छोटी-सी भूल

अभी-अभी अनुषा का छोटा-सा मैसेज आया था- ”आंटी जी, बहुमूल्य परामर्श के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया, मेरा माइग्रेन अब ठीक हो गया है.”
स्मृति पर जोर डाला, लेकिन कौन-सी परामर्श की बात कह रही थी अनुषा, याद नहीं आ रहा था. उससे मिले भी 2 साल हो गए. इस बीच उससे कोई संवाद भी तो नहीं हुआ. बहुत याद करने पर याद आया.
उस दिन हमारे यहां लंच पार्टी पर 30 लोग आने थे. पिछले दिन से तैयारियां चल रही थीं. सुबह से सब काम में लगे हुए थे. अनुषा भी लगी हुई थी. शाम को 5 बजे सब चले गए. हमने सब सामान समेटना शुरु कर दिया. अनुषा कहीं दिखाई नहीं दी. बाद में पता चला उसके सिर में दर्द है. उसने रात को खाना भी नहीं खाया. सुबह सब स्कूल-ऑफिस चले गए, अनुषा देर तक सोती रही थी. 12 बजे वह उठकर आई.
”कैसी है तबियत अनुषा?” मैंने पूछा था.
”आंटी जी, सिर दर्द हो रहा था, अब कुछ ठीक है.” वह बोली.
”सिर दर्द है या माइग्रेन!”
”आंटी जी, माइग्रेन है.”
”इतनी-सी उम्र में माइग्रेन!” मुझे हैरानी हुई थी.
”जी आंटी जी, ममा को भी होता है.”
”एक बात बताओ, कल इतनी गर्मी थी, दोपहर में नहाने गई थी, कैसे नहाया था?”
”आंटी जी, बस शावर खोलकर उसके नीचे खड़ी हो गई, जब तक ठंडक नहीं पड़ी.”
”सीधे सिर पर पानी डाल दिया होगा.” मैंने पूछा.
”जी आंटी जी, मैं ऐसे ही करती हूं.”
”बस, यहीं मात खा गईं. अचानक सिर पर पानी डालने की वजह से सिर की नलिकाएं सिकुड़ने से या रक्त के थक्के जमने से ब्लड सर्कुलेशन ठीक से नहीं होता. जिससे सिर दर्द, माइग्रेन, लकवा व ब्रेन हेमरेज जैसी समस्याएं खड़ी हो जाती हैं.”
”आंटी जी, मैं आगे से बहुत ध्यान रखूंगी, ममा को भी बता दूंगी.”
शायद इसी छोटी-सी भूल को उसने सुधार लिया था.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।