पुलवामा हमले के बाद विरोधी दलों का रवैया शर्मनाक

पुलवामा में आतंकी हमले के सात दिन बीत चुके हंै। पूरा देष लगातार धैर्य व आक्रोष तथा बैचेनी सहित निराषा के भावों के साथ भारत की ओर से की जाने वाली बदले की कार्यवाही का इंतजार कर रहा है। टी वी चैनलों व सोषल मीडिया में भी इंतजार किया जा रहा है कि कब, कैसे, कहां और कितने बजे हमारी सेना देष को एक बहुत बड़ी जोषभरी खुषखबरी सुनाती है। लेकिन जब समय लंबा होता जाता है तब विरोधी दलों का रवैया भी सामने आने लगता है। यह भारत है जहां हर बात को लेकर केवल विकृत बयानबाजियां षुरू हो जाती हैं।
सात दिनों के लंबे इंतजार के बाद कांग्रेस ने अपने चिरपरिचित अंदाज में बयानबाजी षुरू कर दी है। जम्मू कष्मीर की पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को एक और मौका देना चाह रही हैं। हर हमले के बाद पाकिस्तान एक बार फिर अपनी धूर्तता से बाज नहीं आ रहा है तथा वह केवल सबूत मांगने लग जाता है और भारत पर परमाणु हमले की धमकी देने लग जाता है। जिस समय कांग्रेस पार्टी व अन्य सभी दलों को एक स्वर से पाकिस्तान के खिलाफ खुलकर हमला बोलना चाहिये था उस समय विरोधी दल केंद्र सरकार , भाजपा व संघ पर हमलावार हो रहे हंै। पुलवामा हमले के बाद जब पूरे देष में गुस्से की लहर दौड़ रही थी उस समय तमिल फिल्म अभिनेता से राजनेता बने कमल हासन ने जम्मू कष्मीर में अमेरिका के पुराने प्रस्ताव के आधार पर ही जनमत संग्रह कराने की मांग करके आग में घी डालने का काम कर डाला। उसके बाद आगामी लोकसभा चुनावों में पीएम मोदी से लड़ने के लिये बैचेन हो रही बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कह डाला कि आखिर लोकसभा चुनावों के कुछ समय पहले ही पुलवामा में हमला क्यों हो जाता है ? एक प्रकार से परोक्ष रूप से वह कंेद्र सरकार व देष की खुफिया एजेंसियों पर साजिष रचने का आरोप लगा रहीं थी।
यही बात उत्तर प्रदेष की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती व सपा मुखिया अखिलेष यादव भी कहने लग गये हैं। कांग्रेस पार्टी अपनी ही बयानबाजी में फंसती नजर आ रही है। कांग्रेस का कहना है कि जब पुलवामा में आतंकी हमला हो रहा था उस समय पीएम मोदी झील में षूटिंग करवा रहे थे। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला अपनी जीेंद विधानसभा में पराजय से अभी तक उबर नहीं पा रहे हैं तथा अब उन्होंने पीएम मोदी को बदनाम करने के लिये एक ऐसा अस्त्र लेकर आ गये जो खुलते ही फ्यूज हो चुका है। पुलवामा हमला 14 फरवरी को हुआ था जबकि पीएम मोदी एक माह पहले ही षांति का संदेष देकर डल झील से आ गये थे तथा यह जो पुलवामा का हमला हुआ है यह मोदी जी की ऐतिहासिक ढंग से सफल रही जम्मू कष्मीर यात्रा का परिणाम है। आतंकवादी संगठन इस समय पूरी तरह से दबाव में आ चुके थे तथा वह एक बड़ी घटना को अंजाम देने के लिये बौखलाये हुये थे। अब कहीे जाकर आतंकवादी अपनी वीभत्स व कायरना हमले को अंजाम तक पहुचाने में सफल हो सके है।
आतंकवादियों व आतंकवाद के समर्थकों पर सेना का दबाव लगतार बढ़ रहा था। जम्मू कष्मीर में पंचायत चुनाव काफी सफलतापूर्वक संपन्न कराये गये थे। जिससे आतंकी संगठन काफी चिढ़े हुए थे। साथ ही देष की खुफिया एजेंसियों ने अभी पुलवामा से भी बढ़े आतंकी हमलों के लिये नये सिरे से खुफिया एलर्ट जारी किया है ।
