गीतिका/ग़ज़ल

“कुछ पता नहीं”

इंसान तो दिखते हैं इंसानियत का कुछ पता नहीं
मासूम तो लगते हैं मासूमियत का कुछ पता नहीं

समाज सेवक उग आये हैं गलियों और मोहल्लों में
दिल के अंदर क्या है इनके नीयत का कुछ पता नहीं

भीड़ का क्या है भीड़ तो सिर्फ जज्बाती होती है
किसके बहकाने से बहकेगी जम्हूरियत का कुछ पता नहीं

कल तक हाथ मिलाने वाले छुरा पीठ में घोपते हैं
किस ओर हवा बह जाएगी सियासत का कुछ पता नहीं

ज्ञान की बातें करते हैं सब अच्छी बातें करते हैं
मौका देख कब जग जाएगी हैवानियत का कुछ पता नहीं

परिचय - राजेश सिंह

पिता. :श्री राम चंद्र सिंह जन्म तिथि. :०३ जुलाई १९७५ शिक्षा. :एमबीए(विपणन) वर्तमान पता. : फ्लैट नं: ऐ/303, गौतम अपार्टमेंट रहेजा टाउनशिप, मलाड (पूर्व) मुंबई-400097. व्यवसाय. : मुख्य प्रबंधक, राष्ट्रीयकृत बैंक, मुंबई मोबाइल. :09833775798/08369310727 ईमेल. :raj444singhgkp@gmail.com

Leave a Reply