दो-दो वेलेंटाइन डे मनाऊंगा

लोग तो एक ही वेलेंटाइन डे मनाने को तरसते हैं,
मैं दो-दो वेलेंटाइन डे मनाऊंगा,
खुश होना तो अपने हाथ में हैं,
मैं जी भर खुशियां मनाऊंगा.

मां ने मुझको जन्म दिया है,
पाल-पोसकर बड़ा किया है,
मेरी हर इच्छा पर उसने,
अपने को कुर्बान किया है.
एक गुलाब माता को देकर,
‘वेलेंटाइन डे’ मनाऊंगा,
प्रेम से उससे गले मिलूंगा,
आशीष उसकी पाऊंगा.

टीचर मेरी बहुत ही अच्छी,
ज्ञान-पिटारा देती है,
रोज नया कुछ हमें सिखाकर,
उसकी परीक्षा लेती है.
एक गुलाब टीचर को देकर,
‘वेलेंटाइन डे’ मनाऊंगा,
उसकी आंखों की चमक देखकर,
आशीष उसकी पाऊंगा.

लोग तो एक ही वेलेंटाइन डे मनाने को तरसते हैं,
मैं दो-दो वेलेंटाइन डे मनाऊंगा,
खुश होना तो अपने हाथ में हैं,
मैं जी भर खुशियां मनाऊंगा.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।