भौतिक समृद्धि का परिचायक रूप है सभ्यता

सभ्यता समाज के सकारात्मक प्रगतिशील और समावेशी विकास को इंगित करने के लिए किया जाता है। सभ्यता के अंतर्गत उन्नत कृषि लम्बी दूरी का व्यापार नगरीकरण आदि की उन्नत स्थिति दर्शाता है।सभ्यता कुछ माध्यमिक तत्वों यथा विकसित यातायात व्यवस्था लेखन मापन के मानक विधि व्यवस्था कला की प्रसिद्ध शैलियां स्मारकों के स्थापत्य गणित उन्नत धातु कर्म खगोल विद्या आदि के माध्यम से पतिभाषित होती है।
भारतीय परंपरा में समृद्ध सांस्कृतिक मूल्य है। हमारी सभ्यता बताती है कि बड़ों के चरण स्पर्श करना चाहिए। भगवान श्रीराम व उनके भाई भी अपने गुरु माता पिता के चरण स्पर्श करते थे। अपने दोनों हाथ जोड़कर नमस्ते कहना ये सभी भारतीय सभ्यता के महत्वपूर्ण अंग है। महाशिवरात्रि करवा चौथ जैसे अवसरों पर उपवास किया जाता है मुस्लिम भी पवित्र रमजान माह में रोजा करते है। वैज्ञानिक तरीके से पाचन हेतु ये सब जरूरी है।अतिथि देवो भव ।मेहमानों को ईश्वर मानकर सेवा करना ये हमारी सभ्यता के अंतर्गत आता है। हमारे देश मे हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई सहित सभी धर्मों के लोग शांति से एक साथ रहते हैं। सनातन धर्म ने सभ्यता को भारत मे संरक्षित रखने का कार्य किया है।
संक्षेप में भैतिक समृद्धि का परिचायक तत्व सभ्यता है।मानव की उद्दात चित्रवृति की जो सामाजिक और आर्थिक संगठन के रूप में बहुमुखी अभिव्यक्ति हुई। उसे ही सभ्यता कहा जाता है।
सभ्यता सामाजिक व्यवहार की व्यवस्था है।सभ्यता नागरिकता का रूप है।सभ्यता उस राह पर चलना सिखाती है जो मानव जीवन को जीवन मूल्यों से परिपूर्ण कर देता है।सभ्यता मानव के जीवन को सुखपूर्वक व्यतीत करने के लिए रहन सहन और पहनावे का प्रतीक है।
अलग अलग देश की अलग अलग सभ्यता होती है।मनुष्य ने काफी लंबे समय तक पशुओं की तरह जीवन व्यतीत किया। जैसे जैसे उसका बौद्धिक विकास हुआ उसने पशुत्व जीवन से उठकर जीवन व्यतीत करना प्रारम्भ किया। धीरे धीरे सुसंस्कृत बन गया। मनुष्य के समाज मे ऋषि मुनि दार्शनिक कवि कलेक्ट हुए। जिन्होंने मानव जीवन कप विकास गति देने के लिए कई प्रकार के तत्वों का अन्वेषण किया। कई प्रकार के जीवन आदर्शो को खोजा।उन्होंने जीवन मे सुख के स्वरूप को पहचाना।ऐसी सामाजिक भावना को विकसित किया जिससे मानव स्वार्थ से ऊपर उठकर जिओ और जीने दो के सिद्धांत को समझने लगा। वसुधेव कुटुम्बकम की भावना को समझने लगा। इस प्रकार मानव के सामाजिक रहन सहन खान पान पहनावे को पवित्र व सुंदर बनाने का प्रयास किया।

सर्व हितकारिणी आर्थिक व्यवस्था को निर्मित किया। समाज को एक व्यवस्था में कायम करने के लिए राजनीतिक नियमों का आर्विभाव किया। और विकास क्रम की लंबी परम्परा में भौतिक समृद्धि के रूप में घर खेती उद्योग रेल वायुयान तार रेडियो डाक आदि चीज़ों का आविष्कार किया।
भारत मे कई सभ्यता की कहानियां है जिनमे सिंधु घाटी की सभ्यता आहड़ कालीबंगा की सभ्यता मोहनजोदड़ो की सभ्यता का वर्णन पढ़ने को मिलता है।
हमारी वैदिक सभ्यता सबसे प्रारम्भिक सभ्यता मानी जाती है। रामायण और महाभारत दो महान ग्रंथ इन सभ्यता की देन है।

परिचय - राजेश पुरोहित

पिता का नाम - शिवनारायण शर्मा माता का नाम - चंद्रकला शर्मा जीवन संगिनी - अनिता शर्मा जन्म तिथि - 5 सितम्बर 1970 शिक्षा - एम ए हिंदी सम्प्रति अध्यापक रा उ मा वि सुलिया प्रकाशित कृतियां 1. आशीर्वाद 2. अभिलाषा 3. काव्यधारा सम्पादित काव्य संकलन राष्ट्रीय स्तर की पत्र पत्रिकाओं में सतत लेखन प्रकाशन सम्मान - 4 दर्ज़न से अधिक साहित्यिक सामाजिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित अन्य रुचि - शाकाहार जीवदया नशामुक्ति हेतु प्रचार प्रसार पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य किया संपर्क:- 98 पुरोहित कुटी श्रीराम कॉलोनी भवानीमंडी जिला झालावाड़ राजस्थान पिन 326502 मोबाइल 7073318074 Email 123rkpurohit@gmail.com