तांडव

जैसे ही तृप्ति ने मुस्कुराती हुई बिना बालों वाली खूबसूरत दुल्हन का समाचार देखा, तृप्ति पहले तो उसे देखती ही रह गई. वह मुस्कुराहट ओढ़ी हुई मुस्कुराहट नहीं थी, मासूम मन की मासूम मुस्कुराहट लग रही थी. ब्रेस्ट कैंसर से फ्री होने के बाद लिवर और रीढ़ की हड्डी का कैसर! लगातार पांच साल के इलाज और कीमोथेरपी के बाद बाल भला कहां बच सकते थे! इतने बड़े तांडव के बाद भी इतनी मासूम मुस्कुराहट! मलयेशिया की दुल्हन वैष्णवी की तस्वीर देखते-देखते तृप्ति अपनी तस्वीर में खो गई.
उसे भी तो इस तांडव से दो-दो हाथ करने पड़े थे न! हमेशा से भारतीय परिधान की दीवानी तृप्ति कभी बनारसी साड़ी और कभी कामदार सलवार-सूट में सजने वाली खूबसूरत गुड़िया-सी लगती थी. आज उसने पाश्चात्य परिधान के साथ सिर पर हैटनुमा टोपी को मुस्कुराहट के साथ अपना लिया था, ताकि हर किसी को अपनी दास्तां बयां करने के दर्द से बच जाए. पर उसे क्या सिर्फ इसी तांडव से जूझना पड़ा था? किस-किस तांडव को गिनाए?
भले ही नैन-नक्श खूबसूरत हों, पर रंग सांवला हो तो लड़की की शादी में मुश्किल आना स्वाभाविक-सा हो गया है. किसी तरह शादी हुई, तो फिर संतान होने में देरी पर सासू मां का तांडव भी कोई कम नहीं था. वह भी हुआ फिर सासू मां का गंभीर रूप से बीमार होना और सब बहुओं के किनारा कर जाने पर सारा बोझ उस पर आना भी किसी तांडव से कम कहां था? सासू मां की सेवा कर उन्हें अंतिम विदाई देकर सांस भी नहीं ली, कि ननदें घर-द्वार में अपने हिस्से की मांग पर अड़ गईं. ससुर जी ऐसी वसीयत जो कर गए थे! उस तांडव को भी वह सहजता से झेल गई थी. नाम के अनुरुप जितना कुछ हिस्से में आया, उसी में उसने तृप्ति की खोज कर ली थी.
अभी एक और तांडव उसकी प्रतीक्षा में था. उसने सपने में भी नहीं सोचा था, कि मात्र शारीरिक कमजोरी के कारण ब्लड टेस्ट करवाने जाने पर उसे डॉक्टर्स ब्रेस्ट कैंसर का मरीज घोषित कर देंगे. कैंसर का अर्थ ही था कीमोथरेपी करवाना और कीमोथरेपी का सीधा संबंध बाल उड़ जाने से था. शिक्षित होने के कारण इन सब नतीजों से वह वाकिफ़ थी, फिर भी अपनी इच्छा शक्ति के बलबूते पर सुशिक्षित होने का प्रमाण वह अपनी मासूम मुस्कुराहट के रूप में दे पाई.
यही इच्छा शक्ति आज भी उसकी मासूम मुस्कुराहट कायम रखने और तांडव झेलने का संबल बनी हुई है.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।