गीत – उर-वेदना

पास उर के मेरे है , मेरी वेदना ।
आँसुओं से सनी है मेरी कल्पना।

हाय संदेह के विष से सींची गई,
सूखती ही गई बेल विश्वास की ।
भक्ति कैसी की, जब आस्था ही नही?
भक्ति की आस्था भी वृथा नाश की।

हाय! रुक जाओ,न सूख जाये लता
निर्दये ! तुमसे है यह मेरी याचना ।
पास उर के…………

अश्रु का मोल तुम क्या करोगे सखे ?
तुमने पीड़ा के फल को चखा ही नही।
तुम मेरे दुख को अपना समझते ही क्यों,
तुमनें अपनों में मुझको रखा ही नही ।

क्रोध की आग में भाव सब जल गये,
शून्य होती गई तेरी संवेदना ।
पास उर के मेरे………………

मेरे किरदार पे तुमनें शक भी किया,
उंगलियाँ मेरी छवि पे उठाते रहे ।
बात से घात उर पे किया आपने ,
घाव पे घाव फिर दोहराते रहे ।

इस तरह मेरा अंतस दुखाओ न तुम,
ग्लानि में मुझको साँसे पड़ें थामना।
पासे उर के…………………..

डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी

परिचय - डॉ दिवाकर दत्त त्रिपाठी

नाम डॉ दिवाकर दत्त त्रिपाठी आत्मज श्रीमती पूनम देवी तथा श्री सन्तोषी . लाल त्रिपाठी जन्मतिथि १६ जनवरी १९९१ जन्म स्थान हेमनापुर मरवट, बहराइच ,उ.प्र. शिक्षा. एम.बी.बी.एस. पता. रूम न. ,१७१/१ बालक छात्रावास मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज इलाहाबाद ,उ.प्र. प्रकाशित पुस्तक - तन्हाई (रुबाई संग्रह) उपाधियाँ एवं सम्मान - साहित्य भूषण (साहित्यिक सांस्कृतिक कला संगम अकादमी ,परियावाँ, प्रतापगढ़ ,उ. प्र.) शब्द श्री (शिव संकल्प साहित्य परिषद ,होशंगाबाद ,म.प्र.) श्री गुगनराम सिहाग स्मृति साहित्य सम्मान, भिवानी ,हरियाणा अगीत युवा स्वर सम्मान २०१४ अ.भा. अगीत परिषद ,लखनऊ पंडित राम नारायण त्रिपाठी पर्यटक स्मृति नवोदित साहित्यकार सम्मान २०१५, अ.भा.नवोदित साहित्यकार परिषद ,लखनऊ इसके अतिरिक्त अन्य साहित्यिक ,शैक्षणिक ,संस्थानों द्वारा समय समय पर सम्मान । पत्र पत्रिकाओं में निरंतर लेखन तथा काव्य गोष्ठियों एवं कवि सम्मेलनों मे निरंतर काव्यपाठ ।