गीतिका/ग़ज़ल

वो सुनता बहुत है तुम्हारी बातों को

जो रहगुज़र हो जाए तेरे तन बदन का मुझे वही झमझमाती बारिश कर दो तुमसे मिलते ही यक ब यक पूरी हो जाए मुझे वही मद भरी ख़्वाहिश कर दो जो रुकती न हो किसी भी फ़ाइल में मेरी उसी “साहेब” से गुजारिश कर दो गर लैला-मजनूँ ही मिशाल हैं अब भी फिर हमारे भी […]

गीत/नवगीत

मेघ जीवन

“मेघ जीवन” किरणों की मथनी से सूरज, मथता जब सागर जल को । नवनीत मेघ तब ऊपर आता, नवजीवन देने भूतल को । था कतरा कतरा सा पहले, धुनी तूल सा पूर्ण धवल । घनीभूत जुड़ जुड़ के हुआ तो, धरा काली घटा का रूप प्रबल । दमका तड़ित प्रचंड महा, चला चीर अम्बर के […]

अन्य बाल साहित्य

बच्चों के नाम खुला पत्र- अपना तिरंगा झंडा

प्रिय बच्चो, जय हिंद, अभी-अभी हमारा गणतंत्र दिवस समारोह सम्पन्न हुआ है. आप सबने अपने घरों में और स्कूल में तिरंगा झंडा लहराया होगा. यह तिरंगा झंडा महज तीन रंगों का तिरंगा झंडा ही नहीं, यह राष्ट्रध्वज तिरंगा हमारे देश की आन-बान-शान है. आओ तुम्हें बताएं तिरंगे झंडे के बनने की कहानी- तिरंगा झंडा तिरंगा […]

कविता

प्रेम….

ये दिल की आदतें कैसी है बार-बार चोट खाती फिरभी दिल लगाती है दर्द से गहराया है मन का कोना-कोना तब भी उसी का नाम ले चीखती है फिक्र कर मेरी….. प्रेम के घेरे में बांध गया वो मुझे जोड़कर दिल से दिल का तार देकर मीठा-मीठा एहसास खिंचता गया अपने दिल की सरहदों में […]

उपन्यास अंश

ममता की परीक्षा (भाग -25 )

ममता की परीक्षा ( भाग -25 ) ” बेटा ! तुम समझ नहीं रहे हो । मैं तो तुम्हारी खुशियाँ ही चाहती हूँ लेकिन तुम हो कि समझ नहीं रहे हो । ” अपने लहजे में थोड़ी नरमी लाते हुए बृंदा ने कहा था और फिर मन ही मन बुदबुदाई थी ‘ सच ही कहा […]

उपन्यास अंश

ममता की परीक्षा ( भाग -24 )

  जमनादास को उसके बंगले के सामने उतारकर गोपाल ने कार अपने बंगले की तरफ बढ़ा दिया । कार बंगले के मुख्य दरवाजे के सामने खड़ी करके गोपाल ने फुर्ती से उतरकर पिछला दरवाजा खोला और मुस्कुराते हुए साधना का दायाँ हाथ थाम लिया और फिर बड़ी अदा से झुकते हुए उसका स्वागत किया है […]

उपन्यास अंश

ममता की परीक्षा ( भाग – 23 )

ममता की परीक्षा ( भाग – 23 ) बस सुजानपुर पहुँच चुकी थी । गांव के चौराहे पर पहुँच कर ड्राईवर ने बस घूमाकर पुनः जिधर से आई थी उसी तरफ को उसका मुंह कर दिया था । बस के रुकते ही सवारियां एक एक कर उतरने लगीं । अमर ने भी अपना बैग लिया […]

उपन्यास अंश

ममता की परीक्षा ( भाग – 22 )

  कुछ देर बाद तीनों शहर में एक चौराहे के नजदीक एक रेस्टोरेंट में बैठे चाय की चुस्कियां ले रहे थे । चाय की चुस्कियों के बीच ही साधना ने अपने बारे में पूरी बात गोपाल को बता दी थी । उसके पिता श्री किशुनलाल एक शिक्षक हैं । वह सुजानपुर गांव में रहते हैं […]

उपन्यास अंश

ममता की परीक्षा ( भाग – 21)

  गोपाल वहीं खड़ा साधना को तब तक देखता रहा जब तक वह कॉलेज की ईमारत में घुस कर उसकी नज़रों से ओझल नहीं हो गई । जमनादास ने उसके सर पर हलकी चपत लगाते हुए बोला ,” अबे ! क्या देख रहा है ?गई वो ! चल ! नहीं तो मैडम पंडित मुर्गा बना […]