गीतिका/ग़ज़ल

बड़ी मुश्किल में हूँ इसका हल क्या होगा

बड़ी मुश्किल में हूँ, इसका हल क्या होगा चिंता में डूबा सोचूँ, आख़िर कल क्या होगा इमारत ढह जायेगी, आ जाए जो तूफाँ खोखली हो बुनियाद, महल क्या होगा रहे बेसब्र, काबू ना रहता, भटकता है मन सा दुनिया में दूजा, बेकल क्या होगा शिकायत ना हो कोई, ना हो गिला कोई खुशी हो दिल […]

कविता

मिली हमें आजादी लेकिन ….

भाई से भाई लड़ता हो , दिलों में जब तक दूरी है मिली हमें आजादी लेकिन         अभी कहाँ वो पूरी है आन बान और शान है रुपया लेकिन सबके पास नहीं किसी की आमद अच्छी खासी किसी किसी की खास नहीं  किसी की चिंता कहाँ रखूँ मैं  किसी की तो मजबूरी […]

कविता

कोई सिखे तो…तुमसे।

किसी की उदासियों में भी खुशियां बिखेरना हंसना हंसाना कोई सिखे तो…तुमसे।          अधूरे लफ़्ज़ों और           बिन बात की बातों से भी           सब कुछ कह देना            कोई सीखे तो… तुमसे। खुद से अपरिचितों को खुद से ही […]

कविता

हाँ, मैं था “विश्वामित्र”

हाँ, मैं था “विश्वामित्र” अपनी तपस्या में लीन केन्द्रित अपने लक्ष्य के लिये कठोर हो चुका था हृदय, मन, मस्तिष्क और फिर एक बार पुनः वो आयी हाँ, वही इन्द्र की अप्सरा “मेनका” सर्वगुण से परिपूर्ण सौन्दर्य की देवी जिसने भंग कर दिया मेरे तप को अपने प्रेमपाश में बाँधकर जन्म हुआ कई भावनाओ का […]

कविता

कविता – मन की गहराई

कविता – मन की गहराई मन के अंदर की उथल पुथल कोई बाहर वाला क्या समझेगा कब किस वक़्त क्या महसूस हो कैसे कोई जानेगा । राज़ छुपे हैं कैसे-कैसे पसन्द ना हो कांटे जैसे मन की पीड़ा स्वयं पता हो एहसासों की भरी लता हो दुनिया जाने दुनियादारी मन से हारी, मन को मारी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कर लिया फैसला ये दिल तेरे नाम लिखेंगे, गज़ल तेरे हुस्न पर सुबह ओ शाम लिखेंगे। कैसे धड़क उठा दिल तुमसे नजरें मिलते ही, नजरों ने किया जो वो पहला सलाम लिखेंगे। चाँदनी रातों में हाथों में हाथ डालकर टहलना, दास्तान ए मोहब्बत में राज वो तमाम लिखेंगे। इत्र में भिगोकर जो भेजे थे खत […]

कविता

बचपन की हरी घास

बचपन में मेरे बगीचे में उगती थी दुबा वाली हरी घास माँ कहती लाडो ठाकुर जी के लिए दुबा और लाल फूल तोड़ ला। और मैं झट से बगीचे में जा चुन चुन कर दुबा तोड़ती सदाबहार के गुलाबी और गुड़हल के लाल फूल लेकर ठाकुर जी पास रख कर दो कर जोड़ खुश होती। […]

लघुकथा

भय

रात आधी से अधिक बीत चुकी थी । अमर हॉरर कहानियाँ पढ़ते पढ़ते ही अपने कमरे में सो गया था । हमेशा की तरह बिजली गुल थी । अमावस की रात पूरे शबाब पर थी । अँधेरे का साम्राज्य पसरा हुआ था । हाथ को हाथ सुझाई नहीं दे रहे थे ।  अचानक तेज हवा […]

समाचार

विकलांग चैंपियन मोहित सिंह के सामाजिक कार्यों से प्रभावित हुआ उत्तरप्रदेश प्रशासन

महोली तहसील में बनी “सहज” पोर्टल की दुकानों द्वारा अधिक वसूली करने की शिकायतों के चलते प्रशासन ने उन दुकानों को हटाने का निश्चय किया है। “सहज” भारत सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं का लाभ एक जगह पर ऑनलाइन दिलाने के लिए निर्मित पोर्टल है। दुकान चलाने वाले गरीब हैं इसलिए प्रशासन कठोर कार्यवाही नहीं करता, […]

समाचार

मकर संक्रांति पर खिचड़ी भण्डारे का आयोजन

उत्तरप्रदेश के विकलांग चैंपियन मोहित सिंह ने 15 जनवरी को मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर अपने गृहनगर महोली (सीतापुर जनपद) में खिचड़ी भण्डारे का आयोजन किया। प्रातः 9 बजे सूर्य और विकलांग देवताओं – सूर्य के सारथी अरुण, सूर्य के शिष्य हनुमान, सूर्यपुत्र शनि की पूजा और विद्या की देवी सरस्वती की पूजा के […]