युद्ध की रणनीति

कोई भी लड़ाई जीतना हो तो क्या चाहिये-

1)रणनीति एवं शौर्य —
इसमें हमारी सेना का कोई मुकाबला नही। अपने अद्भुद पराक्रम,त्याग एवं बलिदान से हमारी सेना ने बार बार दुश्मनों को धूल चटाई है।ऐसी महान सेना को बार बार नमन।

2) कुशल राजनैतिक नेतृत्व-
अत्यंत पराक्रमी सेना होते हुये भी यदि राजनैतिक नेतृत्व पंगु है तो कोई भी युद्ध नही जीता जा सकता। यही सेना हमारे पास 26/11 के मुंबई अटैक के समय भी थी।लेकिन बेहद कमजोर और डरपोक सरकार के कारण हम मात्र घाव सहलाते रह गये। हमने न केवल लगभग 200 नागरिकों की दुखद मौत को देखा अपितु लगातार आये दिन शहर शहर में आतंकी बम विस्फोट से न जाने कितने निर्दोष भाई बहन मौत की गोद में सो गये। इसलिये कुछ मूर्खों द्वारा ये प्रचार कि हम सेना के साथ है सरकार के साथ नही ये देश को कमजोर करने की साजिश ही है। लोकतंत्र में बिना सरकार कुछ नही हो सकता।

3) कूटनीति-
महाभारत के युद्ध में यदि कृष्ण की कूटनीति न होती तो धर्मराज युधिस्ठिर पहले ही दिन हार कर जंगलों में अपमानित जीवन बिता रहे होते।यही बात आज समझने की है। आज आप कितने भी सही हों दुनियां में भी आपको सही समझना जरूरी है।दुश्मन को अलग थलग करना, मित्र देशों को अपने पक्ष में और अधिक सक्रिय करना, विरोधियों को Neutral करना इस कूटनीति के हिस्से हैं।
आप देखेंगे कि वर्तमान समय में मोदी सरकार की कूटनीति इस पैमाने पर पूरी तरह सफल है।जैसे ही दुनिया के बड़े देश हमारे पक्ष में सक्रिय हुये आधे से ज्यादा दुश्मन की कमर उसी समय टूट गयी तथा वहां की जनता में डर एवं निराशा छा गयी।

4)देश की जनता का मनोबल-
किसी भी लड़ाई में मनोविज्ञान का बड़ा महत्व होता है। देश विरोधी गद्दार ऐसे समय तरह तरह की अफवाह फैला कर जनता में panic  creat कर अफरा तफरी मचाने का कुचक्र रचते हैं। ये बेहद खतरनाक होता है। और यदि कहीं Panic बड़े नेताओं के चेहरों पर आ गया तो जीती हुयी लड़ाई भी हार सकते हैं।
इसलिये आपने देखा होगा कि पुलवामा अटैक के बाद एवं बाद में रात भर बदले की मॉनिटरिंग करने के बावजूद मोदी जी बिलकुल सामान्य नजर आ रहे थे। इसी रणनीति के तहत उन्होंने लगभग सभी कार्यक्रमों में सिरकत की।पाकिस्तान की जनता में इस कारण और भी डर बैठता जा रहा है।
फिर भी जनता में किसी भी तरह का कोई डर, रियूमर फैलाने में कोई गद्दार सफल न हो यह हम सबको देखना है। लगातार सावधान रहना होगा।

5) दूर दृष्टि,पक्का इरादा,अविचल लक्ष्य –
युद्ध में नुकसान दोनों तरफ होता है। इसलिये कभी विचलित न होते हुये अपने बड़े लक्ष्य पर ही केंद्रित रहना होगा। आगे पीछे की लंबी योजना बना कर तदनुसार तैयारी।किसी भी आपद स्थिति हेतु तैयार रहना। कहावत भी है- Hope for the Best n prepare for the worst.

6)जनता का साथ –
जनता का यदि साथ न मिले तो कोई भी शक्ति बेकार हो सकती है।ऐसे समय जनता अपनी सेना व सरकार के साथ चट्टान की तरह खड़ी हो तभी सरकार में भी कठोर व बड़े निर्णय लेने की हिम्मत आती है।

ख़ुशी की बात है कि इस समय मोदी जी के साथ जनता व ईश्वर की कृपा दोनों है। अत: जीत निश्चित है।
भारत माता की जय। वन्दे मातरम।

— गोविन्द