कविता

बेटी ही धन है

बेटी ही धन है
बेटी है तो जन है
बेटी है तो मान है
बेटी है तो आप भाग्यवान है।

परिवार की ऊजाला है बेटी
माँ बाप की रखवाला है बेटी
बेटी है तो बहार है
बेटी से ही तो संसार है।

ये बेटे बेटी में भेद कैसा
दिलो दिमाग में ये छेद कैसा
मन को कर लो साफ
क्योंकि आप हो उसके माँ बाप ।

बेटी तो है देवी का रूप
देवी में है माँ का स्वरूप
न करो देवी का अपमान
इनका करो दिल से सम्मान ।

कुछ दरिंदो ने किया भ्रूण हत्या
कुछ ने किया है बलात्कार
ऐसे पापियों का है धिक्कार
इनमें नहीं है कोई संस्कार ।
मृदुल