आया बसंत ( कविता )

💐आया बसंत 💐
————————–
मन में लिए खुशियाँ अनंत
आया बसंत , आया बसंत
जो ठूँठ पड़े थे , कुदरत ने
नव पल्लव से श्रृंगार किया
थी सुप्त पड़ी इस धरती पर
नव जीवन का संचार किया

झूले कलियों पर भ्रमर दल
भँवरों ने फिर नव गान किया
कलियों ने झूम के डाली पर
अपना मोहक मुस्कान दिया
खग दल आ बैठे ,खोतों में
करते कलरव गाते अनंत
मन में लिए खुशियाँ अनंत
आया बसंत , आया बसंत

कर नमन शारदे माता को
साहित्य सृजित हो नव अनंत
अज्ञान के अँधियारे जग में
चमकें नव ज्ञान विचारवंत
साहित्य दिखाए नित अनंत
पथ ज्ञान ,सुख और साधन का
अज्ञान , लोभ , मद , मोह लोप हो
बज उठे सत्य का अब डंका
सबको हो मुबारक ये शुभ दिन
खुशियाँ मिलें सबको अनंत
मन में लिए खुशियाँ अनंत
आया बसंत , आया बसंत

💐💐💐💐💐💐💐बसंत पंचमी की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं ! 💐💐💐💐💐💐💐

परिचय - राजकुमार कांदु

मुंबई के नजदीक मेरी रिहाइश । लेखन मेरे अंतर्मन की फरमाइश ।