चित् तरंगिणी का भव्य विमोचन ।

21/04/19 को उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय में युवा महोत्सव के अवसर पर हिन्दी और संस्कृत काव्य जगत में अपनी पहचान बना रही चित् तरंगिणी पत्रिका के द्वितीय अंक का विमोचन उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति देवी प्रसाद त्रिपाठी, निर्वाणी आखाडे के महामण्डलेश्वर स्वामी प्रेमानन्द जी महाराज, संस्कृत विश्वाविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं पतञ्जलि विश्वविद्यालय के वर्तमान उपकुलपति प्रो महावीर अग्रवाल, विश्वविद्यालय के कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी,प्रो शैलेश तिवारी, योगाचार्य लक्ष्मी नारायण जोशी एवं संस्कृत के विद्वान आचार्य राधेश्याम जी के करकमलों से किया गया।
इस अवसर पर प्रो महावीर अग्रवाल ने कहा कि पत्र पत्रिकाओं का साहित्य के उन्नयन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है एेसी पत्रिकाएँ नवोदित साहित्यकारों को स्थापित करती है, और स्थापित साहित्यकार समय समय जन जागृति का कार्य करते है।
पत्रिका की प्रधान सम्पादिका आराधना आनन्द ने उपस्थित लोगों को पत्रिका के विषय में विस्तार से जानकारी दी। पत्रिका के सम्पादक रामचन्द्र ममगाँई “पंकज” ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति, संस्कृत, सस्कार, समृद्धि को जन जन तक पहुँचाने और युवाओं को भारतीय संस्कृति के प्रति सद्भाव रखने व सद् आचरण को जीवन में उतारने के लिए प्रेरित करना हमारा उद्देश्य है । इस अवसर प्रो अरविन्द नारायण मिश्र, प्रो प्रतिभा शुक्ला, डाॅ कंचन तिवारी, प्रो प्रकाश पन्त, डाॅ अरुण मिश्रा डाॅ बिन्दुमति द्विवेदी, डाॅ सुमन भट्ट, डाॅ मीनाक्षी सिंह, धनेश्वर द्विवेदी, वेदमित्र, प्रमोद जोशी, दीपा दिवाकर ललित जोशी, नित्यानन्द ममगाँई, नीरज काला सहित विश्वविद्यालय के छात्र छात्राऎ उपस्थित थे ।

परिचय - रामचन्द्र ममगाँई पंकज

नाम- रामचंद्र ममगाँई । साहित्यिक नाम-पंकज । जन्मतिथि- 15 मई 1996 पिता का नाम- श्री हंसराम ममगाँई। माता का नाम- श्रीमति विमला देवी। जन्म स्थान-घनसाली टिहरी गढवाल उत्तराखंड। अस्थायी पता - देवपुरा चौक हरिद्वार उत्तराखण्ड। स्थाई पता- ग्राम मोल्ठा पट्टी ढुंगमन्दार घनसाली जिला टिहरी गढ़वाल उत्तराखंड पिन को- 249181 मो.न. 9997917966 ईमेल- ramchandramamgain@gmail.com शिक्षा- शास्त्री और शिक्षाशास्त्री रचना साझा संकलन 1 अनकहे एहसास 2. एहसास प्यार का विशेष - चित् तरंगिणी त्रैमासिक पत्रिका का मुख्यसम्पादक । हिन्दी व संस्कृत के विभिन्न विषयों पर लेख व कविता अनेक पत्रिकाओं व अखबार में प्रकाशित ॥