Monthly Archives: January 2019

  • नज्में लिखना गाया करना

    नज्में लिखना गाया करना

    
तल तक कविवर जाया करना ढूंढ के मोती लाया करना |
नज्में लिखना गाया करना जग को सच समझाया करना || इतिहास की निर्मम भूलों पर विकृतियों के तीक्ष्ण शूलों पर |
हिलती समय की चूलों पर लू...

  • कविता – समय से मुठभेड़

    कविता – समय से मुठभेड़

    तुम चाहते हो कि हरेक आंगन तक गुनगुनी धूप पहुंचे ताकि कोई ठिठुरती सर्दी में न कंपकंपाये तुम चाहते हो कि हरेक दर्पण बिना धूल के हो ताकि पारदर्शिता में कोई बाधा न आये तुम चाहते...

  • यूँ मत देख…

    यूँ मत देख…

    यूँ मत देख कि झुलसती हूँ बहुत तनिक तो कभी ओटकर के देख। तपिश हर वक्त ही सही नही होती कभी तो ओस की तरह झरके देख ।। माना कि बहुत तंग हुई हैे गलियां, जिधर...

  • लघुकथा – गलतफ़हमी

    लघुकथा – गलतफ़हमी

    आज एक समाचार पढ़ा- ”अमित शाह को स्वाइन फ्लू, कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने कसा विवादित तंज” दुनिया को यह क्या हो गया है? किसी की बीमारी पर भी तंज! शाह की बीमारी पर तंज कसते...





  • व्यंग्य – बसंत का मतलब

    व्यंग्य – बसंत का मतलब

    बसंत मतलब कवियों और साहित्यकारों के लिए थोक में रचनाएं लिखने का सीजन। बसंत मतलब तितलियों का फूलों पर मंडराने, भौंरे के गुनगुनाने, कामदेव का प्रेमबाण चलाने, खेत में सरसों के चमकने और आम के साथ...

  • खून उबलता है

    खून उबलता है

    लावा  जैसे ग़र  ये   दर्द   पिघलता   हैपलकों से कब इतना बोझ सँभलता है तब-तब  सब्र  टूटने  पर  मजबूर  हुआ जब-जब पानी सर के पार निकलता है सर्दी गर्मी बारिश लाख सितम  कर  लें मौसम है मौसम ...