लघुकथा

पालतू श्वानों का हवाला

आज एक समाचार पढ़ा-
”नीरव मोदी की जमानत के लिए दिया गया उनके पालतू कुत्तों का हवाला.
नीरव के वकील ने जज को बहुत सारे तर्क दिए ताकि उसे बेल मिल जाए. वकील ने कहा, उनका बेटा स्कूल में पढ़ता था जो अब यूनिवर्सिटी में गया है. मोदी के घर में पालतू श्वान भी हैं जिनकी देखभाल करनी पड़ती है, इसलिए देश से बाहर जाना उनके लिए बहुत मुश्किल है.”
चीफ मैजिस्ट्रेट एमा ऑर्बथनॉट ने पालतू श्वानों के तर्क को बेमानी और फालतू की बात मानते हुए 48 साल के नीरव मोदी को जमानत देने से इनकार कर दिया.
इस समाचार ने हमें कई साल पुराने पड़ोसियों की याद दिला दी. उनके पास 19 श्वान थे. उन श्वानों की देखभाल करना, खिलाना-पिलाना-घुमाना आदि के साथ उन्हें बॉल के अनेक खेल सिखाना भी उनकी दिनचर्या में सम्मिलित था. फुटबॉल तो वे श्वान ऐसे खेलते थे, मानो मंझे हुए खिलाड़ी हों. उनका आपस में भी मैच होता था और दूसरे श्वानों के साथ भी. जाने कैसे वो उन सबकी देखभाल कर पाते थे, यह आश्चर्य की बात है.
श्वानों का नियमित मेडीकल चेक अप भी होता था, उनको टीके भी लगवाए जाते थे. उनको विभिन्न भाषाएं सिखाई जाती थीं. हो सकता है उनका कोई श्वान किसी फ्रेंच नागरिक को पसंद आ जाए, तो उसका फ्रेंच भाषा में प्रशिक्षित होना आवश्यक है.
पालतू श्वानों का लालन-पालन कितना भी मुश्किल क्यों न हो, हमारे पड़ोसी अपने पालतू श्वानों की समझदारी की तारीफ़ करते नहीं थकते थे. आखिर वे उनके परिवार के सम्माननीय सदस्य जो हुए! बहरहाल उन्होंने पड़ोसियों की सुरक्षा या किसी भी अन्य बात के लिए अपने पालतू श्वानों का हवाला कभी नहीं दिया था.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

4 thoughts on “पालतू श्वानों का हवाला

  1. लीला बहन , नीरव को देख कर मुझे लगता है की मैं उस से ज़िआदा सुखी हूँ, क्मज्क्म बेफिक्र हो कर सोता तो हूँ . इतना धन कमाने के बाद भी उस को हेरा फेरी करने की जरूरत पढ़ गई, अब बहानेबाजी तो बच्चों जैसी हो गई!
    गुनाह कबूल कर ले कुछ असान हो सकता है क्योंकि सजा तो अब होनी ही है .अब यह भी कर के देख ले, “सुख भरे दिन बीते रे भैया, अब दुःख आइओ रे “

    1. प्रिय गुरमैल भाई जी, आपने बिलकुल दुरुस्त फरमाया है. यह बहानेबाजी तो बच्चों जैसी हो गई!
      गुनाह कबूल कर ले कुछ आसान हो सकता है क्योंकि सजा तो अब होनी ही है. अब यह भी कर के देख ले, “सुख भरे दिन बीते रे भैया, अब दुःख आयो रे “ बहुत मजेदार प्रतिक्रिया लिखी है आपने.
      इतने त्वरित, सार्थक व हार्दिक कामेंट के लिए हृदय से शुक्रिया और धन्यवाद.

  2. आदरणीय दीदी, सादर प्रणाम. काश पालतू श्वानों की भाषा नीरव समझ पाते. जब उन्हें मालूम हुआ होगा कि उनके स्वामी ने क्या क्या किया है और अदालत में उनके कंधे पर रखकर बन्दूक चलाने की कोशिश की है तो वे भी अपने स्वामी से मुक्ति चाहने लगे होंगे. कम से कम श्वानों से ही नीरव कुछ सीख ले और प्रायश्चित कर लें. युधिष्ठिर और उनके श्वान का प्रसंग भी अधिकतर सभी को मालूम होगा जिसमें वे उसे अपने साथ स्वर्ग ले जाना चाहते थे. युधिष्ठिर कथा में पूर्ण विवरण है. वर्तमान घटना आपकी रचनात्मकता के दर्शन कराती है.

    1. प्रिय ब्लॉगर सुदर्शन भाई जी, आपने बिलकुल दुरुस्त फरमाया है. सीखने वाला किसी से भी सीख सकता है. विडंबना देखिए- ”नीरव के वकील के विरोध में क्राउन प्रॉसेक्यूशन सर्विस ने कहा कि नीरव मोदी के भागने का डर है और अगर उसे जमानत दी गई तो वह सबूत मिटाने का भी काम कर सकता है.” ब्लॉग पर समय देने व प्रतिक्रिया करने के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया.

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