पर्यावरण

हाथी (ELEPHANT)

हाथी ‘ एक ऐसा शब्द है, जिसे सुनते ही मानव बालमन के मनमस्तिष्क में एक अकल्पनीय रूप से बड़े, काले, सभ्य, सुसंस्कृत जीव जो अपने महावत के आदेशों का पालन करता हुआ, झूमता हुआ, मस्ती भरे चाल में, सजा-धजा चला जा रहा होता है, जिसे उत्सुकता पूर्वक देखने की ललक बच्चों से लेकर बड़ों तक […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य – लातों के भूत बातों से नही मानते हैं

यह कहावत तो आपने सुनी ही होगी लेकिन हकीकत यह है कि यह कहावत पाकिस्तान जैसे दो कौड़ी के देशों के लिए ही बनी हुई है जो चंद सुअर के बच्चों को अपना बाप बनाए बैठा है’। और हकीकत भी यही है कि यह कहावत चरितार्थ होती है “पाकिस्तान जैसे देश पर कोई कितना भी […]

कविता

कविता

यूँ ही हवाओं में उड़ते हुए अक्षरों को अपनी मुट्ठी में पकड़ कर एक अक्षर तुम ले आओ, एक अक्षर मैं ले आऊं और एक अल्फाज बनें. अपने मन की मिट्टी में संभावनाएं उगाकर एक पंख तुम लाओ एक पंख मैं लाऊँ और एक परवाज़ बनें. कुछ पुराना छोड़ के कुछ नया जोड़ के नियति […]

कुण्डली/छंद

मुकरियाँ

खरी खरी वह बातें करता । सच कहने में कभी न डरता । सदा सत्य के लिए समर्पण। क्या सखि ,साधू ? ना  सखि, दर्पण । हाट दिखाये , सैर कराता । जो चाहूँ वह मुझे दिलाता । साथ रहे  तो रहूँ सहर्ष । क्या सखि, साजन ?  ना सखि , पर्स । जब देखूं […]

इतिहास

भारत की प्रथम महिला राज्यपाल सरोजिनी नायडू

भारत भूमि कर्म की पुण्य धरा है। यह साहित्य, शिक्षा, संस्कृति, संगीत, कला, ज्ञान-विज्ञान की जननी है और पोषक भी। यहां जीवन के विविध क्षेत्रों में जहां पुरुषों ने विश्व-गगन में अपनी सामथ्र्य की गौरव पताका फहराई है तो महिलाओं ने भी सफलता के शिखर पर अपने पदचिह्न अंकित किए हैं। सरोजिनी नायडू भारतीय राजनीति […]

कविता

हम हैं हिंदुस्तानी

जो सोचें वो करने की ठाने हैं हम। दुश्मन को पल में पहचाने हैं हम। यह देश है हमारा उफनती जवानी। सच्चे सपूत भू के  हम हैं हिंदुस्तानी। जर्रे जर्रे में ताकत भरी है हमारी। वीर जवानों की आज आवाज भारी। वतन के लिए देना  हमको कुर्बानी। सच्चे सपूत भू के हम हैं हिंदुस्तानी। नसों में […]

गीत/नवगीत

वतन की शान तिरंगा हमारा

न झुका न झुकेगा तिरंगा हमारा लहराये फिजां में तिरंगा हमारा। है वतन की शान तिरंगा हमारा यह विजयी विश्व तिरंगा हमारा। खड़ा हो हिमालय सा रक्षा करे दिखा आँख दुश्मन को ढेर करे। लहराकर वतन को उर्जित करे भारत की आँखों का तारा रहे। न झुका न झुकेगा तिरंगा हमारा लहराये फिजां में तिरंगा […]

गीत/नवगीत

सावन में बहारें

हर गुल खोया बुलबुल खोई अनजान सी ये पहचान हुई सावन में बहारें खुद झूमी पतझड़ में खुद वीरान हुई–!! कितने बादल छाकर लौटे कितने मेघों ने आह भरी होठों ने ओस की बूंदों से अपने भीतर की प्यास हरी इक पल की आस में उम्र मेरी नाजाने क्यों नादान हुई सावन में बहारें खुद […]

लघुकथा

एयर स्ट्राइक

पुलवामा हमले की तेरहवीं का दिन भी आ गया था, लेकिन शहीदों के परिवारों को किसी तरह से संतुष्टि मिलने की कोई संभावना नहीं दिखाई दे रही थी. सभी देशवासियों का मन भी मायूस -सा हो रहा था. सुबह-सवेरे अखबार खोला, तो ऐसी कोई खबर नहीं दिखाई दी, जिससे किसी सार्थक बदले की भावना दिखाई […]

कविता

माँ की कलम से

न जाने किसने ये कह दिया कि अपनेपन में “Thank you” या “sorry” नही कहा जाता आज मन किया कि तुम्हें sorry कह दूँ पर तुम्हें मुझसे ये सुनना पसन्द नही क्योंकि मैं तुम्हारी माँ हूँ ना फिर सोचा love you कहूँ पर जब अपने बीच कुछ ठीक नही हुआ होता है उस वक़्त तुम्हें […]