हमारे अटल जी (पुण्यतिथि पर विशेष)

कभी भारतीय लोकतन्त्र में अछूत रही पार्टी भाजपा की पहचान बनाने वालों में से अटलबिहारी वाजपेयी खास चेहरे रहे है. 24 दिसम्बर 1924 में ग्वालियर में पैदा हुए अटलबिहारी वाजपेयी जी न सिर्फ एक कुशल राजनीतिज्ञ अपितु एक कवि भी थे.उनके पिता उत्तर प्रदेश के आगरा जनपद के मूल निवासी पण्डित क्रष्णबिहारी वाजपेयी जो कि ग्वालियर रियासत में अध्यापन कार्य तो करते ही थे इसके अतिरिक्त वे हिन्दी व ब्रजभाषा के सिद्धहस्त कवि भी थे. पुत्र में काव्य के गुण वंशानुगत परिपाटी से प्राप्त हुए थे.अटल बचपन से ही बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे किशोरावस्था में ही उन्होनें एक अदभुत कविता लिखी थी. “हिन्दू तन-मन हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय” इस कविता से पता चलता है कि बचपन से ही उनके मन में देशभक्ति के लिए रुझान था.मेरी इक्यावन कविताएं उनका प्रसिद्ध काव्य संग्रह थे. उनकी रंगों में काव्य रक्त-रस अनवरत घूमता रहा है. उनकी सर्व प्रथम कविता ताजमहल थी. “एक शहंशाह ने बनवा के हंसी ताजमहल,मजाक हम गरीबों की मुहब्बत का उड़ाया है”.कविता करीगरों के शोषण से ओतप्रोत थी.
प्रारम्भिक शिक्षा से लेकर बी. ए. तक की शिक्षा ग्वालियर के विक्टोरिया कालेज में हुई. छात्र जीवन में ही वे राष्ट्रसंघ के स्वंय सेवक बने.फिर कानपुर डी. ए. बी. कालेज से राजनीतिशास्त्र में एम.ए.की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीण की.इसके उन्होने अपने पिता जी के साथ में एल एल बी की पढाई भी प्रारंभ की जिसे उन्होंने बीच में ही छोड़ दिया और पूरी निष्ठा के साथ संघ में जुट गए. डा. श्यामा मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के निर्देशन में राजनीति का पाठ तो पढा ही साथ ही पाञ्चजन्य राष्ट्रधर्म दैनिक स्वदेश जैसी पत्र पत्रिकाओं का कुशल संपादन भी किया.
1953 में दिल्ली में बतौर पत्रकार काम कर रहे थे तब उस समय भारतीय जनसंघ के नेता डा़ श्यामा मुखर्जी जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा दिए जाने के खिलाफ थे. वाजपेयी ने ये जानकारी एक इन्टरव्यूह के दौरान खुद ही दी कि ड़ा श्यामा मुखर्जी जम्मू कश्मीर में लागू परमिट सिस्टम का विरोध करने के लिए वहाँ चले गए.इसी बीच कश्मीर में नज़रबंदी की हालत में ड़ा श्यामा मुखर्जी की मौत हो गई जिससे वाजपेयी बहुत दुखी हुए और पत्रकारिता छोज़ पूर्णतया राजनीति में आ गए.
वाजपेयी जी ने पहली बार लोकसभा चुनाव 1955 में लड़ा जो कि वो हार गए थे .सन 1957 में अटलबिहारी वाजपेयी पहली बार सांसद बनकर लोकसभा में आए और 1996 में वो पहली बार देश के प्रधानमन्त्री बने. लेकिन सिर्फ 13 दिन के लिए. 1998 में वो फिर से पीएम बने और 2004 तक रहे. वाजपेयी कुल 10 बार लोकसभा सांसद रहे और दो बार 1962 और 1986 में राजंयसभा सांसद रहे.
अटल जी सबसे लम्बे समय तक सांसद रहे हैं और जवाहरलाल नेहरू व इंदिरा गांधी के बाद सबसे लम्बे समय तक गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री भी। वह पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने गठबन्धन सरकार को न केवल स्थायित्व दिया अपितु सफलता पूर्वक संचालित भी किया।अटल ही पहले विदेश मंत्री थे जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी में भाषण देकर भारत को गौरवान्वित किया था।
