नाचिए-गाइए-खुशियां मनाइए

विश्व डांस दिवस पर विशेष
कल यानी 29 अप्रैल को विश्व डांस दिवस था. आप सोच रहे होंगे कि हम विश्व डांस दिवस पर ब्लॉग क्यों लिख रहे हैं! आपका सोचना वाजिब है. हमारा कहना है कि ब्लॉग के लिए विषय की कोई बंदिश थोड़े ही है! तो जनाब विश्व डांस दिवस के बहाने नाचने-गाने-खुशियां पाने को तैयार हो जाइए.

स्वस्थ रहने के बहुत सारे तरीके हैं. स्वस्थ खान-पान, व्यायाम, योग आदि, लेकिन एक तरीका ऐसा भी है जिसके लिए आपको खुद से जबरदस्ती नहीं करनी पड़ती. अगर आप डांस के शौकीन है, तो आपको ये मालूम होना जरूरी है कि अपने डांस के शौक को पूरा करने के साथ-साथ आप अपनी सेहत को भी बहुत तरीके से फायदा पहुंचा रहे होते हैं.

याददाश्त में वृद्धि-
न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसन की एक स्टडी के अनुसार, डांस आपकी याद्दाश्त बढ़ा सकता है. इसकी वजह से बूढ़ा होने पर आपके अंदर डिमेंटिया (मनोभ्रंश, पागलपन) होने की संभावना भी काफी कम हो जाती है. विज्ञान बताता है कि ऐरोबिक एक्सरसाइज दिमाग के उस हिस्से को नुकसान से बचाती है, जो याद्दाश्त को नियंत्रित करता है.

लचीलापन-
डांस शरीर में लचीलापन लाता है। शरीर में लचीलापन होने की वजह से जॉइंट पेन में काफी आराम मिलता है. साथ ही, पोस्ट-एक्सरसाइज सोरनेस भी कम होती है.

तनाव से मुक्ति-
अगर आपको तनाव से मुक्त करता है. आप म्यूजिक ऑन करते और डांस करके रिलैक्स महसूस कर पाते हैं, ऐसे में अगर आपके साथ डांस में कोई पार्टनर हो, तो सोने में सुहागा. आप पूरी तरह से तनाव मुक्त हो गए. इसलिए पहली बात तो तनाव होने मत दीजिए, फिर अगर तनाव महसूस कर भी रहे हैं, तो नाचिए-गाइए-खुशियां मनाइए. आपको गाना नहीं आता? कोई बात नहीं, कोई अच्छा-सा डांस-ट्रैक चलाइए और नाचिए-गाइए-खुशियां मनाइए.

वजन कम होना
डांस करने से हमारे शरीर की बहुत अधिक कैलोरी बर्न होती है. डांस करने से ब्‍लड सर्कुलेशन अच्‍छा होता है तथा बॉडी भी टोन हो जाती है. वजन कम करने के लिए फ्रीस्टाइल डांस सबसे अच्छा विकल्प है. इस डांस से न केवल मोटापा घटता है बल्कि शरीर का लचीलापन भी बढ़ता है. इसको करने के लिये फास्‍ट म्‍यूजिक की जरूरत होती है, जो नॉन स्‍टॉप बजता रहे.

पॉस्चर सुधारता है-
अगर आपके पॉस्चर में कोई दिक्कत है, जो आपके स्वास्थ्य की दिक्कत बनकर सामने आ रही है तो ऐसा करें कि डांस करना शुरू कर दें. ऐसा देखा गया है कि नियमित रूप से डांस करने से पॉस्चर में सुधार आता है. इससे आपका आपके शरीर पर नियंत्रण बढ़ जाता है.

ऊर्जा बढ़ाता है-
स्कॉलर पब्लिशिंग एंड अकेडमिक रिसोर्सिज कोलीशन में प्रकाशित एक रिसर्च ने पाया कि साप्ताहित डांस प्रोग्राम शारीरिक परफॉर्मेंस बढ़ाता है. इससे शरीर का ऊर्जा का स्तर काफी बढ़ जाता है. साथ ही, डांस करने वाले लोगों में स्टैमिना भी उनकी तुलना में अधिक होता है जो डांस नहीं करते.

स्लिम ट्रिम लुक पाने के लिए हम क्या-क्या तरकीब नहीं अपनाते. ग्रीन टी से लेकर एक्सर्साइज, योग और न जाने किन किन टूल्स का हम सहारा लेते हैं, लेकिन डांस के जरिए भी आप अपना काफी सारा वजन घटा सकते हैं.

डांस करते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखें-

– वॉर्म अप करें और स्ट्रेचिंग जरूर कर लें नहीं तो नस खिंच सकती है और दबाव पड़ सकता है.

– सिंपल डांस स्टेप से शुरुआत करें.

– अगर किसी डांस स्टेप को करने में कोई मुश्किल आ रही है या फिजिकली आपके लिए वह दिक्कत भरा है तो उसे एकदम से करने की कोशिश न करें. धीरे-धीरे अपनी कपैसिटी बढ़ाएं.

तो साहब हंसने-मुस्कुराने, नाचने-गाने का कोई छोटा-सा अवसर भी हाथ से मत जाने दीजिए, हंसना-मुस्कुराना, नाचना-गाना ही जीवन को खुशनुमा बनाता है. मैंने रसोईघर में रेडियो लगा रखा है. रसोईघर में जाते ही लाइट के साथ-साथ रेडियो ऑन कर देती हूं और काम करते-करते थिरकती भी रहती हूं. मौका मिलते ही ”अपलम चपलम चप लाई रे”. गाना गाकर मैं अक्सर व्यायाम के तौर पर रसोईघर में गाती-डांस करती रहती हूं, इससे लचीलापन बना रहता है, फिर सुबह-शाम की सैर भी अच्छी तरह होती है. कीर्तन-सत्संग में भी डांस का चांस मिलता रहता है. आप किस तरह डांस करने का चांस लेते हैं, कामेंट्स में बताइए.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।