगे। हनुमान जी एक ऐसे देवता हैं जिनकी काट आज किसी भी विरोधी दल के नेता के पास नहीं है। हनुमान जी के नाम पर कोई भी दल मुस्लिम तुष्टीकरण की कतई सियासत नहीं कर सकता है। बस वह केवल इसको लेकर हिंदू जनमानस में जातिगत मतभेद और मनभेद ही पैदा कर सकता है।
आज हनुमान जी भी सोशल मीडिया में चर्चा का बिंदु बन चुके हैं। हनुमान जी दलितों व वनवासियों के अचानक हीरो बनकर उभर चुके हैं। दलित चिंतक व विचारक भी अपना सिर पटकने को मजबूर हो रहे हैं। योगी जी ने हनुमान जी के नाम पर बहुत ही कुटिल राजनीति चली है इस राजनीति में वह सुपर हिट भी हो सकते हैं और फ्लाप भी लेकिन ऐसा होना संभव नहीं है। राजस्थान में नाथ संप्रदाय की चुनावों में एक बड़ी भूमिका रहती है। अभी तक बीजेपी के इस पास इस संप्रदाय को आकर्षित करने वाला कोई चेहरा नहीं था। इस बार योगी जी एक मजबूत चेहरा व स्टार प्रचारक बनकर उभरे हैं। आज योगी जी की जनसभाओं में राजस्थान के नेताओं की तुलना में कहीं अधिक भीड़ आ रही है और जनसभाओं में योगी- मोदी के नारे लग रहे हैं। जिसके कारण कांग्रेस कुछ सीमा तक घबरा भी रही है। यही कारण हेै कि कांग्रेस चुनाव आयोग से योगी जी की रैलियों पर रोक लगाने की मांग कर रही है। हालांकि सेकुलर व सनसनी मचाने वाले मीडिया ने हलचल करने की कोशिश जरूर की लेकिन वह भी सफल नहीं हो सका है।
वैसे यदि स्ववतंत्र रूप से मामले को देखा जाये तो योगी जी ने ऐसी कोई बात नहीं बोली है कि उनकी बातों का इतना बवाल मचा दिया जाये। हनुमान जी की जाति पर विमर्श चुनावों के दौरान खड़ा हुआ है और मतगणना के बाद ही स्वतः समाप्त हो जायेगा। योगी जी को भेजी जा रही सारी नोटिसें भी हनुमान जी के आशीर्वाद से ही स्वतः समाप्त हो जायेंगी। मतगणना के बाद योगी जी के भाषणों का आंकलन किया जायेगा कि उससे कितना लाभ हुआ है और कितनी हानि।
भाजपा ने विपक्ष की ओर से चलाये जा रहे तरकश के तीरों का जवाब भी खोज लिया है। बीजेपी का कहना है कि उनके बयानों को तोड़ मरोड़कर पेश किया जा रहा है। अपने पक्ष में बीजेपी ने एक वीडियो जारी कर रहा है कि योगी जी के कहने का संदर्भ किसी की भावना को भड़काना नहीं था। चुनाव प्रचार के दौरान भाषण को गलत तरीके से प्रस्तुुत किया गया है बीजेपी की ओर से जारी इस वीडियो में लिखा है कि बजरंगबली हमारी भारतीय परंपरा में एक लोक देवता हैं। जो स्वयं वनवासी हैं, गिरवासी हैं, दलित हैं, वंचित है और सबको साथ लेकर पूरे भारतीय समाज को उत्तर से लेकर दक्षिण तक पूर्व से पश्चिम तक सभी को जोड़ऩे का काम बजरंग बली करते हैं।
रामभक्त हनुमान जी पूजा आज पूरे विश्व में हो रही हैं। कलयुग में हनुमान जी ही जाग्रत देवता हैं जो सभी का कष्ट हरते हैं। वह संकट मोचक है। वह विघ्नहर्ता वह सभी परअपनी कृपा बरसाते हैं। यदि योगी जी के बयानों को मीडिया तोड़ मरोड़कर कर पेशकर रही है तो फिर पक्के सबूतों के साथ बाकायदा मीडिया के उन तत्वों पर भी मुकदमा चलाना चाहिये जो इस प्रकार की हरकतों में लगे हुए हैें। इस घटनाक्रम से पूरे हिंदू समाज की भावनाओं पपर हमला बुलवाया गया है। रामायण कालीन संस्कृति व उसके पात्रों को जातिगत आधार पर बांटकर विदेशी ताकतें विकृत खेल खेलने का प्रयास कर रही हैं। जिसका माध्यम यह सेकुलर मीडिया व राजनैतिक दल बहुत आसानी से बन रहे हैं। मुख्यंमत्री योगी आदित्यनाथ का बयान पूरी तरह से सही और तथ्यों व तर्कों पर आधारित है। आखिर उस समय इस प्रकार के लोग वनों और पर्वतों पर ही रहते थे। इन सभी छोटी मोटी जनजातियों को एकत्र करने के बाद ही प्रभु श्रीराम ने लंकेश पर विजय प्राप्त की थी। हनुमान जी आज समाजिक समरसता के प्रतीक हैं लेकिन उनके नाम पर सामाजिक समरसता का वातावरण खराब करने की कोशिश की जा रही है। यह निरर्थक विवाद है, आज सभी को केवल सबका साथ सबका विकास पर ही बहस करनी चाहिए।
मृत्युंजय दीक्षित