रक्तदान: एक विस्तृत परिप्रेक्ष्य

आप लोगों ने अक्सर रक्तदान पर बहुत-से स्लोगन पढ़े-सुने होंगे-
”यदि करनी हो मानव सेवा,
रक्तदान है उत्तम सेवा.”

”रक्तदान की एक इकाई, दे सकती किसी को जीवनदान,
दुर्घटना-रण में घायल-हित, रक्तदान है महादान.”

रक्तदान करने के बारे में बहुत-सी भ्रांतियां और भय हैं. बहुत लोग रक्तदान इसलिए नहीं करते क्योंकि उन्हें भय लगता है जबकि वे रक्तदान करने योग्य होते हैं. इस भय का कारण होती हैं मन मस्तिष्क में गहरी पैठ बना चुकी भ्रांतियां. यह ठीक है कि रक्तदान करने से पूर्व डॉक्टर भली भांति जांच करते हैं और योग्य ठहराए जाने पर ही रक्तदान की आज्ञा मिलती है. इसका सबसे बड़ा फायदा है कि आपको अपने रक्त की खूबियों और कमियों के बारे में पता चलता है और आप आवश्यकतानुसार कदम उठा सकते हैं. लगभग सभी को मालूम है कि अभी तक वैज्ञानिक कृत्रिम रक्त की निर्माण नहीं कर पाए हैं. यह केवल दान में ही प्राप्त किया जा सकता है. कितनी ही अवस्थाएं ऐसे हैं जब रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है. देश के जवानों के लिए जो सीमा पर रक्त बहते हैं ताकि हम चैन से जी सकें, दुर्घटना में घायल लोगों के इलाज में, गर्भवती महिलाओं को, डेंगू जैसी बीमारियों में, थैलेसीमिया के रोगियों के लिए. अगर कोई रक्तदान से घबराता है तो उसे रक्तदान केंद्र पर ज़रूर जाकर देखना चाहिए कि रक्तदान कैसे किया जाता है. अनेक भ्रांतियां दूर होंगी.

 

रक्तदान पर आधारित लघुकथा दुआओं का दान को आपने हाथों-हाथ लिया, बहुत सराहा और हमें इतनी नवीनतम जानकारियां दे दीं, कि हम फिर एक बार रक्तदान पर एक ब्लॉग लेकर आ रहे हैं, ताकि उन सभी जानकारियों को समेटा जा सके.

 

 

हर दिवस की तरह ‘विश्व रक्तदाता दिवस’ भी मनाया जाता है. ‘विश्व रक्तदाता दिवस’ हर वर्ष 14 जून को मनाया जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इस दिन को रक्तदान दिवस के रूप में घोषित किया गया है. वर्ष 2004 में स्थापित इस कार्यक्रम का उद्देश्य सुरक्षित रक्त और रक्त उत्पादों की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाना और रक्तदाताओं के सुरक्षित जीवन रक्षक रक्त के दान करने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करते हुए आभार व्यक्त करना है.

 

 

रक्त में शामिल तत्व इस प्रकार हैं-

1. लाल रक्त कणिकाएं हमारे शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह करती है और कार्बन-डाई-ऑक्साइड को खत्म करती है.
2. सफेद रक्त कणिकाएं संक्रमण से लड़ती है.
3. प्लेटलेट्स रक्त के थक्के बनाने में मदद करता है.
4. प्लाजमा में साल्ट और अन्य प्रोटीन होते हैं.

O+ सबसे ज्यादा और सबसे AB- ग्रुप का रक्त सबसे दुर्लभ होता है-

O+ ग्रुप का रक्त सबसे ज्यादा पाया जाता है. जबकि AB- ग्रुप का रक्त बहुत ही कम पाया जाता है. इसलिए इसे दुर्लभ की श्रेणी में रखा गया है.

 

यूनिवर्सल डोनर-

O- बल्ड ग्रुप सबसे महत्वपूर्ण
वैसे तो रक्त को 8 ग्रुपों में बांटा गया है जिसमें सबसे महत्वपूर्ण O- है, क्योंकि इस ग्रुप के शख्स का रक्त सभी ग्रुपों के काम आ सकता है. लेकिन इस ग्रुप के व्यक्ति को अगर रक्त की जरूरत पड़ जाए तो इसे सिर्फ O- ग्रुप के शख्स का ही रक्त चढ़ाया जा सकता है. इसलिए O- ब्लड ग्रुप वाले को यूनिवर्सल डोनर भी कहा जाता है.

 

 

हर विषय की भांति रक्तदान पर भी लेकिन-किंतु-परंतु करके बहुत-से सवाल उठाए जा सकते हैं. कुछ शिक्षित व्यक्ति इस कार्य से कतराते हैं जिसके कुछ कारण इस प्रकार बताए जाते हैं-
1. कई बार रक्त का रखरखाव भली भांति न होने के कारण रक्त फेंकना पड़ जाता है.
2. कई बार जरूरतमंद को रक्त उपलब्ध होने के बाद भी लापरवाही के कारण समय पर नही पहुँचाया जाता.
3.कई ऐसे उदाहरण भी हैं कि डिस्पोज़ेबल सीरिंज का उपयोग न करके नकली सीरिंज उपयोग की गयी जिससे रक्त देने वाले को लेने के देने पड़ गये. जब लोग समाचार पढ़ते हैं कि फलां-फलां जगह दूरी की वजह से कर्मचारियों की लापरवाही से जरूरतमंद को खून नहीं मिला, तो रक्त देने वालों का उत्साह फीका पड़ जाता है.

 

 

बेशक इन आशंकाओं से इनकार नहीं किया जा सकता और यह दुःख का विषय भी है, लेकिन केवल इस वजह से रक्तदान जैसे महादान को नकारा नहीं जा सकता, कुछ सावधानियां बरती जाने पर जोर दिया जा सकता है.

 

1.रक्त का रखरखाव भलीभांति हो.
2.रक्त की समय सीमा का ध्यान रखा जाए.
3.उचित रखरखाव और इन्वेंटरी के अभाव में ठीक से संचालन नहीं हो पाता जिसे डिजिटल युग में सुधारा जा सकता है.
4.ज़रूरतमंद को रक्त पहुँचाने में लापरवाही अक्षम्य है. डिस्पोज़ेबल सीरिंज ना उपयोग कर नकली सीरिंज उपयोग का मामला गंभीर है जिसे हल्के में बिलकुल नहीं लिया जाना चाहिए.
5.जिस प्रकार सिनेमा घरों में राष्ट्र गान अनिवार्य किया गया है और सिगरेट शराब के नुक्सान बताने वाले विज्ञापन होते हैं उसी प्रकार रक्तदान से जुड़ी रुचिकर डाक्यूमेंट्री होनी चाहिए जिससे रक्तदान सम्बन्धी भ्रांतियां हटें और उत्साह बने.

 

अंत में हम पुनः आपको रक्तदान करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए बताना चाहेंगे, कि अनेक बार ऐसे उदाहरण भी देखने में आए हैं जब पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बनाकर वांछित रक्त ग्रुप के रक्त को समय पर पहुंचाकर पीड़ितों की जान बचाई है.
अगला रक्तदान शिविर दिल्ली में 3 फरवरी को-

 

रक्तदान पर इन ब्लॉग्स को भी पढ़ें-

थोड़ा-सा रक्तदान: दे सकता है जीवनदान

 

जागरुकता (लघुकथा)

 

रक्तदान : महादान

 

फिर सदाबहार काव्यालय-13

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दुआओं का दान (लघुकथा)

duaaon ka dan (laghukatha)

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।