पहला प्यार

 बारिश और पहला प्यार अपने आप में अलग अहसास लाता है। यूँ तो बारिश हर साल होती है, पर ये खास जब बन जाती है, जब आप को किसी से प्यार हो जाये। कहते है हम अपना पहला प्यार कभी भूलते नहीं है। भूलेंगे भी कैसे, ये वो अहसास है जो सिर्फ जिस्म को नहीं बल्कि रूह तक को सरावोर कर देता है।

अमिता की उम्र सोलह साल की थी। कमसिन और उस पर बाली उम्र। सुंदरता की तो पूरक थी रीता। घर में सब की लाडली, पापा की जान थी, छोटा भाई और माँ ये ही छोटा सा परिवार था। बड़ी होने के कारण सब का प्यार पहले उसे मिलता। पापा प्यार से गुड़िया बुलाते थे। अमिता दसवीं पास कर कॉलेज में आ गयी थी, तो माँ को उस की चिंता सताती थी। पर पापा कह देते की अगर बेटी की जगह बेटा होता तो क्या घर में बैठा के रखती तुम इसे। बेटी हुई तो क्या हुआ, रोज लोकल ट्रेन में कितनी लेडिज सफर करती है।

और आठ-सोलह की लोकल तो पूरी लेडिज ट्रैन है फिर किस बात की चिंता, घर से निकलेगी नहीं तो सीखेगी कैसे ? तुम बेकार में चिंता ना किया करो। ये मेरी बेटी नहीं, बड़ा बेटा है जो अपने पापा का नाम रोशन करेगी।

कॉलेज शुरू हुआ, जुलाई का महीना था तो बारिश भी शुरु हो ही चुकी थी और मुंबई की ट्रेन और बारिश का कोई भरोसा नहीं। कब आ जाये।

उस दिन भी यूँ तो दिन रोज की तरह ही था। अमिता सुबह जल्दी तैयार हो आठ बजे घर से चल दी। आठ-सोलह की ट्रेन पकड़ने। थोड़ी-थोड़ी बारिश सुबह से ही हो रही थी लेकिन बारिश तो रोज आती है और मुंबई कभी बारिश की वजह से नहीं रूकती।

उस दिन भी रोज की तरह सब ठीक चल रहा था। अचानक बारिश तेज हो गयी और बिजली भी चमकने लगी। अमिता की माँ ने काम से फ्री हो कर टीवी खोली तो न्यूज़ आ रही थी की मुम्बई में मौसम विभाग ने हाइ अलर्ट जारी किया था, स्कूल बंद करने की सूचना थी लेकिन कॉलेज और दफ्तर चालू थे।

टीवी बंद कर माँ काम में लग गयी। उधर अमिता कॉलेज में ही थी। शाम को पाँच बजे कॉलेज से क्लासेज के लिए अँधेरी जाती थी फिर रात आठ बजे वापस आती थी। पाँच बज गए। बारिश रुकी नहीं पूरा दिन। अमिता अँधेरी के लिए चल दी। छह बजने वाले थे और अंधेरी से पहले दादर के आगे जा कर कहीं पर ट्रेन रुक गयी थी। सारी ट्रैन रोकनी पड़ी, कारण था कि ट्रैक पर पानी भर चुका था और ट्रेन नहीं चल पा रही थी।

कुछ देर तो इंतजार किया क्योंकि सारा शहर पानी-पानी हो चुका था। जो लोग पास के थे ट्रैन से उतर पैदल ही चल दिए थे घर के लिए, लेकिन रीता ने कोशिश की तो उस की लंबाई कम होने की वजह से पानी उस की गर्दन तक था तो वापस किसी तरह ट्रैन में चढ़ गयी।

लग रहा था इंद्र देव किसी से कुपित हो के मेघ बरसा रहे थे। बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी। सारे फ़ोन सेवा भी बंद हो गयी थी। अमिता को समझ नहीं आ रहा था क्या करे ? पर कहते है ना जब संग अच्छा हो तो हर मुसीबत कट जाती है। अमिता को परेशान देख के उस का हम उम्र लड़का उस के पास आया और बोला- आप परेशान मत हो। मै हूँ न आप के साथ, कुछ नहीं होगा।

अमिता ने उस से बात की। पहले उस का नाम पूछा, अमिता- क्या नाम है तुम्हारा।

जी पवन नाम है मेरा। मैं भी पढ़ाई कर रहा हूँ, एच.आर.कॉलेज में।

ओके, अमिता ने फिर पूछा- कहाँ रहते हो।

अमित बोला- वसई।

अमिता की आँखों में जैसे कुछ चमक आ गयी। वह बोली- मुझे भी वसई जाना है।

अमिता बारिश में बहुत भीग चुकी थी सुबह से। ठंड से उस का बदन काँप रहा था। पवन पास आया और उस का हाथ कस के पकड़ लिया। अमिता ने भी जैसे सहमति दे दी थी। ओह, पवन ये क्या कर रहे हो तुम ?

अमित बोला- चुप रहो बिल्कुल, ठंड से मर जाओगी। थोड़ी गर्मी दे रहा हूँ। अमिता ने मना नहीं किया। पवन और पास आया और उस को सीने से लगा लिया। अमिता का बदन पूरा भीगा हुआ था फिर भी पवन के स्पर्श से जैसे आग सी जल उठी सीने में।

अमिता की साँसें तेज हो गयी, ओह, पवन थोड़ा दूर रहो ना प्लीज़- अमिता ने काँपती हुये स्वर से कहा। अमिता की आवाज जैसे पवन के कानों को यूँ लगी, जैसे किसी ने गर्म लोहा पिघला के डाल दिया हो।

अन्तस् तक पूरा बदन जल गया, प्रेम की आग में, दोनों एक-दूसरे को बाँहो में भर कर यूँ ही पूरी रात बैठे रहे।जाने कब रात से सुबह हो गयी पता ही नहीं चला। सुबह बारिश कुछ कम हुई तो लोगों का आना-जाना शुरु हो गया। पवन भी अमिता को साथ ले पैदल चल दिया और फिर जैसे-तैसे दोनों अपने घर पहुँच ही गये। लेकिन इस बारिश में अमिता का दिल के पास ही रह गया था।

फिर कभी मुलाकात नहीं हुई। अमिता की मुलाकात पवन से, लेकिन जब भी बारिश आती है अमिता को वो बरसात की रात जरूर याद आती है।

— संध्या चतुर्वेदी अहमदाबाद, गुजरात

परिचय - संध्या चतुर्वेदी

काव्य संध्या मथुरा (उ.प्र.) ईमेल sandhyachaturvedi76@gmail.com