देष में विरोधी दलों ने अब पूरे मामले का राजनैतिक करण करना षुरू कर दिया है। आज कष्मीर घाटी में जो कुछ हो रहा है इसके लिये कांग्रेस व जम्मू कष्मीर के नेषनल कांफ्रेंस व महबूबा मफ्ती जैसे नेता व दल ही जिममेदार हैं। पत्थरबाजांे के समर्थन मंे राज्य के सभी सेकुलर दल उतर आते हैं तथा अदालतों में सेना व सीआरपीफ के जवानों के खिलाफ मुकदमे तक हो जाते हैं। कष्मीर घाटी के अलगाववादी र्हुिर्रयत नेताओं को सबसे अधिक यदि किसी ने प्यार दिया था और उन्हंें पाकिस्तान जाने की इजाजत देने की मांग का समर्थन सबसे अधिक पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारें व स्थानीय क्षेत्रीय दल ही करते रहे हैं। जम्मू कष्मीर कांग्रेस के नेता गुलाम नवी आजाद हुर्रियत के सबसे बड़े पैरोकार रहे हैं। जब कंेद्र व राज्य में उनकी सरकारें थीें तब गुलाम नवी आजाद सहित कई कांग्रेसीे नेता हुर्रियत नेताओं के साथ कष्मीर समस्या के समाधान को खोजने के लिये उनके साथ बैठकें करते थे तथा अपनी तस्वीरंे खिचवाते थे।
कांग्रेस पार्टी व यूपीए की सरकारांे ने मुम्बई बम धमाकों व 26/11 हमले के बाद क्या कार्रवाई की थी तथा उसके क्या परिणाम निकले थे, यह पूरे देष को अच्छी तरह से याद है। आज अगर मुम्बई हमलों का गुनाहगार दाऊद इब्राहीम पाकिस्तान में मलाई काट रहा है और भारत के खिलाफ लगातार साजिषें रच रहा है उसके पीछे कांग्रेस पार्टी की सेकुलर नीति ही है। आज जो लोग जम्मू कष्मीर को विषेष राज्य दर्जा व धारा-370 को हटाने की मांग टी. वी. चैनलों पर कर रहे हैं उन सभी लोगों को वास्तव में यह मांग कांग्रेस पार्टी व तमाम सेकुलर दलोें से करनी चाहिये । आज जम्मू कष्मीर में धारा 370 की आड़ में अलगाववाद व पाक परस्ती को ही बढ़ावा मिल रहा है । यह मोदी सरकार है जिसने हुर्रियत के 22 नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था व सरकार की सहायता को वापस करने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। र्हुिर्रयत नेताओं को यह सुरक्षा व्यवस्था भी गुलाम नवी आजाद व फारूख अब्दुल्ला तथा पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती की देन है। यदि आज राज्य में अलगावावादी नारे लग रहे हैं तथा कष्मीर का तालिबानीकरण करने का जो प्रयास किया जा रहा है विषेषकर कांग्रेस पार्टी द्वारा पोषित हुर्रियत नेता ही अधिक जिम्मेदार है। यही लोग पत्थरबाजी करवाते हैं तथा यही लोग कष्मीर में आई एस आई व पाकिस्तान का झंडा भी फहराते है। सीमा पार कड़ी कार्यवाही से पहले देष के अंदर घुसे बैठे गददारों तथा देषद्रोहियों को पकड़ना जरूरी है।
जिस समय पूरा देष षहीदों की षहादत पर खून के आसूं रो रहा था तथा सोषल मीडिया पर षहीदों को श्रद्धांजलि दी रही थी उस समय भी कम से कम छह हजार लोग सोषल मीडिया पर भारत विरोधी गतिविधियों में संलग्न थे तथा षहीदांे के प्रति सांत्वना देने के बजाय येन केन प्रकारेण तथाकथित षहरी नक्सलवादी आग में घी डालने वाल बयान ही पोस्ट कर रहे थे। अब तक जितने लोगों को सोषल मीडिया में देष विरोधी पोस्ट करने के लिये हिरासत में लिया गया है वह अधिकांष मुस्लिम ही निकले आखिर क्यों ? क्या इन सभी लोगों को परोक्ष रूप से कांग्रेस व सेकुलर दलों तथा षहरी नक्कसलवादियों का समर्थन हासिल था ?ष्आज भाजपा व संघ तथापीएम नरेंद्र मोदी से सवाल पूछने और उन पर आरोप लगाने की बजाय तमाम सेकुलर ताकतांे को अपाने गिरेबान में झांककर देखना चाहिये कि आज कष्मीर के लगातार बिगड रहे हालातों के लिये कौन- कौन से दल व तत्व जिम्मेदार है। बयानबाजियों से सेना का मनोबल ऊंचा नहीं होगा अपितु गिरेगा ही।

— मृत्युंजय दीक्षित