कविता

आओ नव वर्ष मनाएँ

नूतन बेला नूतन खुशियाँ नूतन संसार सजाएँ आओ नव वर्ष मनाएँ |

कुछ यत्न करें कुछ नेक करें दुखियों के दुःख को दूर करें,

मुझाए आनन पर आओ मिल कर मुस्कान खिलाएँ आओ नव वर्ष मनाएँ |

हो दूर अशिक्षा का दानव सब शिक्षित हों सब सज्जन हों,

दहशतगर्दी को दूर करें मिल भ्रष्टाचार मिटाएँ आओ नव वर्ष मनाएँ |

चहुँ ओर खुशी की लहरें हो निर्धनता कोसों रहे दूर ,

मानवता उर में बसी रहे नफ़रत और भेद मिटाएँ आओ नव वर्ष मनाएँ |

नित शांति प्रेम की हो वर्षा धुल जाए सारा कलुष तमस,

मिल सहिष्णुता की डोरी से आ वंदनवार सजाएँ ,आओ नव वर्ष मनाएँ |

मंजूषा श्रीवास्तव ‘मृदुल’

लखनऊ (उत्तर प्रदेश )

*मंजूषा श्रीवास्तव

शिक्षा : एम. ए (हिन्दी) बी .एड पति : श्री लवलेश कुमार श्रीवास्तव साहित्यिक उपलब्धि : उड़ान (साझा संग्रह), संदल सुगंध (साझा काव्य संग्रह ), गज़ल गंगा (साझा संग्रह ) रेवान्त (त्रैमासिक पत्रिका) नवभारत टाइम्स , स्वतंत्र भारत , नवजीवन इत्यादि समाचार पत्रों में रचनाओं प्रकाशित पता : 12/75 इंदिरा नगर , लखनऊ (यू. पी ) पिन कोड - 226016