हास्य व्यंग्य

मेरी डायरी : मेरा यथार्थ बोध

दिनांक:06.04.2019

दिल्ली के दो कड़क लौंडे के दिल सुविधा की सुहागरात मनाने के लिए मचल रहे थे लेकिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को यह ‘मधुचन्द्रिका’ मंजूर नहीं थी. इसलिए ‘मोहब्बत की झूठी कहानी’ पर विराम लग गया. अब दिल्ली के धूर्त मुख्यमंत्री केजरीवाल कांग्रेस को बेवफा कह रहे हैं. ‘क्या से क्या हो गया बेवफा (कांग्रेस) तेरे प्यार में’. यह धूर्त राजनेता भ्रष्टाचार मिटाने के लिए दिल्ली की धरती पर अवतरित हुआ था. केजरीवाल जितना धूर्त राजनेता अभी भी भारतीय राजनीति में कम हैं. अन्ना हजारे को सीढी के रूप में इस्तेमाल कर सत्ता के सिंहद्वार में प्रवेश करनेवाले केजरीवाल ने कहा था कि उनके पास शीला दीक्षित के खिलाफ हजारों पृष्ठों के साक्ष्य मौजूद हैं लेकिन चार वर्षों तक सत्ता की मलाई चाटते रहनेवाले दिल्ली के मुख्यमंत्री ने उन पृष्ठों का कभी विमोचन नहीं किया. चुनाव के समय अपनी निश्चित पराजय को देखकर ये कांग्रेस को ‘आ गले लग जा’ कह रहे थे कि लेकिन राहुल गाँधी को वरिष्ठ नेताओं ने समझाया कि इस पर “ऐतबार नहीं करना’. इस तरह केजरीवाल के लिए कांग्रेस ‘बैरी पिया’ हो गई और सुहागरात मानाने से पहले ही इनके गठबंधन की भ्रूण हत्या हो गई.

दिनांक:12.04.2019

छेनू को नया ठिकाना मिल गया है. अब तक अनाथ बनकर दर – दर भटक रहे विश्वनाथ को नया नाथ ‘नसीब’ हो गया है जो आलू से सोना बनाता है, जिसको पता नहीं कि धान के वृक्ष होते हैं या पौधे, जो स्वयं को दत्तात्रेय ब्राह्मण सिद्ध करने के लिए अनेक पाखंड करता है, जो कोट के ऊपर यज्ञोपवीत और कोट के अन्दर क्रॉस धारण करता है. ‘कालीचरण’ को जब अटल बिहारी वाजपेयी मंत्रिमंडल में मंत्री बनाया गया था तो वे सबसे निकम्मे मंत्री के रूप में कुख्यात थे. जब मोदीजी ने उन्हें मंत्री नहीं बनाया तो वे विपक्ष के प्रवक्ता बन गए. उनका एकमात्र ‘इरादा’ एक अदद मंत्री पद प्राप्त करना था. इसी महत्वाकांक्षा में उन्होंने राजनीति को ‘रणभूमि’ में तब्दील कर दिया. विगत पाँच साल से वे ‘आतिशबाज’ बनकर ‘विद्रोही’ की भूमिका निभा रहे थे और मोदी सरकार पर अपने डायलग का ‘गोला बारूद’ छोड़ रहे थे. अपनी इस लड़ाई को वे ‘धर्मयुद्ध’ सिद्ध करना चाहते थे लेकिन यह उनका नितांत स्वार्थपरक संग्राम था. बिहार को दो सौ वर्ष पीछे अंधकार युग में धकेल देनेवाले लालू यादव छेनू को अवतारी पुरुष लगते हैं. जबसे बीजेपी के शत्रु राष्ट्रीय गटर पार्टी में शामिल हुए हैं और उन्होंने इटालियन हमउम्र माताश्री के चरण स्पर्श कर अपना जीवन सार्थक बनाया है तब से चापलूसी के कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं. सिनेमा में डायलगबाजी कर दर्शकों से तालियाँ बजवा लेना अलग बात है और राजनीति के मैदान में सफलता प्राप्त करना अलग बात. बीजेपी की लोकप्रियता के रथ पर सवार होकर सांसद और मंत्री बन गए लेकिन अब उसी पार्टी को गाली देना कृतघ्नता की पराकाष्ठा है.

परिचय - वीरेन्द्र परमार

जन्म स्थान:- ग्राम + पोस्ट- जयमल डुमरी, जिला:- मुजफ्फरपुर(बिहार) -843107, जन्मतिथि:-10 मार्च 1962, शिक्षा:- एम.ए. (हिंदी),बी.एड.,नेट(यूजीसी),पीएच.डी., पूर्वोत्तर भारत के सामाजिक,सांस्कृतिक, भाषिक,साहित्यिक पक्षों,राजभाषा,राष्ट्रभाषा,लोकसाहित्य आदि विषयों पर गंभीर लेखन, प्रकाशित पुस्तकें :-1.अरुणाचल का लोकजीवन(2003) 2. अरुणाचल के आदिवासी और उनका लोकसाहित्य(2009) 3.हिंदी सेवी संस्था कोश(2009) 4.राजभाषा विमर्श(2009) 5. कथाकार आचार्य शिवपूजन सहाय (2010) 6. हिंदी:राजभाषा,जनभाषा,विश्वभाषा (संपादन- 2013) 7.पूर्वोत्तर भारत: अतुल्य भारत, मोबाइल- 9868200085, ईमेल:- bkscgwb@gmail.com

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