सूरजमुखी फूल

अभी-अभी सुरेंद्र को बैंक में पदोन्नति की सूचना मिली थी. वह खुशी से फूला नहीं समा रहा था. उसी खुशी ने उसको स्मृतियों को ताजा कर दिया था.
सुरेंद्र बैंक की विभागीय परीक्षा पास करके पदोन्नति पाने का आकांक्षी था, पर परीक्षा की पेचीदगी के बारे में सुनकर वह भयभीत भी था. तभी उसने एक महान व्यक्ति रॉब का एक कथन पढ़ा-
”मैं एक गायक और गीतकार हूँ, अगर मैं ये काम नहीं कर रहा होता हूँ तो मैं एक मुरझाये हुए फूल की तरह हो जाता हूँ और जब मैं ये काम कर रहा होता हूँ तो मैं एक छह फीट ऊँचे सूरजमुखी के फूल की तरह खिल जाता हूँ.”
इसे पढ़ते ही सुरेंद्र ने भी सफलता के लिए सूरजमुखी फूल बनने का इरादा कर लिया था.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।