देश आजाद होने के बाद चार दशक तक बीजेपी विपक्ष में रही, 1999 में अन्नाद्रमुक प्रमुख जयललिता द्वारा केन्द्र की बीजेपी की अनुयाई गठबंधन सरकार से समर्थन वापस लेने से सरकार गिर गई लेकिन 1999 के चुनाव में वाजपेयी पिछली बार के मुकाबले एक अधिक स्थिर गठबंधन सरकार के मुखिया बने. जिसने पहली बार गठबंधन सरकार बनाई और पाँच साल का कार्याकाल पूरा किया.
अटल जी एक ऐसे प्रधानमंत्री रहे जिनको हर दल के लोगों ने स्वीकार किया.पहली बार 23 पार्टियों के गठबंधन को उन्होने बखूबी निभाया.अटल सरकार ने 11 और 13 मई 1998 को पोखरन में पाँच भूमिगत परमाणु परीक्षण करके भारत को परमाणु शक्ति सम्पन्न देश घोषित कर दिया. ये सब इतनी गोपनीयता से किया गया कि अति विकसित जासूसी उपग्रहों व तकनीक से सम्पन्न पश्चिमी देशों को भनक तक नहीं लगी. इसके बाद पश्चिमी देशों द्वारा अनेक प्रतिबंध लगाए गए पर वाजपेयी सरकार ने द्रढ़तापूवर्क सामना करते हुए आर्थिक विकास की ऊँचाइयों को छुआ.पोखरन परीक्षण के बाद ही लालबहादुर शास्त्री के “जय यवान जय किसान” के नारे में “जय जवान जय किसान जय विग्यान “को जोड़ दिया.
19 फ़रवरी 1999 को सदा-ए-सरहद नाम से दिल्ली से लाहौर तक बस सेवा शुरू की गई.इस बस सेवा का उद्धघाटन करते हुए प्रथम यात्री के रूप में वाजपेयी ने पाकिस्तान की यात्रा करके नवाज़ शरीफ से मुलाकात करके आपसी सम्बन्धों की नई शुरूआत की.
तत्पश्चात पाकिस्तान के तत्कालीन सेना प्रमुख परवे़ज मुशर्रफ की शह पर पाकिस्तान सेना व उग्रवादियों ने कारगिल में घुसपैठ करके कई पहाड़ी चोटियों पर कब्जा कर लिया लिया था. तब अटल जी ने अन्तरराष्टीय सलाह का सम्मान करते हुए धैयर्पूवक किंतु ठोस कार्यवाही करके परिस्थितियाँ नियन्त्रित की.
पूरे भारत के चारों कोनों को सड़क मार्ग से जोड़ने का स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना की शुरूआत की.ऐसा माना जाता है कि अटल जी के शासनकाल में जितनी सड़कों का निर्माण हुआ इतना केवल शेरशाह सूरी के समय हुआ था. एक सौ साल पुराने कावेरी विवाद को सुलझाने का श्रेय भी अटल जी को ही जाता है.
अटल जी को लखनऊ से विशेष लगाव था. 1954 में लेकसभा उपचुनाव में जनसंघ उम्मीदवार के रूप में पहलीबार लखनऊ से ही मैदान में उतरे थे.लखनऊ अटल जी की कर्मभूमि रही है. 2007 की कपूरथला की अंतिम बैठक के बाद लखनऊ से धीरे धीरे सम्बन्ध खत्म हो गया. 2004 में वे राजनीति से संन्यास ले चुके थे और नई दिल्ली सरकारी आवास में में रहने लगे थे.16 अगस्त 2018 में एक लम्बी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया.अटल जी अपनी दोस्त राजकुमारी कौल और बी. एन. कौल की बेटी नमिता भट्टाचार्य को उन्होने दत्तक पुत्री स्वीकार किया था. 2014 में राजकुमारी कौल की म्रत्यु हो गई थी तब से नमिता और रंजन भट्टाचार्य अटल जी के साथ ही रहते थे.नमिता के द्वारा ही अटल जी को मुखाग्नि दी गई थी.
नीऱू”निराली
कानपुर

परिचय - नीरू श्रीवास्तव

शिक्षा-एम.ए.हिन्दी साहित्य,माॅस कम्यूनिकेशन डिप्लोमा साहित्यिक परिचय-स्वतन्त्र टिप्पणीकार,राज एक्सप्रेस समाचार पत्र भोपाल में प्रकाशित सम्पादकीय पृष्ट में प्रकाशित लेख,अग्रज्ञान समाचार पत्र,ज्ञान सबेरा समाचार पत्र शाॅहजहाॅपुर,इडियाॅ फास्ट न्यूज,हिनदुस्तान दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित कविताये एवं लेख। 9ए/8 विजय नगर कानपुर - 208005