दिलखुश जुगलबंदी-12

दोस्त इसे इबादत समझता है

दोस्त दोस्त नहीं खुदा होता है,
महसूस होता है जब वो जुदा होता है,
बिना दोस्त जीवन सजा होता है,
और दोस्त जैसा हो तो जीवन में मजा-ही-मजा होता है.

दोस्ती के लिए दोस्ती जैसा अहसास चाहिए,
मुश्किल हो रहना जिसके बिना वो प्यास चाहिए,
दोस्ती वही सच्ची होती है जो कायम रहे हमेशा,
क्योंकि दोस्ती के लिए जगह दिल में खास चाहिए.

दीदी जिंदगी हमें बहुत खूबसूरत दोस्त देती है,
लेकिन अच्छे दोस्त हमें खूबसूरत जिंदगी देते हैं.
प्यार की मस्ती किसी दुकान में नहीं बिकती ,
अच्छे दोस्तों की दोस्ती हर वक़्त नहीं मिलती,
रखना सदा दोस्तों को दिल में सजाकर,
क्योंकि यारों की यारी कभी गैरों से नहीं मिलती.

गैर क्यों कहें किसी को,
इस जहां में सब अपने हैं, कोई गैर नहीं होता,
कल तक जो हमारे लिए अनजाना था, वही आज दोस्त है होता,
दोस्त से ही ताजगी है हमारी जिंदगी में,
भले ही उससे कोई खून का रिश्ता नहीं होता.

दोस्तों की दोस्ती में कोई रूल नहीं होता,
और ये सिखाने के लिए कोई स्कूल नहीं होता.
दोस्ती का रिश्ता पुराना नहीं होता,
इससे बड़ा कोई खजाना नहीं होता,
दोस्ती तो प्यार से भी पवित्र है,
इसमें कोई पागल या दीवाना नहीं होता.

यह सच है दोस्ती में कोई पागल या दीवाना नहीं होता,
हो भी तो सच्चे दोस्त जैसा कोई डॉक्टर नहीं होता,
सच्चा दोस्त अच्छा डॉक्टर भी होता है तीमारदार भी,
ऐसा डॉक्टर इस जहां में तो नहीं ही होता.

ज़िन्दगी सुन्दर है पर मुझे जीना नहीं आता,
हर चीज में नशा है पर मुझे पीना नहीं आता,
सब मेरे बिना जी सकते हैं,
पर मुझे दोस्तों के बिना जीना नहीं आता.
कामयाबी बड़ी नहीं, पाने वाले बड़े होते हैं,
जख्म बड़े नहीं, भरने वाले बड़े होते हैं,
इतिहास के हर पन्ने पर लिखा है,
दोस्ती बड़ी नहीं, निभाने वाले बड़े होते हैं.

यह सच है कामयाबी बड़ी नहीं होती,
कामयाबी पाने वाले बड़े होते हैं,
अक्सर कामयाबी में भी दोस्त की सलाह का हाथ होता है,
इसे दोस्त मेहरबानी, अहसान या इनायत नहीं समझता
सच मानो तो दोस्त इसे इबादत समझता है.

मेल के माध्यम से रविंदर सूदन और लीला तिवानी की दिलखुश जुगलबंदी.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।