चाह पाने की

चाह पाने की ख्याली जाएगी
अब पली आशा निकाली जाएगी

हो न पूरे स्वप्न सबके यहाँ
बिन मनी सारी दिवाली जाएगी

नोट अपने ही न मिलते बैंक से
ब्याह निपटाने दलाली जाएगी

दूसरे की रौनकें है बेटियाँ
प्यार से ही ये संभाली जाएगी

खौफ उनको अब किसी का भी न हो
जब सही संस्कार डाली जायेगी

ख्याल उनका खास रखिए आप सब
वो बडें ही नेह पाली जाएगी

मर्द की हो जब नजर कुत्सित ये तभी
मौत के बिन वो उठाली जाएगी

डॉ मधु त्रिवेदी

परिचय - डॉ मधु त्रिवेदी

जन्म तिथि --25/05/1974 पद ---प्राचार्या शान्ति निकेतन काॅलेज आॅफ बिज़नेस मैनेजमेंट एण्ड कम्प्यूटर साइन्स आगरा email -madhuparashar2551974@gmail.com रूचि --लेखन कवितायें ,गजल , हाइकू 20 से अधिक प्रकाशित Reference Books --"टैगोर का विश्व बोध दर्शन नागार्जुन के काव्य साहित्य में प्रगतितत्व अन्य Text Books