गीत/नवगीत

बेईमान नेताजी

ले लिए हमारे वोट,अब छाप रहे हैं नोट दे गए दिल पर चोट, बेईमान नेताजी चुनाव से पहले गलियों में गुंडों संग घूमा करते थे वोट की खातिर हर वोटर के चौखट चूमा करते थे ये करुंगा वो करूंगा वादे करते फिरते थे मुझे जिता दो मुझे जिता दो फरियादें करते फिरते थे अब जीत […]

हास्य व्यंग्य

पड़ोसन की मी टू

आजकल ‘मी टू’ का कहर किसी सुनामी से कम नहीं, जिसने हमारे जैसे किसी भी बेहद ही शरीफ और संवेदनशील मर्द के बच्चे को, जिसने कभी धोखे से भी स्कूल, कॉलेज या ऑफिस के दिनों में या अपने पास-पड़ोस या रास्ते में आते-जाते किसी खूब/कम सूरत/सीन बला/अबला को छू लिया हो, या घूर कर देख […]

लघुकथा

आक्रोश

“सर, आज न तो स्वतंत्रता दिवस है, न ही गणतंत्र दिवस, गांधी जयंती भी तो नहीं, फिर इधर ये देशभक्ति और शहीदों वाले गीत क्यों बजाए जा रहे हैं।” अनपढ़ से दिखने वाले लाइनमैन ने मुझसे पूछा। “सुना है आज नेताजी आ रहे हैं जनसंपर्क के लिए, चुनाव के संदर्भ में।” मैंने बताया उसे। “अच्छा…, […]

लघुकथा

फर्क

आखिरकार पापा ने अपनी प्रॉमिस पूरी कर दी। उन्होंने अपने इकलौते बेटे अमन से प्रॉमिस किया था कि यदि वह अपनी कक्षा में फर्स्ट आएगा, तो उसे गर्मी की छुट्टियों में एक दिन ऑफिस लेकर जाएँगे।रिजल्ट घोषित होने के दूसरे ही दिन वह अपने पापा के साथ ऑफिस पहुँच गया। वहाँ वह अपने पापा के […]

लघुकथा

पुनर्वास

पुनर्वास हार्ट अटैक का पहला झटका झेलने के दूसरे ही दिन रमाकांत जी की अपनी निजी पुस्तकालय की सभी पुस्तकें जिला ग्रंथालय को दान करने के फैसले से मालती चकित थी।लगभग पचपन साल पहले जब रमाकांत से उनकी शादी हुई थी, तब घर में यत्र-तत्र-सर्वत्र किताबें ही किताबें बिखरी पड़ी रहती थीं। शादी के बाद […]

कविता

अहम…!!

देखती हूँ अक्सर खुद को आईने में कितना दिखती हूँ अहम के दायरे से.. ख़ामोशी को लिए खुद से उलझती कितना समझती हूँ अहम के आईने से.. अपनों के करीब खुद को भूलती कितना तय करती हूँ अहम के फ़ासले से … गैरो की नज़र में खुद को सुनाती कितना मुस्कुराती हूँ अहम के साये […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

अपने को पहचानियों कि हम कौन हैं और हमारा उद्देश्य क्या है

ओ३म् क्या हम अपने आप को जानते हैं? इसका उत्तर यह हो सकता है कि हम अपने आप को पूरी तरह तो नहीं जानते परन्तु कुछ कुछ जानते हैं। कुछ कुछ जानने का तात्पर्य है कि हम अपने माता-पिता की सन्तान हैं, अमुक-अमुक गुरुओं व विद्यालयों में हमने शिक्षा प्राप्त की हुई है, अमुक तिथि […]

अन्य लेख

नाचिए-गाइए-खुशियां मनाइए

विश्व डांस दिवस पर विशेष कल यानी 29 अप्रैल को विश्व डांस दिवस था. आप सोच रहे होंगे कि हम विश्व डांस दिवस पर ब्लॉग क्यों लिख रहे हैं! आपका सोचना वाजिब है. हमारा कहना है कि ब्लॉग के लिए विषय की कोई बंदिश थोड़े ही है! तो जनाब विश्व डांस दिवस के बहाने नाचने-गाने-खुशियां […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ईश्वर है तो दिखाई क्यों नहीं देता?

ओ३म् हम मनुष्य है और हमारा जन्म हुआ है। मनुष्य की आयु पर विचार करें तो यह अनिश्चित होती है। कुछ ऐसे बच्चे होते तो जन्म लेते ही व गर्भ में ही मृत्यु का ग्रास बन जाते हैं और कुछ जन्म के बाद के वर्षों में किसी रोग व अज्ञात कारणों से मृत्यु को प्राप्त […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

गो अवध्य प्राणी है

ओ३म् हमारा यह संसार मनुष्यों सहित अन्यान्य प्राणियों से युक्त है। हमारा जीवन मुख्यतः वायु, जल, अन्न सहित गो दुग्ध पर निर्भर है। वायु परमात्मा की कृपा से सर्वत्र उपलब्ध होती है। जल भी नदियों, जलाशयों व भूमि में नलकूप से अथवा सरकारी जल-प्रबन्धन व्यवस्था से सुलभ हो जाता है। अन्न हमें किसानों से प्राप्त […]