Monthly Archives: January 2019





  • कविता – मन की गहराई

    कविता – मन की गहराई

    कविता – मन की गहराई मन के अंदर की उथल पुथल कोई बाहर वाला क्या समझेगा कब किस वक़्त क्या महसूस हो कैसे कोई जानेगा । राज़ छुपे हैं कैसे-कैसे पसन्द ना हो कांटे जैसे मन...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कर लिया फैसला ये दिल तेरे नाम लिखेंगे, गज़ल तेरे हुस्न पर सुबह ओ शाम लिखेंगे। कैसे धड़क उठा दिल तुमसे नजरें मिलते ही, नजरों ने किया जो वो पहला सलाम लिखेंगे। चाँदनी रातों में हाथों...


  • भय

    भय

    रात आधी से अधिक बीत चुकी थी । अमर हॉरर कहानियाँ पढ़ते पढ़ते ही अपने कमरे में सो गया था । हमेशा की तरह बिजली गुल थी । अमावस की रात पूरे शबाब पर थी ।...