हौसले की शमा

”हौसला है तो हम हैं, हौसले की शमा जलाए रखिए,
ये वो रोशनी है, जिसे तेल-बाती की दरकार नहीं.”
हौसले की यही शमा कृष्णा नगर, दिल्ली के एक 70 वर्षीय बुजुर्ग और उनकी पत्नी ने जलाए रखी, जिससे उनका खोया हुआ सम्मान तो वापिस मिला है, बैंक को सजा भी मिली.
”आपके साथ ऐसा क्या हुआ, जिससे आपके सम्मान को ठेस पहुंची?” 70 वर्षीय बुजुर्ग से हमने जानना चाहा.
”अजी कुछ न पूछिए, अब तो बैंक भी आंख बंद करके काम करने लगे हैं.” बुजुर्ग सम्मान को ठेस पहुंचने के अतिरिक्त कन्ज्यूमर फोरम के 2 साल चक्कर लगाने पर भी झल्लाए हुए-से थे.
”भाई साहब, शांत हो जाइए, लीजिए पानी पीजिए.” हमने उन्हें पानी का गिलास देते हुए कहा.
”शुक्रिया जी, बड़ी लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी है मुझे समाज में अपने सम्मान बचाने के लिए, मैं आपको संक्षेप में बता रहा हूं.”
”संक्षेप में ही बताइए, वैसे भी इतनी लंबी लड़ाई में बार-बार आपको अपना पक्ष रखने के लिए बहुत कुछ बोलना-बताना पड़ा होगा.”
”सही समझा आपने. हुआ यह कि मैं 25 जनवरी 2017 को अपने पीएनबी के सेविंग अकाउंट से चेक के जरिए 490 रुपये बिजली का बिल भरने के लिए गया था. उससे पहले मैंने अपना अकाउंट चेक कर लिया था, उसमें पर्याप्त धनराशि थी. बैंक की गलती से मुझे दो बार चेक बाउंस के चलते पेनल्टी झेलनी पड़ी. मेरे अकाउंट में 6 लाख से ज्यादा राशि थी, फिर भी ऐसा होना और मुझ पर 890 रुपये का जुर्माना लगना मेरे साथ बहुत बेइंसाफी थी. इस बेइंसाफी से मेरे सम्मान कि ठेस लगी थी. मेरी पत्नी भी मेरा यह असम्मान सहन न कर सकी, उसने कन्ज्यूमर फोरम में यह कहते हुए शिकायत दी कि उन्हें 890 रुपये की पेनल्टी से ज्यादा अफसोस समाज में अपनी बेइज्जती को लेकर हुआ है.” बुजुर्ग ने पानी का एक घूंट पिया.
”2 साल की लंबी लड़ाई के बाद कन्ज्यूमर फोरम ने बैंक को 890 रुपये, शिकायत वाले दिन के हिसाब से 9 प्रतिशत ब्याज समेत चुकाने को कहा, साथ ही 10 हजार रुपये मुआवजे के रूप में दिलाने के निर्देश दिए, जिसमें मुकदमे का खर्च भी शामिल है.”
”वास्तव में आपने हौसले की शमा जलाए रखकर समाज को भी एक अप्रतिम संदेश दे दिया है, कि चुपचाप अन्याय को सहना अन्याय करने से बदतर है. सारा समाज आपको नमन करता है.”
”खुश रहो बेटा.” बुजुर्ग के आशीर्वाद ने हमारे हौसले की शमा को भी रोशन कर दिया था.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।