व्यंग्य- गांधीगिरी दौड़ती थी

बात बडे़ लोग की हो तब बाते करना अच्छा लगता और सुनना भी,
कल मंच से बडे़ ताकतवर लोगो की बात किया,
कुछ परचित बडे़ लोग मेरे पास फोन करके बोले” लगे रहो बस ऐसे ही हमारा नाम बनाकर रखो।
मैं डर कर बोला अजी मांफ करिये अगर बुरा लगा हो, आप माई बाप हो आप की दया से सबकुछ चल रहा है।
उधर से आवाज आया”देखो हमने बहुत अच्छे कर्म किये दान किये
मगर लोग कुछ पल याद करके भूल जाते है, आप ने जब कवि सम्मेलन मंच से हमारे नाम की प्रंशसा किया।
हमे भष्ट्राचारी, लालची और मजदूर का वेतन मारने वाले रूप में दिखाया।
सच में पूरा शहर और छोटे मिडिया वाले चाय की दुकान पर बस चर्चा ही चर्चा सच बहुत खुशी महसूस कर रहे है।एक बडे़ नेता जी अचानक घर पर टपक पडे़
वो पास आकर प्यार से बोले” हम अभी झोलाछाप राजनीति का खिलाडी़ हूं
कभी कभार हमें भी मौका दो।
‘अरे नेता जी कैसा मौका
नेता जी” भाई हमे अपने राजनीति कविता और लेख के किसी कोने में थोडा़ सा जगह दे देते।
अच्छा आप को कोने में जगह चाहियें ना।
हाथ जोड़कर निवेदन कृपया कुछ समय बाद सम्पर्क करे
क्योकि अभी फला नेता ने खुद को गाली देने के लिये एडंवास देकर गये।
हम ईमानदार गरीब कुचले लेखक किस की खुशामद करे।
अरे आप निकलो
मेरे पास ज्यादा समय नही है,
कल एक नेता जी को उनके कुकर्मो का चिठ्ठा सौपना है,
वो बदनाम होने के लिये वायरल होना चाहते है।
अरे बाप रें बाप
पहले बापू की गांधीगिरी दौड़ती थी आज वायरल होना बडे़ लोग की बडी़ बात है।हम आम आदमी क्या समझे बस स्कैम उजागर को बदले की भावना बोलकर उपर राज कर रहे बडे़ लोग संजीवनी बूटी प्रदान कर रहे है,
उदाहरण के तौर पर देखो लाखो की घोटाले हुआ
मगर एक भी वापस ना आया।बडे़ नेता से सीखो
कितने भी बोलवचन हो जाते है मगर अनेक शुभ अवसर पर सब मिलकर बंद कमरे में व्यक्तिगत जीवन का आनंद बडे़ चालाकी से उठाते है।अब जाके शरीर में वापस प्राण लौटकर आ गये
चटपटी कहानी चटुकारिता करके कितने अवसर पर अपनी उल्लू सीधा किया।वैसे खबर में बने रहने का हजारो उपाय लिख रहा हूं,
सम्पर्क करियेगा।
अभिषेक राज शर्मा पिलकिछा जौनपुर उप्र०
सम्पर्क-8115130965

परिचय - अभिषेक शर्मा

कवि अभिषेक राज शर्मा जौनपुर (उप्र०) मो. 8115130965 ईमेल as223107@gmail.com indabhi22@gmail.com